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स्टैच्यू ऑफ उलगुलान भगवान बिरसा की प्रतिमा के लिए बेस तैयार

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  • पहाड़ को 15 फीट नीचे तक काटकर की गयी ढलाई

Ranchi : बुंडू के प्रधान नगर स्थित सूर्य मंदिर के बगल में पहाड़ पर बननेवाली धरती आबा बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा के लिए फाउंडेशन का काम आरंभ कर दिया गया है. बुधवार को नींव खुदाई के बाद ढलाई का काम शुरू हुआ. उलगुलान फाउंडेशन द्वारा इस मूर्ति का निर्माण किया जा रहा है. पहाड़ को 15 फीट नीचे तक काटकर इसका बेस तैयार किया गया है. ढलाई से पूर्व उक्त स्थल पर स्थानीय लोगों ने श्रद्धा के फूल चढ़ाये और भगवान बिरसा मुंडा की उपासना की. मौके पर झारखंड आंदोलनकारी आजसू के संस्थापक महासचिव रहे सूर्य सिंह बेसरा, फाउंडेशन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे संजय बसु मल्लिक और डॉ देवशरण भगत इस मौके पर विशेष तौर पर उपस्थित थे. मूर्ति निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही बिरसा मुंडा के समाधि स्थल से पवित्र मिट्टी ले जाकर पारंपरिक तौर पर पूजा-अर्चना की गयी. गौरतलब है कि नौ जून 2017 को उलगुलान फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो ने बुंडू में भगवान बिरसा मुंडा की विश्व में सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण का निर्णय लिया था. इसे लेकर बिरसा मुंडा के वंशजों के साथ पारंपरिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी किया गया. महतो ने बताया कि मूर्ति स्थापित करने के बीच कई कार्यक्रम किये जायेंगे. इस दौरान फाउंडेशन प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में बिरसा गोष्ठी का आयोजन भी करेगा.

स्टैच्यू ऑफ उलगुलान भगवान बिरसा की प्रतिमा के लिए बेस तैयार

हर घर से लिया जा रहा सहयोग

देवशरण भगत ने कहा कि मूर्ति निर्माण के लिए हर घर से सहयोग लिया जा रहा है. यह सहयोग तन-मन और धन का होगा. जिससे जो बन पड़ेगा, वह धरती आबा के लिए समर्पित करेगा. इसका उद्देश्य है कि लोगों की आस्था बिरसा मुंडा के प्रति बनी रहे. इस जनभागीदारी को भी देश-दुनिया जान सकेगी. भगत ने कहा कि आज भी कई आदिवासी संघर्ष और उनके नायक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में गुमनाम हैं. आजादी के बाद हमने बिरसा मुंडा की शहादत को तो याद रखा, लेकिन हम उनके विचारों से दूर होते गये. स्टैच्यू ऑफ उलगुलान भगवान बिरसा के जीवन मूल्यों को राष्ट्रीय पटल पर लाने की कोशिश है, जिससे उनकी अगुवाई में किया गया मुंडा विद्रोह सदा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाये. सबसे ऊंची मूर्ति के निर्माण को लेकर फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो ने बताया कि इसका मकसद बस यही है कि उलगुलान के महानायक को दुनिया जान सके. उन्होंने कहा कि बिरसा की यह प्रतिमा 150 फीट ऊंची, लेकिन उनका कद और वीर गाथा इससे लाखों गुणा ज्यादा ऊंचा होकर हमारे दिलों में समाया रहेगा.

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स्टैच्यू ऑफ उलगुलान भगवान बिरसा की प्रतिमा के लिए बेस तैयार

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