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बंगाल चुनाव: बोस की भावनाओं से जनमत पाकर बॉस बनने की तैयारी में है भाजपा और टीएमसी

Kolkata: बंगाल चुनाव के आने के साथ ही भाजपा और टीएमसी नेताओं के बोल बिगड़ने लगे है. हाल ही में पश्चिम बंगाल की यात्रा कर गृहमंत्री अमित शाह भी लौटे हैं. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को टैगोर के ‘विश्व भारती विश्वविद्यालय’ के शताब्दी समारोह को संबोधित किया था. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के भाषणों में खुदीराम बोस का जिक्र बार- बार आ रहा था.
बंगाल में चुनाव करीब आ रहे हैं, लड़ाई सिर्फ राजनीतिक या नागरिकों के मुद्दों पर नहीं हो रही है, बल्कि अब लड़ाई इस पर केंद्रित हो रही है कि बंगाली ‘अस्मिता’ का असली रखवाला कौन है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भी करीब आ रही है. इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच खींचतान चल रही है कि कौन इसे बेहतर ढंग से मनाता है. बंगाल के लोगों में भी ये धारणा है कि नेताजी की मौत 1945 में ताइवान में हुई विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी.

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बीजेपी को बाहरी साबित करने का प्रयास

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद को ऐसे नेता के रूप में पेश कर रही हैं जो बंगाल की संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं, राज्य के प्रतीक का सम्मान करती हैं और एक औसत बंगाली की भावनाओं को समझती है. बीजेपी को वे बाहरी के रूप में पेश कर रही हैं. लेकिन बीजेपी भी ये संदेश देने के लिए उत्सुक है कि वह भी इस मामले में पीछे नहीं है.

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धूमधाम से नेताजी की जयंती मनाने में जुटी भाजपा

 

केंद्र सरकार 23 जनवरी को बड़े ही धूमधाम तरीके से नेताजी की 125वीं जयंती मनाने की तैयारी में है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने अमित शाह के नेतृत्व में समारोह के लिए एक समिति की घोषणा कर दी है. नेताजी के परिवार के सदस्य चंद्र बोस समेत कई प्रमुख हस्तियां इस समिति का हिस्सा हैं. बीजेपी का कहना है कि तृणमूल को यह अधिकार नहीं है कि वह नेताजी को अपना माने और मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने नेताजी से संबंधित कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं.

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बंगाल चुनाव में जनभावना को भुनाने का है प्रयास

नेताजी की मौत को लेकर रहस्य अब भी बरकरार है. तृणमूल और बीजेपी दोनों ही नेताजी को लेकर बंगाल में बनी हुईं जनभावनाओं को भुनाना चाहती हैं. चुनावी मौसम में नेताजी सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गए हैं क्योंकि तृणमूल ने इस चुनाव को ‘हिंदू राष्ट्रवाद बनाम बंगाली गौरव’ में तब्दील कर दिया है. इस संदर्भ में, न सिर्फ नेताजी बल्कि रबींरवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय आदि सभी महापुरुष महत्व रखते हैं.

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