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वर्कलोड से परेशान पुलिसकर्मी हो रहे हैं बीमारी के शिकार

पुलिसकर्मियों की भारी कमी, 90 फीसदी जवान करते हैं 8 घंटे से ज्‍यादा ड्यूटी

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Ranchi: शहर के थाने और ट्रैफिक थानों में तैनात पुलिसकर्मी काम और वरीय अधिकारियों के दबाव के तले दबे हुए हैं. इसकी वजह से उन्‍हें खाने-पीने से लेकर सोने तक का समय भी नहीं मिलता है. इसका मुख्‍य वजह एक तो स्वीकृत बल के मुताबिक पदाधिकारियों और पुलिस के जवानों का पदस्थापन थानों में नहीं किया गया है, वहीं दूसरी ओर वरीय अधिकारी के द्वारा निकलने वाले हर दिन के आदेशों का पालन करते परेशान रहते हैं.

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डिप्रेशन व बीमारी के शिकार बन रहे पुलिसकर्मी

काम का ज्यादा दबाव होने और हर दिन आठ से 14 घंटे से अधिक काम करने के कारण पुलिसकर्मी डिप्रेशन और बीमारी के शिकार हो रहे हैं. एक पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि ज्यादा समय तक काम करने की वजह से ज्‍यादातर पुलिसकर्मियों में चिड़चिड़ापन आ जाता है, जिस कारण आम लोगों के प्रति उनका खराब व्यवहार की बातें सामने आती हैं.

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ट्रैफिक पुलिसकर्मी लीवर की बीमारी से पीड़ित

पिछले दिनों एक सर्वे में यह बात सामने आई थी कि रांची जिला के ज्‍यादातर ट्रैफिक पुलिसकर्मी लीवर की बीमारी के शिकार हैं या शिकार होने के करीब हैं. इसलिए जरूरी है कि पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ायी जाये, ताकि काम के घंटे को कम किया जा सके.

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क्या कहते हैं आंकड़े

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ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट झारखंड के मुताबिक करीब 28 प्रतिशत पुलिकर्मी हर दिन 14 घंटे से अधिक ड्यूटी करते हैं. 11 घंटे से अधिक ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या करीब 68 प्रतिशत है. और करीब 90 प्रतिशत पुलिसकर्मी आठ घंटे से अधिक ड्यूटी करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक  पुलिसकर्मियों को महीने में आठ-दस बार छुट्टी के वक्त भी ड्यूटी पर बुला लिया जाता है.

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पुलिस के जवानों व पदाधिकाि‍रियों ने बताई अपनी पीड़ा

शहर के विभिन्न थाने में जाकर बात करने पर पदाधिकारियों व जवानों ने बताया कि उन्‍हें सोने का भी वक्त नहीं मिलता है. एक तो स्वीकृत बल के मुताबिक पदाधिकारियों व जवानों का पदस्थापन थाना में नहीं किया गया. ऊपर से सीनियर अफसरों का हर दिन निकलने वाले आदेशों का पालन करते-करते पदाधिकारी व जवान परेशान हो रहे हैं.

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महीने में होते हैं 30-35 केस दर्ज

सभी थाना में हर माह 30-35 केस दर्ज किये जाते हैं, जिनमें 10 से 15 मामले गंभीर श्रेणी के होते हैं. इसके अनुसंधान की जिम्मेदारी वहां के पदाधिकारियों पर ही होती है. प्रत्येक माह 10 से अधिक पासपोर्ट का वेरिफिकेशन करना होता है, 10-15 लोगों के चरित्र का सत्यापन, 200 के करीब सम्मान व वारंट का तामिला करना होता है. इसके अलावा थाना में तैनात पदाधिकारियों व जवानों को महीने में 10-15 दिन विधि-व्यवस्था की ड्यूटी करनी पड़ती है. संदिग्ध और केस के वारंटी के खिलाफ छापेमारी, सभी थाना में प्रतिमाह करीब 50 विशेष और करीब 100 साधारण जांच से संबंधित मामले आते हैं, जिनकी जांच करना किसी मामले में आरोपियों का सत्यापन करना. थाना में तैनात पुलिस कर्मियों के अन्य काम माह में करीब 15 दिन विधि-व्यवस्था से संबंधित ड्यूटी, परीक्षा ड्यूटी,  पर्व, त्योहार, धरना, प्रदर्शन और जुलूस से संबंधी ड्यूटी,  केस में गवाही के लिए समय-समय पर न्यायालय जाना, डेली रिपोर्ट तैयार करना, मुख्यमंत्री जन संवाद से प्राप्त मामलों की जांच, मासिक रिपोर्ट, तैयार करना, घटना-दुर्घटना के शिकार लोगों को अस्पताल पहुंचाना, केस से संबंधित मामले में न्यायालय में शपथ पत्र देना, समय-समय पर बैंक चेकिंग और एंटी क्राइम कंट्रोल चेकिंग.

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