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मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज में दाखिले पर लगी रोक शीघ्र हटेगीः रघुवर दास

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  • नये मेडिकल कॉलेजों में दाखिले पर रोक हटाने की भी मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री से करेंगे मांग

Jamshedpur : जमशेदपुर के मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज में दाखिले पर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय की मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एएमई) द्वारा लगायी गयी रोक को खत्म करने की मांग पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने की है. रघुवर दास इसको लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक से बात की है.

जिसमें उन्हें आश्वासन दिया गया है कि एक सप्ताह में इसका समाधान हो जायेगा. मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज के शीर्ष प्रबंधन को मिलने के लिए कहा गया है. इसके अलावा रघुवर दास ने कहा कि राज्य के तीन नये कॉलेजों में नामांकन पर रोक को हटाने की मांग को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान प्राद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन से बात करेंगे.

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गलतफहमी में लगी रोक

रघुवर दास ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण ही मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए छात्रों का दाखिला नहीं हो सका. राज्य सरकार चाहती तो केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क कर इस कॉलेज के होल्ड को खत्म करा सकती थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्राइवेट पब्लिक मोड पर मेडिकल शिक्षा के लिए देश में जिन दो संस्थानों का चयन किया गया था, उनमें जमशेदपुर के मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज शामिल है. हालांकि तकनीकी कारणों से महाराष्ट्र स्थित पीपीपी मोड के मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने होल्ड कर दिया था. इसी गलतफहमी में जमशेदपुर के मणिपाल-टाटा मेडिकल कॉलेज के नामांकन पर भी रोक लग गयी है.

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राज्य सरकार ने दिखायी लापरवाही

रघुवर दास ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की कोशिशों एवं सक्रिय सहयोग के कारण आज पलामू, हजारीबाग और दुमका में मेडिकल कॉलेज भवन बन कर तैयार हैं. इन तीनों मेडिकल कॉलेजों में 100-100 सीटों पर दाखिले के लिए कुछ शर्त के साथ मेडिकल काउंसिल ने अनुमति प्रदान की थी.

वर्तमान राज्य सरकार की लापरवाही के कारण इन तीनों सरकारी कॉलेजों में दाखिले पर मेडिकल काउंसिंग ने रोक लगा दी है. वर्तमान राज्य सरकार केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से बात कर इस रोक को खत्म करवाने के लिए बात करती और नामांकन की प्रक्रिया शुरू करवाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उल्टे राज्य सरकार केंद्र सरकार पर आरोप लगा कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है. राज्य सरकार को चाहिए था कि जिन शर्तों के अनुपालन पर इन कॉलेजों में दाखिले की अनुमति दी गयी थी उनका पालन कराया जाता.

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