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रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा की बिक्री पर रोक, जानें बाप-बेटे के बीच रंजिश की कहानी

83 साल के विजयपत सिंघानिया की बेटे गौतम सिंघानिया से चल रही है कानून लड़ाई

Mumbai : बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया की जीवनी ‘ऐन इनकंप्लीट लाइफ’ की बिक्री, प्रसार और वितरण पर फिलहाल रोक लगा दी है. अब अगले आदेश तक इस पुस्तक की छपाई और बिक्री नहीं हो पायेगी.

दरअसल 83 साल के विजयपत सिंघानिया की अपने बेटे गौतम सिंघानिया के साथ कानून लड़ाई चल रही है. ऐसे में किताब में लिखे गए तथ्यों को लेकर गौतम ने आपत्ति जताई है.

अप्रैल 2019 में, ठाणे अदालत ने लगायी थी रोक

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बता दें कि विजयपत सिंघानिया और गौतम अलग रहते हैं. इन दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं. ऐसे में सितंबर 2018 में रेमंड लिमिटेड और इसके प्रमुख गौतम सिंघानिया ने अपने पिता की किताब को लेकर ठाणे जिले की सत्र अदालत और मुंबई की एक दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर कहा था कि इस किताब में कई दावे अपमानजनक हैं. जिसके बाद अप्रैल 2019 में, ठाणे अदालत ने पुस्तक के विमोचन पर रोक लगा दी थी.

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वहीं बीते बृहस्पतिवार को कंपनी ने उच्च न्यायालय का रुख करते हुए दावा किया कि विजयपत सिंघानिया ने गुप्त तरीके से 232 पेज की इस पुस्तक को रिलीज कर दिया. इसपर न्यायामूर्ति एसपी तावड़े की अवकाश पीठ ने पुस्तक की बिक्री, प्रसार एवं वितरण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है.

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बाप-बेटे के बीच विवाद की वजह

विजयपत सिंघानिया का नाम देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार रहा है. कभी वो 12 हजार करोड़ की कंपनी रेमंड के मालिक थे. लेकिन बेटे के चलते आज वो पाई-पाई के लिए मोहताज हो चुके हैं. विजयपत का दावा है कि उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने उनसे घर और गाड़ी छीन ली जिसके चलते वे मुंबई में एक किराए के मकान में रह रहे हैं.

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सभी शेयर बेटे को देना पड़ा महंगा

बता दें कि 2015 में विजयपत सिंघानिया ने अपनी कंपनी के सभी शेयर अपने बेटे को दे दिए थे. उस दौरान शेयर की कीमत 1000 करोड़ रुपये थी.

सिंघानिया ने आरोप लगाया कि सीएमडी होने का गलत फायदा उठाते हुए गौतम ने सारी संपत्ति अपने नाम कर ली. इसके बाद विजयपत की आर्थिक हालत खराब हो गई और वो किराए के मकान में रहने पर मजबूर हो गए.

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