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बेरमो उपचुनाव : चुनावी दंगल में योगेश्वर बाटुल और रविंद्र पांडेय के बीच मृगांक शेखर बनायेंगे रास्ता!

Amit Jha

Ranchi.  3 नवंबर को बेरमो में उपचुनाव होना है. यूपीए की ओर से कांग्रेसी लीडर जयमंगल सिंह रेस में आगे चल रहे हैं. भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. वैसे इसके लिए पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय, पूर्व एमएलए योगेश्वर महतो बाटूल जोर आजमाइश कर रहे हैं.

पर इन हेविवेट नामों के बीच पार्टी के युवा मोर्चा के कार्यकारिणी सदस्य मृगांक शेखर का नाम भी तेजी से सामने आया है. सीसीएल के निवर्तमान सीएमडी गोपाल सिंह के बेटे मृगांक के सामने आने से राजनीतिक रोमांच बढ़ गया है. बेरमो के लोगों की मानें तो जयमंगल और मृगांक जैसे दो युवा चेहरों के सामने आने से राजनीति की नयी बयार उनके यहां बहनी शुरू हुई है.

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रविंद्र पांडेय और बाटुल के साथ रेस

बेरमो के साथ-साथ भाजपा ने दुमका उप चुनाव में पार्टी कैंडिडेट के चुनाव के लिए सर्वेक्षण कराया है. सर्वे में जनाधार का सबसे उंचा ग्राफ पाने वालों को ही इन सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा. सर्वे एजेंसी ने फिलहाल अपनी रिपोर्ट तैयार कर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पास भेज दिया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय और बेरमो के ही पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बेरमो के लिए मेहनत कर रहे हैं.

दोनों भाजपा के हेविवेट लीडरों में से रहे हैं. पांडेय 5 बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं जबकि चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके बाटुल 2 बार विधानसभा पहुंच चुके हैं. पर इनके बीच मृगांक शेखर भी सामने आ सकते हैं. 2019 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में मृगांक ने योगेश्वर बाटुल के लिए लगातार मेहनत की थी. पार्टी उनमें भी भविष्य की संभावना देख रही है.

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आजसू का साथ

बेरमो और दुमका उपचुनाव के लिए आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने एनडीए कैंडिडेट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है. पर भाजपाई लीडरों की मानें तो आजसू बेरमो में रविंद्र पांडेय की बनिस्पत किसी भी दूसरे कैंडिडेट के लिए ज्यादा मेहनत करेगी. चाहे वे योगेश्वर बाटूल हों या मृगांक या अन्य. पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में गिरिडीह सीट आजसू के खाते में चली गयी थी. चूंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गिरिडीह से अपने सांसद रहे रविंद्र पांडेय का पत्ता काट कर यह सीट आजसू को दे दी थी.

चंद्र प्रकाश चौधरी ने यहां से कामयाबी भी पायी पर कुछ जगहों से अपेक्षित वोट उन्हें नहीं मिले थे. आजसू कार्यकर्ता इसके लिए अप्रत्यक्ष तौर पर रविंद्र पांडेय को दोषी मानते आये हैं. योगेश्वर बाटुल को केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का करीबी माना जाता है. 2019 के असेंबली चुनाव में भी उनकी ही पहल पर बाटुल को फिर से टिकट मिला था. पर चुनाव में तकरीबन 25 हजार वोटों के अंतर से उनकी हार के बाद फिर से उनके लिए राह कठिन हो सकती है. ऐसे में संभव है कि मृगांक पर भाजपा दांव खेले.

नाना शंकर दयाल का असर

न्यूजविंग से बातचीत में मृगांक शेखर ने कहा कि आइआइएम, रांची से पढ़ाई इसी साल उनकी पूरी हुई है. अच्छा प्लेसमेंट भी मिल सकता है. पर इसकी बजाये उन्हें बेरमो के लिए नये डेवलपमेंट मॉडल पर काम करने की इच्छा है. बेरमो उनकी मातृभूमि रही है. इसे कर्मभूमि बनाने की ख्वाहिश है.

उनके नाना स्व शंकर दयाल सिंह बिहार सरकार में 70-80 के दशक में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. वे धनबाद के सांसद भी रहे. अब उनकी विरासत को भी आगे बढाने की इच्छा है. पार्टी ने मौका दिया और कामयाबी मिली तो वे बेरमो के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से समग्र विकास की योजना पर काम करेंगे.

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