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हरमू नदी सौंदर्यीकरण : 16 करोड़ से बने 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, फिर भी स्थिति जस की तस, अब नये प्लांट बनाने का आदेश

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  • पुरानी डीपीआर में थीं खामियां, अब नयी डीपीआर बनाने का निर्देश
  • 85 करोड़ लागतवाली इस योजना को दो चरणों में किया जाना था पूरा
  • अक्टूबर 2018 में पहले चरण की डेडलाइन खत्‍म, पानी की गुणवत्ता में कोई विशेष सुधार नहीं
  • हरमू नदी का निरीक्षण कर नगर विकास सचिव ने जतायी थी नाराजगी
  • पहला चरण: गंगानगर से स्वर्णरेखा और हरमू नदी संगम स्थल तक (10.30 किमी सौंदर्यीकरण कार्य)
  • दूसरा चरण: हरमू नदी के उद्गम स्थल से गंगानगर तक

Ranchi : हरमू नदी सौंदर्यीकरण योजना सीएम रघुवर दास का ड्रीम प्रोजेक्ट है. प्रोजेक्ट के तहत सीएम ने नदी को साफ कर उसे पुराने जैसा बनाने का निर्देश 15 मार्च 2015 को दिया था. 85 करोड़ रुपये तक की लागतवाले इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाना था. पहला चरण गंगानगर से होते हुए स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम स्थल (10.30 किमी) तक और दूसरा चरण गंगानगर से हरमू नदी के उद्गम स्थल तक निर्धारित था. पहले चरण के लिए अक्टूबर 2018 तक की डेडलाइन निर्धारित भी हुई. सौंदर्यीकरण कार्य के लिए ईगल इन्फ्रा कंपनी का भी चयन किया गया. इस चरण में करीब दो-दो करोड़ रुपये की लागत से आठ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) 16 करोड़ रुपये खर्च कर बनाये गये. इनमें से 7 प्लांट कार्य भी कर रहे हैं. लेकिन, आज भी हरमू नदी की स्थिति जस की तस बनी हुई है. पहले चरण की डेडलाइन समाप्त होने के बाद भी नदी के सौंदर्यीकरण कार्य में कोई सुधार न देख नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने एक बार फिर नये सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का निर्देश दिया है. इसके लिए उन्होंने नयी डीपीआर बनाने की बात कही है.

जस की तस बनी हुई है हरमू नदी की स्थिति

देखा जाये, तो 16 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद आज भी हरमू नदी की स्थिति जस की तस बनी हुई है. नदी की स्थिति को देखना हो, तो रेडिसन ब्लू के आस-पास बने एसटीपी को नजदीक से देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे अब तक करोड़ों खर्च करने के बाद भी नदी को साफ नहीं किया जा सका है. एक तो नदी से आ रही दुर्गंध में कोई कमी नहीं हुई है, दूसरी ओर नदी में पड़ी गंदगी  सौंदर्यीकरण कार्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.

आठ में से सात एसटीपी कार्यशील, फिर भी  साफ नहीं हुई हरमू नदी

नदी सौंदर्यीकरण कार्य के पहले चरण में 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये गये हैं. इसमें 1 प्लांट में करीब करीब 2 करोड़ की लागत आयी है. एक-एक प्लांट हरमू मुक्ति धाम, आस्था हॉस्पिटल के पास बना है. तो दो-दो प्लांट रेडिसन ब्लू, अमरावती कुसाई कॉलोनी, स्वर्णरेखा संगम के पास बनाये गये हैं. इनमें केवल एक प्लांट (रेडिसन ब्ल्यू) अभी कार्य नहीं कर रहा है. इतने प्लांट बनाने के बाद भी आज भी हरमू नदी के पानी में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है.

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डीपीआर में केवल प्लांट पर था जोर, वाटर सोर्स पर नहीं

नयी डीपीआर बनाने के निर्देश के बाद अब विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि पहले चरण के कार्य के लिए बनी डीपीआर में कई खामियां थीं. तीन साल बीतने के बाद जब पहला चरण ही पूरा नहीं हो सका है, तो दूसरे चरण का कार्य कब होगा? इसकी संभावना ही नहीं दिखती है. नदी में साफ पानी आने के बिना दूसरे चरण की कल्पना करना ही बेकार है. अधिकारी का कहना है कि पहले की डीपीआर में मुख्य खामी यह थी कि नदी में साफ पानी का वाटर सोर्स कैसे डेवलप होगा, इसकी चर्चा ही नहीं थी. उस डीपीआर में केवल नदी के सौंदर्यीकरण कार्य पर जोर देते हुए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की बात हुई थी, ताकि गिर रहे गंदे पानी को साफ किया जा सके. जब नदी में पानी ही नहीं रहेगा, तो इसके सौंदर्यीकरण कार्य की उपयोगिता क्या रह जायेगी. हकीकत यह है कि हरमू नदी तो वर्तमान में घर से निकलनेवाले गंदे पानी की बदौलत ही टिकी है. जबकि दूसरे चरण में नदी के उद्गम स्थल तक कार्य कर नदी के वाटर सोर्स को फिर से बनाया जा सकता है.

नहीं रुक सका है नदी में गंदे पानी का गिरना

मालूम हो कि हरमू नदी सौंदर्यीकरण कार्य की स्थिति को देख सोमवार को विभागीय सचिव ने निरीक्षण कर काफी नाराजगी जतायी थी. कार्य से संतुष्ट न होते देख उन्होंने ईगल इन्फ्रा को कहा था कि नदी को फिर से स्वच्छ बनाना सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है. नदी सौंदर्यीकरण कार्य के लिए जो प्लांट बना है, उसकी क्षमता जरूरत से काफी कम है. कई जगह अभी भी नदी में गिर रहे गंदे पानी को रोका नहीं जा सका है. ऐसे में जरूरी है कि और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जायें. नये सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और गिर रहे नाले के वाटर फिल्टरेशन कार्य के लिए उन्होंने नयी डीपीआर बनाने की बात कही थी.

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