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दो हजार गांवों में अब भी बिजली के लिये बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, दीन दयाल योजना के तहत होना है काम

Ranchi: ग्रामीण विद्युतिकरण में राज्य को अब तक पूर्ण सफलता नहीं मिली है. अब भी राज्य में अलग-अलग योजनाओं के तहत ऐसे गांव है, जहां विद्युतिकरण नहीं किया गया है. यहां ऐसे भी गांव है जहां टांसफाॅर्मर के लिये पोल तक नहीं है. अब भी राज्य में दो हजार गांव ऐसे है, जहां विद्युतिकरण के लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव तक नहीं रखी गयी है.

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इन गांवों में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतिकरण योजना के तहत काम किया जाना है. पूर्व सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतिकरण योजना पर विशेष बल दिया. जिसके तहत 17,430 गांवों में विद्युतिकरण का लक्ष्य रखा गया. राज्य में योजना की शुरूआत साल 2015 में की गयी. अब तक योजना के तहत 15,750 गांवों में बिजली का काम पूरा कर लिया गया है.

वहीं कुछ ऐसे भी जिला है जहां बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण बिजली आपूर्ति अभी भी बाधित है. राज्य में ग्रामीण विद्युतिकरण अलग-अलग योजनाओं के तहत किया जा रहा है. जिसमें सौभाग्य योजना भी महत्वपूर्ण योजना है.

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एजेंसियों के बदलने से रूका काम 

योजना के तहत सबसे अधिक काम पश्चिमी सिंहभूम में बाकी है. बगैर विद्युतिकरण के यहां गांवों की संख्या अधिक है. वहीं पाकुड़, साहेबगंज जैसे गांव भी है. साल 2019 में इस काम में लगे आइएलएफएस एजेंसी को जेबीवीएनएल ने टर्मिनेट कर दिया.

आइएलएफएस राष्ट्रीय एजेंसी थी. जो साल 2018-19 के दौरान वित्तिय घाटे में चलने लगी. एजेंसी राज्य में ग्रामीण विद्युतिकरण नहीं कर पा रही थी. जिसके बाद जनवरी 2019 में एजेंसी को टर्मिनेट किया गया.

जेबीवीएनएल ने फिर से टेंडर किया. पिछले आठ महीने से इन जिलों में अलग-अलग एजेंसियां काम कर रही है. ज्ञात हो कि इस एजेंसी की ओर से राज्य में सिर्फ 40 प्रतिशत काम ही किया गया था. अब अन्य एजेंसियों की ओर से काम किया जा रहा है.

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पश्चिमी सिहंभूम में सबसे अधिक काम बाकी

पश्चिमी सिंहभूम में सबसे अधिक गांवों में विद्युतिकरण बाकी है. इस योजना के तहत जिला में लगभग 500 गांवों में विद्युतिकरण किया जाना है. साहेबगंज में तीन सौ गांव, पाकुड़ में दो सौ गांव, पूर्वी सिंहभूम में तीन सौ गांव बाकी है. योजना के तहत सबसे अधिक इन्हीं गांवों में काम बाकी है.

जबकि रांची, खूंटी, दुमका, रामगढ़ में शत प्रतिशत काम पूर हो चुका है. इन सभी जिलों में अलग-अलग एजेंसी काम कर रही है. जिन गांवों में ग्रामीण विद्युतिकरण नहीं किया गया है, वहां वोल्टेज की समस्या है. टांसफाॅर्मर की कमी के कारण यह समस्या है. आधारभूत संरचना की कमी के कारण इन गांवों में सर्विस केबल के तहत बिजली दी गयी है. लेकिन बिजली की गुणवत्ता में कमी है.

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