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कार्तिक पूर्णिमा के दिन काले पानी में स्नान करेंगे श्रद्धालु

वार्ड 46 स्थित स्वर्णरेखा नदी के पास स्थित है इक्कसी महादेव मंदिर, हजारों श्रद्धालु करते हैं स्नान

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Ranchi: रांची में स्वर्णरेखा नदी के तट पर स्थित इक्कसवीं महादेव मंदिर में पिछले कई दशक से कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनायी जा रही है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां स्नान कर भगवान विष्णु व भगवान शिव की पूजा करने से कई दुःख नष्ट होते हैं. पूर्व में यहां स्वर्णरेखा नदी का पानी काफी स्वच्छ हुआ करता था, पर वर्तमान समय में स्वर्णरेखा नदी स्वयं अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. नदी नाला में तब्दील हो गयी है. नदी में कई फैक्ट्री, मील, सीवरेज, शहर की गंदी नालियों का पानी बहाया जा रहा है. जिसके कारण पानी काले रंग का प्रदूषित और जहरीला हो गया है. बताया जाता है कि जुडको (नगर विकास विभाग के अधीन काम करने वाली संस्था) ने स्वर्णरेखा नदी के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनायी है.

हालांकि यह जीर्णोद्धार का यह काम अबतक कागजों में सिमटकर रह गया है. वहीं इक्कसवीं महादेव मंदिर के पास स्वर्णरेखा और हरमू नदी का संगम केंद्र है. इस संगम केंद्र के बाद स्वर्णरेखा की पानी और भी अधिक गंदी हो जाती है. जबतक हरमू नदी के गंदे पानी, फैक्ट्री का जहरीला कैमिकल को स्वर्णरेखा में मिलने से नहीं रोका जायेगा तबतक स्वर्णरेखा जीर्णोद्धार का सपना संभव नहीं हो सकेगा. मालूम हो कि कार्तिक पूर्णिमा आऩे वाले शुक्रवार को है पर अभी से ही दूर दराज से मेला लगाने वाले लोग पहुंच चुके हैं. इस मेला में हजारों श्रद्धालु स्वर्णरेखा में स्नान, ध्यान करके भगवान शिव और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. इस मेले में नामकुम, चुटिया, डोरंडा, जगन्‍नाथपुर, नगड़ी, बेड़ो, रामपुर, बुंडू, तमाड़, खूंटी, सिल्ली, ओरमांझी, पुरुलिया आदि इलाकों से लोग स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

सफाई के मामले में नगर निगम सुस्त

जानकारी के मुताबिक चुटिया केतारी बगान का स्वर्णरेखा घाट नगर निगम क्षेत्र के अधीन है और अक्सर शहर की साफ-सफाई का दावा करने वाली नगर निगम अबतक सुस्त दिखाई पड़ रही है. नगर निगम ने अबतक न तो मंदिर के आसपास की सफाई करायी है ना ही टूटे-फूटे घाटों की मरम्मत और न ही पानी की सफाई के लिए कोई कदम उठाया है. इक्कसवीं महादेव मंदिर से लेकर केतारी बगान पुल तक कचरे का अंबार लगा हुआ है.

हरमू नदी को स्वर्णरेखा से जोड़ देने से हो रही परेशानी: रीता मुंडा

पूरे मामले पर वार्ड 46 की पार्षद रीता मुंडा का कहना है कि हाल में छठ पूजा के दौरान मंदिर के आसपास नदी की सफाई की गयी थी. वहीं कार्तिक पूर्णिमा को देखते हुए बुधवार को भी जेसीबी के द्वारा सफाई का कार्य किया गया है. हालांकि फिर भी नदी का जो पानी काला दिखता है, उसका कारण हरमू नाले को इस नदी से जोड़ देना है. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय सहित नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को भी जानकारी दी गयी है. इनके तरफ से यही बयान आता है कि हरमू नदी के जीर्णोद्धार का काम प्रगति पर है. जब हरमू नदी का यह काम पूरा कर लिया जाएगा, तो स्वर्णरेखा नदी की स्थिति अपने आप सुधर जाएगी.

योगनिद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु

हिंदु धर्म के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा का दिन एक तरह से देवताओं की दीपावली है. इस दिन भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागे थे. उस दिन प्रसन्न होकर समस्त देवी-देवताओं ने लक्ष्मी-नारायण की महा आरती करके दीप प्रज्ज्वलित किये थे. अतः इस दिन दीप दान व व्रत-पूजा आदि करके हम भी देवों की दीपावली में शामिल होते हैं, ताकि हम अपने भीतर देवत्व धारण कर सकें अर्थात सद्गुणों को अपने अंदर समाहित कर सकें, नर से नारायण बन सकें. देवों की दीपावली हमें आसुरी प्रवृत्तियों अर्थात दुर्गुणों को त्यागकर सद्गुणों को धारण करने के लिए प्रेरित करती हैं.

मिलती है भगवान विष्णु की मिलेगी कृपा

वही संतों के मुताबिक कार्तिक महीना भगवान कार्तिकेय द्वारा की गई साधना का माह माना जाता है. इसी कारण इसका नाम कार्तिक महीना पड़ा. नारद पुराण के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर संपूर्ण सद्गुणों की प्राप्ति एवं शत्रुओं पर विजय पाने के लिए कार्तिकेय जी के दर्शन करने का विधान है. पूर्णिमा को स्नान अर्घ्य, तर्पण, जप-तप, पूजन, कीर्तन एवं दान-पुण्य करने से स्वयं भगवान विष्णु पापों से मुक्त करके जीव को शुद्ध कर देते हैं.

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