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बनहर्दी कोल ब्लॉक: JUUNL ने जांच के लिए ACB को लिखा पत्र, GM HR ने दबाया-सचिव के हस्तक्षेप के बाद हुई कार्रवाई

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Chhaya

Ranchi: बनहर्दी कोल ब्लॉक में फर्जी कागजात और वित्तीय अनियमितता की खबरें न्यूज विंग में पहले भी प्रकाशित की गयी. कोल ब्लॉक में गड़बड़ियां भूतत्व खान विभाग और तत्कालीन राज्य बिजली बोर्ड की ओर से की गयी थी.

न्यूज विंग ने पहले ही बताया है कि 27 मार्च 2019 में ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से एसीबी को पत्र लिखा गया.

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इस पत्र में तत्कालीन बिजली बोर्ड के पांच अधिकारियों पर एफआइआर की अनुशंसा की गयी थी. इस अनुशंसा पत्र में इन पांच अधिकारियों की ओर से की गयी गड़बड़ी और फर्जी कागजात बनाये जाने की पूरा ब्योरा दिया गया था.

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ऊर्जा उत्पादन की ओर से लिखे गये पत्र में विभागीय सचिव की भी सहमति थी. जिसके बाद ऊर्जा उत्पादन निगम ने एसीबी को पत्र लिखा. लेकिन वो चिट्ठी एसीबी तब नहीं पहुंची.

पुख्ता सूत्रों का कहना है कि चिट्ठी को जीएम एचआर राजीव रंजन ने दबा दिया. लिहाजा मार्च 2019 को लिखी चिट्ठी एसीबी तक अगस्त में पहुंची. चिट्ठी मिलने के बाद दिसंबर 2019 में एसीबी की ओर से फिर से ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड के नाम पत्र लिखा गया है. पत्र में निगम से पूछा गया कि क्या इस मामले में निगम को सरकार की तरफ से स्वीकृति मिली है या नहीं.

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विभागीय सचिव के हस्तक्षेप के बाद एसीबी ने की पहल

ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से 27 मार्च 2019 में एसीबी को पत्र लिखी गया. लेकिन इसके बाद एसीबी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी. जून 2019 में विभागीय सचिव वंदना डाडेल की ओर से पत्र की जानकारी के संबंध में एसीबी को पत्र लिखा गया.

झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की ओर से एसीबी को लिखे गये पत्र की कॉपी

जिसमें एसीबी से पूछा गया कि पांच अधिकारियों से संबंधित एफआइआर की अनुशंसा एसीबी को मिली है या नहीं. पत्र मिलने के बाद एसीबी की टीम अगस्त 2019 में ऊर्जा विभाग के वरीय अधिकारियों से मिली.

जिसके बाद विभाग की ओर से पत्र एसीबी को मुहैया कराया गया. हालांकि इस मामले में एसीबी तत्कालीन राज्य बिजली बोर्ड और भूतत्व खान विभाग दोनों की संलिप्तता पायी गयी.

खुद बिजली बोर्ड की ओर से बनायी गयी कई कमेटियों में इस बात का जिक्र हुआ. साथ ही एजी की रिपोर्ट से भी इन बातों का खुलासा हुआ. बता दें ऊर्जा निगम की ओर से एसीबी को मार्च में भेजे गये पत्र से पूर्व ही विभागीय सचिव की सहमति ले ली गयी थी. इस मामले में एसीबी से भी जानकारी लेने की कोशिश की गयी. लेकिन जानकारी नहीं मिल पायी.

क्या है मामला

साल 2006 में केंद्र सरकार की ओर से पतरातु के उक्त क्षेत्र में पावर प्लांट लगाने का निर्देश दिया गया. जो तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से कराया गया. तत्कालीन सीएस की ओर से खान विभाग को ड्रिलिंग कराने का आदेश दिया गया.

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विभाग की ओर से इस आदेश के बाद अल्प निविदा पैनल का गठन किया गया. एजी की रिपोर्ट में इस पैनल को बनाने और निविदा के मूल्यांकन से लेकर अनुमोदन तक में सीवीसी नियमों का उल्लंघन किया गया.

12 अप्रैल 2013 को खान विभाग की ओर से विद्युत बोर्ड के सदस्य सुधांशु कुमार को एजेंसी मेसर्स साउथ वेस्ट पिनाकल को काम का प्रस्ताव दिया गया. सुधांशु कुमार की ओर से सीवीसी नियमों का उल्लंघन करते हुए एक करोड़ 43 लाख की जगह 14.27 करोड़ रूपये पर काम दे दिया गया.

बाद में बोर्ड की ओर से कंपनी को लगभग सात करोड़ की राशि काम चालू रखने के लिये दी गयी. जिससे आवंटन की कुल राशि 21.70 करेाड़ हो गयी. जबकि पैनल की ओर से इस कार्य के लिये एक करोड़ 43 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी थी.

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इतना ही नहीं इस स्वीकृति के लिये सुधांशु कुमार की ओर से बिजली बोर्ड के सदस्यों या किसी सक्षम प्राधिकार को बिना कोई जानकारी दिये खान विभाग को कंपनी का नाम प्रस्तावित कर दिया. इसी सहमति के बाद विभाग की ओर से कार्यादेश दिया गया.

फिलहाल झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की ओर से इस संबध में एसीबी में एफआइआर की अनुशंसा साल 2019 में की गयी है. ऊर्जा निगम लिमिटेड के अनुशंसा पत्र के अनुसार पांच बिजली बोर्ड के अधिकारियों पर एफआइआर की जानी है. इस मामले में कई स्तर पर अनियमितता की गयी.

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