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दक्षिणेश्वर तीर्थ के विकास पर 20 करोड़ खर्च करेगी बंगाल सरकार

तैयार की जा रही रोपवे प्रणाली, शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने विधानसभा में दी जानकारी

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Kolkata : पश्चिम बंगाल सरकार कोलकाता के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल दक्षिणेश्वर के विकास पर  20 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च करेगी. यह जानकारी राज्य के नगरपालिका और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने बुधवार को विधानसभा में दी.

उन्होंने बताया कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस की अध्यात्मिक स्थली रही दक्षिणेश्वर में मंदिर का निर्माण रानी रासमणि ने कराया था. इसीलिए रानी से जुड़ी यादों को संजोने हेतु राज्य सरकार अलग-अलग परियोजनाओं के जरिए कई विकासमूलक कार्य करेगी.

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नदी घाट का नवीनीकरण

इसमें दक्षिणेश्वर मंदिर के पास दो करोड़ 48 लाख 75 हजार रुपये खर्च कर एक रोप-वे प्रणाली तैयार की जा रही है. इसके अलावा शारदा मां जिस नदी के घाट का इस्तेमाल करती थीं उसके नवीनीकरण के लिए आठ करोड़ 10 लाख 10 हजार रुपये की धनराशि आवंटित की गयी है.

इसके साथ ही वहां के नदी घाटों के विकास के लिए नौ करोड़ 16 लाख 97 हजार रुपये की धनराशि आवंटित कर दी गयी है.

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रानी रासमणि की मूर्ति होगी स्थापित

उन्होंने बताया कि मंदिर कमेटी ने रानी रासमणि की एक मूर्ति दी है जिसे प्रतिस्थापित किया जायेगा. इसके लिए कमरहटी नगर निगम को जिम्मेवारी दी गयी है.

माकपा ने उठाये सवाल

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इस घोषणा के बाद माकपा के विधायक मानस मुखर्जी ने कहा कि ऐसी चर्चा चल रही है कि रानी रासमणि की मूर्ति जहां लगाई जायेगी वहां पहले से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति स्थापित है. इस तरह का भी भ्रम फैल रहा है कि सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति को हटाकर रानी रासमणि की मूर्ति लगाई जायेगी.

मानस ने कहा कि वह रानी रासमणि का सम्मान करते हैं लेकिन नेताजी सुभाष चंद्र जैसे क्रांतिकारी की मूर्ति को हटाकर रानी की मूर्ति लगाना ठीक नहीं होगा.

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मंत्री ने दिया जवाब

इसके जवाब में फिरहाद हकीम ने कहा कि एक समय में वामपंथियों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “तोजो का वफादार” कहा था आज उन्हीं के प्रति आपकी श्रद्धा जाग रही है. यह वाकई सराहनीय है.

उन्होंने कहा कि नेताजी की मूर्ति हटाकर रानी रासमणि की मूर्ति स्थापित नहीं की जायेगी. इसके लिए हमलोग नयी जगह की तलाश कर रहे हैं.  नेताजी की मूर्ति जहां है वही रहेगी और रानी रासमणि की मूर्ति दूसरी जगह पर सम्मान के साथ स्थापित की जायेगी.

फिरहाद हकीम ने कहा कि दक्षिणेश्वर स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मस्थली है. यहां जितने मत उतने पंथ का सम्मान होता है और राज्य सरकार निश्चित तौर पर उसी रास्ते पर चलेगी.

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