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मंडल परियोजना के शिलान्यास से पहले नये सिरे से बेनिफिशियरी कमांड एरिया और डीपीआर तय कराये सरकार: केएन त्रिपाठी 

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Palamu: पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी उत्तर कोयल परियोजना के विस्थापित परिवारों के साथ लातेहार जिले के मंडल से पदयात्रा करते हुए 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे. वे प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपेंगे. इसके लिए पूर्व मंत्री ने पीएम को एक पत्र लिखा है.

पत्र के माध्यम से केएन त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि उत्तर कोयल जलाशय परियोजना का शिलान्यास करने से पहले नये सिरे से बेनिफिशियरी कमांड एरिया और डीपीआर निर्धारित करायें, ताकि पलामू, गढ़वा, लातेहार और चतरा जिले को पानी देने के बाद ही अन्य जिलों को पानी दिया जा सके. पूर्व मंत्री ने कहा है कि मंडल परियोजना के नीचे खपिया, अमानत एवं कोयल नदी के संगम पर बराज का निर्माण कराया जाये, ताकि पलामू और गढ़वा को पानी मिल सके.

उन्होंने प्रधानमंत्री से विस्थापित 15 गांव के 1600 परिवारों को जमीन का पूरा मुआवजा देने, उन्हें बसाने के लिए एक कॉलोनी बनाने, विस्थापितों को नौकरी देने और खेती के लिए गैरमजरूआ जमीन खेती के लिए देने की मांग की है. श्री त्रिपाठी ने कहा है कि 1967 के आकाल के बाद उत्तर कोयल परियोजना की परिकल्पना पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने के लिए की गयी थी, लेकिन बाद में इसका बेनीफीशियरी एरिया अन्य जिलों को निर्धारित कर दिया गया. इसका भीष्म नारायण सिंह के नेतृत्व में पुरजोर विरोध किया गया था. तब यह कहा गया था कि औरंगा, कनहर, तहले और बटाने जलाशय परियोजना के जरिये पलामू, गढ़वा, लातेहार और चतरा को पानी दिया जायेगा, लेकिन आज स्थिति यह है कि पलामू प्रमंडल में प्रायः हर साल सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न होती है.

पूर्व मंत्री ने परियोजना के दूसरे पहलू की तरफ भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया है. उन्होंने कहा है कि जो 15 गांव आज से 48 साल पहले इस परियोजना के लिए कागजों पर विस्थापित किये गये थे, वे आज भी वहां अवस्थित हैं. उन दिनों कुछ हजार रूपये 276 परिवारों को दिये गये थे, लेकिन करीब 1500-1600 परिवार वहां रह रहे हैं और उनके लिए आजीविका का कोई संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. आज सिर्फ 10 या 15 लाख रुपये दे कर उन्हें विस्थापित करना उनके विरूद्ध अन्याय होगा.

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