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5700 करोड़ का बैंक फ्रॉड : चंद्रबाबू नायडू के करीबी सांसद की कंपनियों पर ईडी की छापामारी, मर्सिडीज बेंज, फरारी जब्त

सांसद को पूछताछ के लिए 27 नवंबर को तलब किया गया है. यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी है. 120 से अधिक कंपनियों को चलाने के पीछे सांसद का हाथ होने की बात कही गयी हैै.

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 NewDelhi : 5700 करोड़ रूपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तेलुगु देशम अध़्यक्ष और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू के करीबी सांसद वाइएस चौधरी की कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की है. इस क्रम में मर्सिडीज बेंज, फरारी, रेंज रोवर  सहित छह महंगी कारें जब्त की गयी हैं. खबरों के अनुसार सांसद को पूछताछ के लिए 27 नवंबर को तलब किया गया है. यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी है. 120 से अधिक कंपनियों को चलाने के पीछे सांसद का हाथ होने की बात कही गयी हैै. इसमें ज्यादातर कंपनियां कागज पर चल रही थीं. ये कंपनियां जांच एजेंसियों की नजर में तब आयीं जब तीन बैंकों ने बीसीईपीएल द्वारा 364 करोड़ रुपये के लोन नहीं चुकाने की शिकायत की और सीबीआई के बेंगलुरु ऑफिस में प्राथमिकियां दर्ज करा दीं.  इन बैंकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 133 करोड़ रुपये और आंध्रा बैंक ने 71 करोड़ रुपये को लोन डिफॉल्ट का, तो कॉर्पोरेशन बैंक ने 159 करोड़ रुपये के घाटे का मुकदमा दर्ज कराया. निदेशालय ने कहा कि उसने चेन्नई स्थित कंपनी मेसर्स बेस्ट एंड क्राम्प्टन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (बीसीईपीएल) के बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में सुजाना समूह में छापेमारी की. चेन्नई स्थित कंपनी के खिलाफ छापेमारी में सुजाना समूह से जुड़ी कथित मुखौटा कंपनियों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं.

एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई सुजाना ग्रुप के हैदराबाद और दिल्ली स्थित आठ परिसरों में शुक्रवार को छापेमारी के बाद धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की गयी. प्रवर्तन निदेशालय के छापों को लेकर सुजाना ग्रुप ऑफ कंपनीज ने कहा है कि हमनें उनके द्वारा मांगी गयी सभी जानकारियां साझा की हैं. कहा कि कारोबार कानूनी तरीके से हो रहा है और हम उन खबरों की निंदा करते हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ निदेशकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है.

नायडू के राजग छोड़ने से पूर्व चौधरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री थे

निदेशालय ने कहा कि तेलुगू देशम पार्टी के वर्तमान राज्यसभा सदस्य चौधरी सुजाना समूह की कंपनियों के पीछे हैं    इस बारे में साक्ष्य एकत्रित किये गये हैं कि सुजाना समूह की विभिन्न कंपनियों के सभी निदेशक उनके निर्देशन में कार्य करते हैं. जो महंगी कारें जब्त की गयी हैं वे छद्म कंपनियों के नाम से पंजीकृत हैं. बता दें कि सांसद को आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू का नजदीकी माना जाता है. नायडू द्वारा राजग छोड़ने से पूर्व चौधरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री थे. जब्त दस्तावेजों या रिकार्ड से इसकी पुष्टि हुई है कि बीसीईपीएल सुजाना समूह की अन्य कंपनियों के साथ वाईएस चौधरी की अध्यक्षता में कार्य कर रही थीं जो कि तेदेपा के वर्तमान राज्यसभा सदस्य हैं.  इन आरोपों को लेकर नसुजाना समूह के आठ परिसरों पर शुक्रवार को छापे मारे गये, जिससे खुलासा हुआ कि समूह की कंपनियों द्वारा बैंकों से 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गयी है.

 

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