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नीलांचल वाटरशेड परियोजना में बीएयू तकनीकी पार्टनर के रूप में करेगा सहयोग

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Ranchi : मनरेगा आयुक्त सह मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, नीलांचल नेशनल वाटरशेड परियोजना सिद्धार्थ त्रिपाठी ने गुरुवार को बीएयू कुलपति डॉ परविंदर से भेंट कर राज्य में परियोजना के कार्यान्वयन में तकनीकी प्रबंधन एवं सहयोग मांगा. कुलपति ने परियोजना में मुख्य हितकारक तकनीकी पार्टनर के रूप में क्षमता निर्माण, कृषि उत्पादकता, आजीविका एवं फॉरवर्ड लिंकेज क्षेत्र में सहयोग देने पर सहमति जतायी है और विश्व बैंक संपोषित नीलांचल नेशनल वाटरशेड परियोजना के कार्यान्वयन हेतु बीएयू के साथ प्रोजेक्ट मोड में एमओयू के आधार पर वैज्ञानिक दल गठित कर तकनीकी मदद देने की बात कही है.

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218 करोड़ की लागतवाली है यह योजना

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वार्ता के बाद बीएयू प्रबंध परिषद् कक्ष में बीएयू कुलपति और कृषि वैज्ञानिकों के साथ वार्ता में सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया कि देश के कुल 9 राज्यों में विश्व बैंक संपोषित नीलांचल नेशनल वाटरशेड परियोजना के अधीन विभिन्न जिलों में बेकार पड़ी भूमि का सुधार कर कृषि कार्य हेतु उपयोगी करने का कार्य किया जा रहा है. झारखंड राज्य में भी इस परियोजना का कार्यावान्यन झारखंड स्टेट वाटरशेड मिशन के अधीन किया जा रहा है. इसके अधीन राज्य के रांची जिले के कांके, बुढ़मू व ओरमांझी तथा धनबाद जिले के टूडी, बाघमारा व गोविंदपुर प्रखंड के 5-5 हजार हेक्टेयर भूमि का सुधार कर टिकाऊ कृषि तकनीक को बढ़ावा दिया जाना है. कुल 218 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना में प्रत्येक जिले में 5-5 परियोजनाओं पर कार्य होगा. योजना कार्यान्वयन में बीएयू कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी सहयोग की जरूरत होगी. इस अवसर पर झारखंड स्टेट वाटरशेड मिशन के बीके प्रसाद ने परियोजना के अवयवों और कार्यकलापों की विस्तृत जानकारी दी.

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बैठक में योजना कार्यान्वयन हेतु त्वरित कारवाई करने, आगामी रबी मौसम से कार्यक्रम संचालित करने, साढ़े तीन साल की इस योजना में बेकार पड़ी भूमि के सुधार हेतु तकनीकी विकास, उपलब्ध डाटा से आगे की टिकाऊ कृषि की रणनीति तैयार करने पर बल दिया गया. बैठक में वैज्ञानिकों में डॉ एसके पाल, डॉ एमएस मल्लिक, डॉ आरआर उपासनी, डॉ एस कर्मकार, डॉ रमेश कुमार, डॉ रविंद्र प्रसाद, डॉ अरविंद कुमार, डॉ बीके झा, डॉ सेन गुप्ता, डॉ एचसी लाल, ई मिंटू जॉब और ई. उत्तम कुमार ने भाग लिया.

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