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बीसीसीएल के मगरमच्छ फंसे जाल में, अब चल रहा है प्लान टू पर काम

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Dhanbad: बीसीसीएल को बंद करने की साजिश चल रही है, यह प्रचार यहां तेजी से चल रहा है. इसका संबंध बीसीसीएल के सीएमडी एके सिंह को हटाने से जोड़ा जा रहा है. बीसीसीएल में चल रही ओवर रिपोर्टिंग, कोयले की आऊटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से हो रही बड़े पैमाने पर चोरी, ठेकेदारों के मार्फत फर्जी बिल बना कर जारी लूट, चंद ठेकेदारों और अफसरों के चंगुल में फंसी कंपनी पर कोयला मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की कड़ी नजर के बाद लूट में शामिल लोग प्लान नंबर टू पर काम कर रहे हैं. ऐसे लोग बीसीसीएल को बंद करने की बात प्रचारित कर रहे हैं. हालांकि, कंपनी की व्यवस्था इस कदर चरमरायी हुई है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय कुछ भी कठोर कदम उठाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.

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सवाल है यह नौबत आयी कैसे

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बीसीसीएल में आऊटसोर्सिंग कंपनी लगातार लक्ष्य से अधिक कोयला निकाल रही है. इसके बाद भी ताप विद्युत केंद्रों में कोयले की भारी कमी से स्वतः स्पष्ट होता है कि कोयले की बीसीसीएल में बड़े पैमाने पर हेराफेरी चल रही है. कंपनी में एक ठेकेदार और उनकी सहायक कंपनियों के कुछ अपवादों को छोड़ कर जिस तरह एकछत्र राज है उससे स्पष्ट है कि कंपनी में निहित स्वार्थियों का एकाधिकार है.

बदनाम ठेकेदार और इनकी कंपनियों को आयकर का क्लीन चिट मिलना बताता है कि ऐसे लोगों के हाथ बहुत ही लंबे हैं. रांची के प्रधान आयकर आयुक्त तापस कुमार दत्ता सहित कई पदाधिकारियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सीबीआइ कार्रवाई से स्पष्ट हुआ कि शेल कंपनियों के नाम पर आयकर विभाग ने बड़े पैमाने पर कालाधन को सफेद किया. धनबाद के बदनाम ठेकेदार ने ऐसे ही भ्रष्ट अफसरों के माध्यम से अरबों रुपय के कालाधन को सफेद कराया. सूत्र कहते हैं कि फर्जी बिलिंग और कोयले की चोरी से हुई गलत कमाई को सफेद किया गया. बीसीसीएल के कुछ बड़े और बदनाम ठेकेदारों की सूची बना कर उनके इनकम टैक्स के पुराने खाते फिर से खोले जाएं तो गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी.

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यह भी गड़बड़ी का सबूत

‌बीसीसीएल के सतर्कता अधिकारी रहे पीके सिन्हा के ठिकाने पर आयकर की छापेमारी में अकूत कालाधन मिला. यह बताता है कि बीसीसीएल में चल रही गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए बड़े पैमाने पर लेन देन हुआ. बीसीसीएल में हुए अरबों के घोटाले में सीएमडी स्तर के कई अधिकारियों पर कार्रवाई और मुकदमे यह सोचने को मजबूर करता है कि बीसीसीएल में जब ऊपर के स्तर पर ऐसी गड़बड़ी है तो नीचे क्या हो रहा होगा?

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‌हैरान करनेवाली है यूनियनों की चुप्पी

‌बीसीसीएल को बड़का चोर कंपनी लिमिटेड कह कर इसके अंदरखाने में व्याप्त गड़बड़ियों पर दशकों से राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं की सुर्खियां रंगती रही हैं. इसके बाद भी इस पर मजदूर यूनियनों की चुप्पी हैरान करनेवाली है. इसकी वजह है कि कुछ यूनियन के लोग सीधे तौर पर बीसीसीएल में व्याप्त घोटाले में लिप्त हैं तो कुछ घोटालों से सीधे या परोक्ष रूप से लाभ प्राप्त कर रहे हैं. क्रांति की बड़ी बड़ी बातें करनेवाले भी मालामाल हो रहे हैं. सभी एक ही थैली के चट्टेबट्टे की तरह हैं.

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‌क्या है प्लान टू

‌बीसीसीएल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सीएमडी एके सिंह को विशेष कार्रवाई के तहत ईसीएल में जीएम के उनके मूल पद पर वापस भेजने के बाद गोपाल सिंह ने प्रभारी सीएमडी का पदभार ग्रहण करते ही स्पष्ट कर दिया कि गड़बड़ी करनेवाले सभी लोगों पर कार्रवाई होगी. इसके बाद से कंपनी के कई निदेशक, जीएम, अन्य पदाधिकारी, कर्मी, ठेकेदार, सप्लायर आदि सकते में हैं. सूत्र बताते हैं कि बीसीसीएल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चल सकता है. ऐसे लोग औद्योगिक शांति भंग कर कंपनी के काम के माहौल को बिगाड़ना चाहते हैं.

इसके लिए तरह तरह के माध्यम का इस्तेमाल कर कुप्रचार किया जा रहा है. इसके तहत कुछ संगठनों को भी खड़ा किया जा रहा है. खुफिया विभाग ने बीसीसीएल में निकट भविष्य में अराजक माहौल और अशांति की आशंका व्यक्त की है. खबर तो यह भी है कि अराजक माहौल बनाने के लिए कयी स्रोत से फंडिंग की जा रही है.

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