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बड़कागांव: NTPC के कोल ट्रांस्पोर्टिंग से प्रदूषण फैलाने के मामले में NGT ने बनायी 4 सदस्यीय कमेटी, याचिकाकर्ता भी सदस्य 

♦एनजीटी ने झारखंड सरकार, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, त्रिवेणी सैनिक माइनिंग, एनटीपीसी, डीसी हजारीबाग और वन एवं पर्यावरण विभाग को पार्टी बनाया है

Ranchi/Delhi: बड़कागांव स्थित एनटीपीसी एक बार फिर से सुर्खियों में है. एनटीपीसी द्वारा कोल ट्रांस्पोर्टिंग के नाम पर प्रदूषण फैलाने का मामला काफी पहले से उठ रहा है. मामला एनजीटी कोर्ट में भी है. जिसकी सुनवाई शुक्रवार को हुई. सुनवाई के दौरान एनटीपीसी ने एक अहम फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता सत्यप्रकाश ने बताया कि एनटीपीसी पकरी-बरवाडीह से माइनिंग कर कोयला रैक लोडिंग के लिए कटकमदाग स्थित रेलवे साइडिंग ले जाता है. ट्रांस्पोर्टेशन का काम डंपर से किया जाता है. ट्रांस्पोर्टिंग और कोयला डंप करने की वजह से करीब 150 एकड़ कृषि योग्य जमीन प्रदूषित हो गयी है. ऐसा करने से कृषि योग्य जमीन अब खेती के लायक नहीं रही. इसी मामले की जांच करने के लिए एनजीटी ने झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को चार सदस्यों की एक टीम बना कर मामले की जांच करने का फैसला सुनाया है. साथ ही पहली बार एनजीटी ने याचिकाकर्ता को भी कमेटी में बतौर सदस्य रखने का फैसला सुनाया. ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी मामले में याचिकाकर्ता को जांच कमेटी का सदस्य बनाया गया हो. एनजीटी ने झारखंड सरकार, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, त्रिवेणी सैनिक माइनिंग, एनटीपीसी, डीसी हजारीबाग और वन एवं पर्यावरण विभाग को इस मामले में पार्टी बनाया है

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शिवपुर-तोरी रेलवे लाइन की जमीन पर हो रहा कोल डंपिंग

अधिवक्ता सत्य प्रकाश ने बताया कि जिस जमीन का इस्तेमाल एनटीपीसी और माइनिंग करनेवाली कंपनी कोल ट्रांस्पोर्टिंग के लिए करती है, वो जमीन शिवपुर-तोरी रेलवे लाइन के लिए अधिग्रहित की गयी है. लेकिन रेलवे ने इस जमीन को एनटीपीसी को दे दिया. अब एनटीपीसी इस जमीन का इस्तेमाल कोयला डंपिंग और ट्रांस्पोर्टिंग के लिए करता है. जो गलत है. उन्होंने कहा कि इस बात को भी कोर्ट में काफी प्रमुखता से उठाया है. साथ ही कहा कि कोल ट्रांस्पोर्टिंग के दौरान एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक माइनिंग कंपनी कटकमदाग, बाणादाग, बांका, सुल्ताना, सहित अन्य गांव में कोयला ले जाती है. जिससे कृषि योग्य भूमि और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

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