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बेरमो सिविल कोर्ट : दोहरे हत्याकांड मामले में दो को आजीवन कारावास

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Bermo : बेरमो स्थित तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के जिला जज द्वितीय की अदालत ने दोहरे हत्याकांड के सिद्ध दोषी नावाडीह थाना के धमनी गांव निवासी पुरुषोत्तम महतो उर्फ पूरन महतो एवं उसकी दूसरी पत्नी शांति देवी को बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

दहेज के लिए उसकी बहन को प्रताड़ित किया जाने लगा था

विदित हो कि धनबाद निवासी हेमंत कुमार ने बेरमो अनुमंडल के नावाडीह थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराया था कि उसकी बहन की शादी पुरुषोत्तम महतो के साथ 1993 मे हुई थी. शादी के कुछ वर्ष बाद से ही दहेज के लिए उसकी बहन को प्रताड़ित किया जाने लगा था. ससुराल वालों ने उसकी बहन को मारकर रेलवे लाइन पर फेंक दिया था. एक महिला ने यह पूरी घटना देखी और उसका इलाज कराकर उसे बचा लिया था. जिसके बाद ससुराल वालों पर मुकदमा दर्ज कराया गया. स्थानीय मुखिया एवं महिला समिति के द्वारा पंचायती करने के बाद उसकी बहन धमनी में रहने लगी थी.

साक्ष्य छिपाने की नीयत से शव को जला दिया था

बाद में 3 मार्च 2014 को उसकी बहन हंस पद्मिनी एवं भगनी धनवंती कुमारी की कमरे में हत्या कर आग लगाकर जला दिया गया था. जानकारी मिलने पर जब वे वहां पहुंचे तो देखा कि स्थानीय लोगों एवं पुलिस के द्वारा दरवाजा खोला गया था. जहां उसकी बहन एवं भगनी बुरी तरह जली हुई थी. उन्होंने दावा किया था कि उसकी बहन एवं भगनी को पुरुषोत्तम महतो उर्फ पूरन महतो, उसकी दूसरी पत्नी, पुरुषोत्तम महतो के माता एवं पिता ने मिलकर निर्मम हत्या कर दी थी तथा साक्ष्य छिपाने की नीयत से जला दिया था.

दोषी पाने के बाद दोनों को आजीवन कारावास

उक्त ब्यान के आधार पर नावाडीह थाना में कांड संख्या 44/2014 के तहत केस दर्ज किया गया था. आरोप पत्र समर्पित होने के बाद सत्रवाद संख्या 204/14 स्थानांतरित होकर श्री हैदर के न्यायालय में आया. न्यायालय में उपलब्ध गवाह एवं उभय पक्ष के अधिवक्ता के बहस सुनने के बाद श्री हैदर ने पुरुषोत्तम महतो उर्फ पूरन महतो एवं उसकी दूसरी पत्नी शांति देवी को हत्या के मामले में सिद्ध दोषी पाने के बाद दोनों को आजीवन कारावास एवं दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

जुर्माना कि राशि नहीं अदा करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा होगी. दोनों अभियुक्त वर्ष 2014 से ही जेल में बंद है. वाद के अन्य अभियुक्त पुरुषोत्तम महतो की मां जो मर गई थी एवं पुरुषोत्तम महतो के पिता को साक्ष्य के अभाव में पूर्व में रिहा कर दिया गया था. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह ने बहस की.

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