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BJP से निष्कासित बड़कुंवर गगरई ने जेपी नड्डा और पीएम को भेजा पत्र, कहा- प. सिंहभूम में वजूद के लिए तरसेगी पार्टी

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Jamshedpur: झारखंड भाजपा में निष्कासन विवाद तूल पकड़ता जा रहा है. इसमें नया नाम भाजपा के पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक बड़कुंवर गगराई का जुड़ गया है. गगरई का कहना है कि उनका निष्कासन पार्टी संविधान के विपरीत है. क्योंकि उन्होंने पार्टी को 17 नवंबर को ही इस्तीफा दे दिया था.

इसकी जानकारी देते हुए बड़कुंवर गगरई ने कहा की उन्होंने एक पत्र भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेजा है. इस पत्र में मंझगांव के पूर्व विधायक बड़कुंवर गगरई ने कहा है कि उनको अखबारों से यह जानकारी हुई कि उनको निष्कासित कर दिया गया है. इस निष्कासन की सूची में नाम होने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए बड़कुंवर गगराई ने कहा कि भाजपा से उन्होंने 17 नवंबर को ही इस्तीफा दे दिया था.

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इस्तीफा दिये जाने के बाद संविधान के विपरीत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने उनका निष्कासन कर दिया. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि उनको यह प्रतीत हो रहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा दुर्भावना से ग्रसित होकर कदम उठा रहे हैं.

पार्टी नंबर वन लेकिन काम दो नंबर- गगरई

पत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं समेत प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा को संविधान का पाठ पढाते हुए गगऱई ने आरोप लगाते हुए कहा कि भले ही भाजपा विश्व की नम्बर वन पार्टी हो लेकिन काम नंबर दो वाली करती है.

क्योंकि न तो प्रदेश अध्यक्ष ने कभी पार्टी का संविधान पढ़ा है और न ही वरिष्ठ नेताओं ने. बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी दल के नेता को कम से कम इतना तो पता होता है कि जब कोई सदस्य अपने पद या सदस्यता से इस्तीफा दे चुका हो तो उसकी सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाती है.

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‘लक्ष्मण गिलुवा ने बांट दिया भाजपा’

उन्होंने कहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हमेशा से पश्चिम सिंहभूम जिले के संगठन को दो धड़ों में बांटकर अपने चहेते छूटभइये नेताओं को आगे लाकर जिला संगठन को अस्त-व्यस्त करने में लग गए हैं. पश्चिम सिंहभूम में संगठन की क्या स्थिति है, यह किसी से छूपी नहीं है.

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पश्चिम सिंहभूम में पार्टी ने जिन दो प्रत्याशियों को टिकट दिया, उसका खामियाजा 23 दिसम्बर को भुगतना होगा. पूरे जिले में पार्टी के वजूद पर प्रश्नचिन्ह लग गया है.

किसी दूसरे दल में जाने से पहले भारतीय जनता पार्टी के संविधान की मर्यादा रखी और इस्तीफा दिया, परन्तु दुखद है कि पार्टी घमंड से चूर है और किसी वरिष्ठ सदस्य की सुध लेना तो दूर बातचीत तक करना उचित नहीं समझा गया.

नगर परिषद चुनाव के नतीजे को किया नजरअंदाज

गगरई ने दलील दी कि पार्टी ने चाईबासा नगर परिषद चुनाव के नतीजे को नजरअंदाज किया. उसी वक्त पार्टी के कई लोग बीजेपी छोड़कर चुनाव लड़े और पार्टी के प्रत्याशी को हरा दिया. उस वक्त स्वंय प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य समीर उरांव चाईबासा में चुनाव का मोर्चा संभाले हुए थे.

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