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बीसीसीएल, सीआईएसएफ, सीबीआई, पुलिस, ट्रेड यूनियन नेता और कोयला अधिकारी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे

सीएमडी को हटाने के बाद मीडिया में छिड़ी बहस से बहुत सारी सच्चाई आ रही है सामने

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Dhanbad: कामरेड एके राय जब धनबाद से सांसद थे, तब बीसीसीएल में होनेवाली लूट की गूंज लगातार लोकसभा में होती थी. एके राय के जुझारू तेवर का ही परिणाम था कि सीआइएसएफ के तत्कालीन आईजी सी गोपालाचारी के नेतृत्व में बीसीसीएल में व्याप्त घोटाले की और इसे रोकने के इंतजाम को लेकर उच्चस्तरीय जांच करायी गयी.

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जांच में पाया गया कि बीसीसीएल में सारा घोटाला बीसीसीएल अधिकारी, पुलिस और नेताओं की मिलीभगत से हो रहा है. जांच के बाद बीसीसीएल में व्याप्त गड़बड़ियों को दूर करने के लिए कई सुझाव दिए गये. उनमें से कुछ सुझावों पर अमल भी किया गया पर बात वही हुई जब बाड़ खेत चरने लगे तो कोई क्या करे. मसलन, बीसीसीएल की कोलियरियों, लोडिंग प्वाइंट, रेलवे साइडिंग से माफिया का कब्जा हटाने के लिए पुलिस के थाने और सीआईएसएफ के पिकेट्स सैकड़ों की संख्या में बनाये गये. मगर हुआ उल्टा. पुलिस थाने, ओपी और सीआईएसएफ के पिकेट्स माफिया की रंगदारी टैक्स की वसूली के हिस्सेदार बन गये.

अधिकारी तक करते हैं वसूली !

बड़े अधिकारियों तक रंगदारी वसूली का पैसा जाने लगा. लालू प्रसाद यादव की सरकार में मोटी रकम देकर धनबाद आये पुलिस के एक अधिकारी ने अवैध कोयला खनन को कमाई का नया जरिया बनाया. इसमें संबंधित कोयला कंपनी के अधिकारियों, प्रशासन और सफेदपोशों की चुप्पी उनकी संलिप्तता और सहमति का स्पष्ट प्रमाण था. हद तो यह हुई कि एके राय के उदय के शुरूआती काल में जो कामरेड बीसीसीएल में व्याप्त चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते थे, वह बुलंदी से इसमें शामिल हो गये.

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नतीजा है कि मासस के कब्जेवाला निरसा करीब तीन दशक से कोयला चोरों का स्वर्ग बना हुआ है. हालांकि, मीडिया में बीसीसीएल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चल रही बहस में मासस के हरि प्रसाद पप्पू ने हालात के लिए ट्रेड यूनियन को भी दोषी माना है. पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता ओपी लाल का आरोप गंभीर है. उन्होंने कहा है कि बीसीसीएल से प्रतिदिन दस हजार टन कोयले की चोरी हो रही है. चोरी उसी हाइवा से होती है जो दिन में आऊटसोर्सिंग में चलता है.

क्या सचमुच मरा हुआ है धनबाद का राजनीतिक नेतृत्व

भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ नेता डा बीके सिंह कहते हैं कि धनबाद का राजनीतिक नेतृत्व मरा हुआ है. हालांकि यह सही नहीं है. कोलियरियों की रंगदारी वसूली में सक्रिय नेताओं की गतिविधियां इसे पूरी तरह खारिज करती है. धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह के रिश्तेदार पर भी रंगदारी वसूली के आरोप लगते रहे हैं.

हालांकि वसूली में अपने व्यक्तिगत सहयोग या सहमति से सांसद ने बार-बार इनकार किया है. ऐसे ही बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो पर कोयला में रंगदारी वसूली के आरोप लगते रहे हैं. उनकी करोड़ों की नामी, बेनामी संपत्ति की बात विरोधी करते हैं. बरवाअड्डा क्षेत्र में परिजन और निकट के लोगों के नाम से चलनेवाले दर्जनाधिक ईंट भट्ठों में रोज सैकड़ों टन चोरी का कोयला खपाने का आरोप क्षेत्र के सत्तारूढ़ दल के जन प्रतिनिधि पर विरोधी लगाते रहे हैं. वैसे कोयला चोरी और बीसीसीएल में गलत धंधे से कमाई या लाभ लेने से कोई भी दल वंचित नहीं है.

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गौर करने की बात है

एके राय के बाद धनबाद से कई लोग सांसद बने. इनमें से किसी ने भी बीसीसीएल में व्याप्त भ्रष्टचार को लेकर संसद में कभी आवाज उठाई ? ऐसा एक भी मामला लोगों के जेहन में नहीं है. कभी-कभार दूसरे क्षेत्र के सांसद बीसीसीएल की कारगुजारियां सामने लाते रहे है.

कोयला क्षेत्र में गड़बड़ी रोकने के तमाम उपाय विफल

-सीआइएसएफ की लंबी तगड़ी फौज पर हर महीने लाखों रुपये खर्च करने का बीसीसीएल को क्या फायदा मिल रहा है?
-कोयला क्षेत्र में स्थित थाने, ओपी सहित क्षेत्र में पदस्थापित डीएसपी, इंस्पेक्टर आदि को क्वार्टर, गाड़ी सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराने का क्या लाभ है? रंगदार बीसीसीएल के अधिकारियों के साथ भी मारपीट करते हैं या रौब जमाकर नाजायज धंधा करते हैं. हालांकि, रंगदारों और गलत धंधा करनेवालों से कोयला अफसरों का याराना है.

– कोयला कंपनी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही संयुक्त बिहार में सबसे पहले धनबाद में सीबीआई एसपी का कार्यालय खुला था. पर घूस लेते कुछ छोटे अधिकारियों, क्लर्क आदि के खिलाफ एफआईआर ही बीसीसीएल से भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर अधिक हुए. हालांकि छिटपुट बड़े अफसर, ठेकेदार और सप्लायर भी दबोचे गये.

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अब आगे क्या होगा

क्या बीसीसीएल भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण बंद हो जाएगी. इस सवाल का जवाब प्रभारी सीएमडी गोपाल सिंह ने दिया है कि ऐसा नहीं होगा. ऐसा न्यूज विंग ने भी कहा था. जबकि, ऐसा कुप्रचार निहित स्वार्थी तत्व कर रहे हैं. गोपाल सिंह ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा है कि कोयले का बड़ा भंडार बीसीसीएल के पास है. ओपेन कास्ट के ओबी को ठिकाने लगाने से भी कोयला खुदाई सरल होगी. यह जरूर है कि बीसीसीएल में व्याप्त गड़बड़ियों को दूर करने के बड़े पैमाने पर कदम उठाना समय की मांग है.

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