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तैयार रहिये, सुनने को, अब बिजली उत्पादन व वितरण कंपनियां हो रहीं दिवालिया

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Surjit Singh

मोदी सरकार में गर्व करने वाली तमाम घटनाओं के बीच कंपनियों के कर्ज में डूबने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. BSNL, ONGC, BHEL, HPCL, NHAI, SAIL के बाद अब बिजली उत्पादन व बिजली वितरण कंपनियां आर्थिक संकट में है. आप चाहें, तो इस पर भी गर्व कर सकते हैं. आजादी के 70 साल बाद हर बात पर गर्व करने का अवसर मिल रहा है.

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16 सितंबर को आपने अखबारों में शायद ही खबर देखी कि देश की बिजली वितरण कंपनियों की हालत खराब हो चली है. क्योंकि छपी ही नहीं. छपी भी है, तो छोटी सी. अंत के दूसरे पन्ने पर.  वितरण कंपनियों की हालत खराब होने की वजह से उत्पादन कंपनियां भी भारी दबाव में है.

खबर हैः देश की बिजली वितरण कंपनियों पर कर्ज बढ़ गया है. थोड़ी बहुत नहीं. पिछले साल के मुकाबले करीब 57 प्रतिशत. जुलाई माह में देश की बिजली वितरण कंपनियों पर बिजली उत्पादन कंपनियों का कर्ज बढ़कर 73,748 करोड़ हो गया है. पिछले साल, यानी 2018 में इसी माह यह कर्ज 46,779 करोड़ रुपये थी.

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जो आंकड़े सामने आये हैं, उसके मुताबिक, बिजली वितरण कंपनियों की माली हालत खराब से और ज्यादा खराब होती जा रही है. मार्च 2018 में वितरण कंपनियों पर 23,699 करोड़ रुपया का बकाया था. जो मार्च 2019 में बढ़कर 38,696 करोड़ रुपया हो गया. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 63 प्रतिशत ज्यादा था. जून 2019 में यह बकाया बढ़कर 46,412 करोड़ रुपये हो गया था.

इस सेक्टर के लिए सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि वितरण कंपनियों पर बकाया 73,748 करोड़ में से 54,342 करोड़ रुपया, वह रकम है, जिसे 60 दिन का अतिरिक्त समय देने के बाद भी नहीं चुकाया जा सका.

सबसे अधिक बकाया दो भाजपा शासित राज्यों की वितरण कंपनियों पर है. उत्तर प्रदेश पर 6,497 करोड़ व महाराष्ट्र पर 6,179 करोड़ रुपया बकाया है. अन्य राज्यों में राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश व कर्नाटक शामिल हैं.

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17 फरवरी 2019 को एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) ने कहा था अगर देश की बिजली वितरण कंपनियों ने समय पर बकाया नहीं चुकाया तो इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ेगा. एपीपी ने सरकार से अपील की थी कि वह राज्यों की सरकार को निर्देश दें कि बकाया भुगतान समय पर करें. एपीपी देश की 27 बड़ी बिजली उत्पादन कंपनियों का संगठन है.

इसके बाद मार्च महीने में खबर आयी थी कि बिजली वितरण कंपनियों द्वारा समय पर बकाया का भुगतान नहीं करने की वजह से बिजली उत्पादन कंपनियों को परेशानी हो रही है. कंपनियों ने जो 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, उसपर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. राज्यों के द्वारा समय पर बकाया नहीं चुकाने की वजह से बिजली का उत्पादन करने वाली कंपनियां समय कर कर्ज नहीं चुका पा रही हैं.

बाकये के आंकड़े डराने वाले हैं. एनटीपीसी का 7,778.38 करोड़ रुपया, एमएलसी इंडिया का 4,693.48 करोड़ रुपया, टीएचडीसी का 1,954.24 करोड़ रुपया, एनएचपीसी का 1,613.84 करोड़ रुपया, डीवीसी का 786.69 करोड़ रुपया बकाया है. ये सभी सरकारी कंपनियां हैं. निजी कंपनियों में अडानी का 3,201.68 करोड़ रुपया, बजाज समूह का 2,12.66 करोड़ रुपया, जीएमआर का 1,733.18 करोड़ रुपया बकाया है.

वितरण कंपनियों द्वारा समय पर बकाया नहीं चुकाने की वजह से उत्पादन कंपनियों को कर्ज चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियां कोयला आपूर्ति करने वाले वेंडरों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रही हैं. अगर यही स्थिति ज्यादा वक्त तक चलती रही, तो आने वाले दिनों में इस सेक्टर को भी मंदी का दौर का सामना करना पड़ेगा.

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