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कृषि विश्वविद्यालयों के स्वर्णजयंती अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन में बीएयू के कुलपति ने लिया भाग

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Ranchi : देश के 69 कृषि विश्वविद्यालयों के नियमित सदस्यों का भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ (आईएयूए) अपना स्वर्णजयंती वर्ष मना रहा है. इस मौके पर आईएयूए की ओर से 23 से 25 नवंबर तक नयी दिल्ली स्थित आईसीएआर नास कॉम्प्लेक्स में कृषि शिक्षा- ग्लोबल अनुभव की साझेदारी विषय पर अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम में बीएयू, रांची के कुलपति डॉ परविंदर कौशल भी भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम में कुलपति ने जनजातीय बहुल झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार उपलब्धियों को साझा किया. उन्होंने बताया कि संघ देश के ग्रामीण विकास में कृषि क्षेत्रों में शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार के अनुभवों को साझा कर आगे की सुधार नीति की अनुशंसा करती है. अधिवेशन में देश के 61 राज्य कृषि विश्वविद्यालय,  चार डीम्ड कृषि विश्वविद्यालय तथा चार केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं विदेश के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं. ग्लोबल स्तर पर कृषि क्षेत्र की समस्याओं और उसके समाधान पर विचार किया जा रहा है. अधिवेशन के अनुभवों एवं देश– विदेश के प्रख्यात कृषि शिक्षाविदों के सुझाव से बीएयू को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने को बल मिलेगा.

राज्य में तीसी खेती को बढ़ावा

तेलहनी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में कमी को देखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ परविंदर कौशल के मार्गदर्शन एवं निर्देश पर राज्य में तीसी (अलसी) की उन्नत वैज्ञानिक तकनीक से खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. विश्वविद्यालय द्वारा तीसी फसल पर अनुसंधान एवं उन्नत प्रभेद वाले बीज से वैज्ञानिक खेती पर बल दिया गया है. चालू रबी फसल मौसम में विश्वविद्यालय के आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान की तीसी (अलसी) परियोजना अधीन रांची, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम एवं साहेबगंज जिले में वैज्ञानिक तकनीकी प्रबंधन से तीसी (अलसी) की खेती में उन्नत किस्मों के हस्तक्षेप से उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि का प्रयास किया जा रहा है.  इसके अधीन तीसी (अलसी) की वर्षाश्रित खेती के लिए उपयुक्त मध्यप्रदेश की पीकेडीएल- 41  तथा बीएयू द्वारा विकसित दिव्या एवं प्रियम किस्मों की खेती बीज किसानों के बीच बांटा जायेगा. परियोजना के जनजातीय उपयोजना तथा अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण कार्यक्रम के अधीन सरायकेला-खरसावां जिला के 40,  पूर्वी सिंहभूम जिला के 10,  रांची जिला के 20  तथा साहेबगंज जिला के 60 जनजातीय किसानों के बीच कुल 130 एकड़ में प्रत्यक्षण के लिए करीब 15 क्विंटल पीकेडीएल- 41 , दिव्या एवं प्रियम किस्मों के बीज वितरित किये जायेंगे.

चार क्विंटल बीज का वितरण

शनिवार को तीसी परियोजना प्रभारी डॉ सोहन राम के नेतृत्व में डॉ परवेज आलम एवं डॉ एमके वर्णवाल के वैज्ञानिक दल ने सरायकेला-खरसावां के देवलटांड़ गांव में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के सहयोग से चलो गांव की ओर कार्यक्रम के अधीन जिले के 40 जनजातीय किसानों के बीच कुल चार क्विंटल बीज वितरित किया. मौके पर बीएयू वैज्ञानिकों के दल ने किसानों को तीसी खेती की उन्नत पैकेज प्रणाली तथा देसी किस्मों के स्थान पर उन्नत प्रभेदों की वैज्ञानिक तरीके से खेती से 30-40 प्रतिशत अधिक उपज प्राप्त करने के बारे में बताया. इस अवसर पर केवीके के वरीय वैज्ञानिक एके मिश्रा ने चलो गांव की ओर कार्यक्रम के अधीन रबी मौसम में चलायी जा रही प्रसार गतिविधियों के बारे में किसानों को बताया. यह जानकारी तीसी परियोजना प्रभारी डॉ सोहन राम ने दी.

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