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बांस उत्पादों को मिलेगा बाजार, निर्यात और ऑनलाइन मार्केटिंग की तैयारी

Ranchi: झारखंड में बांस का उत्पादन बहुत है. झारखंड के किसान बांस के उत्पाद तैयार करने में अधिक रुचि लेने लगे हैं. पर उनके सामने सबसे अधिक चिंता थी कि उन्हें बाजार नहीं मिल पा रहा है. अब ऐसे उत्पादों को बाजार देने की तैयारी शुरू हो चुकी है.

18 सितंबर को अंतराष्ट्रीय बैम्बू दिवस मनाया जायेगा जिसमें प्लानिंग की घोषणा की जा सकती है. सबसे पहले इसके लिए एक बांस से उत्पाद बनाने वालों को ट्रेनिंग दी जायेगी. ट्रेनिंग में उन्हें यह बताया जायेगा कि कितने और तरह के उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं.

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साथ ही नये तरह के आइडिया के साथ काम करने को कहा जायेगा जिसके बाद प्रोडक्ट को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जायेगा. राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय बाजार में बांस के उत्पादों की मांग को देखने के बाद निर्यात करने की तैयारी में है. साथ ही उत्पादों को बेचने के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग भी करेगी.

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जैव डीजल, हरित इंधन तैयार करवाने की दिशा में भी होगा काम

बांस की रोपाई, इसके प्रसंस्करण जैसी बांस कारोबार से संबंधित गतिविधियों के संचालन पर भी ध्यान दिया जायेगा. भारत में हर साल 5,000 करोड़ रुपये की लगभग 2,30,000 टन अगरबत्ती की मांग है. लेकिन अपने यहां बांस की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद अगरबत्ती की मांग पूरा करने के लिए इसका अधिकतर भाग चीन और वियतनाम जैसे देशों से आयात कर रहा है.

बांस को कई उत्पादों में संसाधित किया जा सकता है, जिसमें जैव डीजल और हरित ईंधन, लकड़ी के पट्टे और प्लाईवुड शामिल हैं. इसलिए बांस से इन चीजों को तैयार करने की तैयारी है. इससे अर्थव्यवस्था के पूरे चेहरे को बदल सकते हैं. कई क्षेत्रों में रोजगार के नये अवसर पैदा कर सकते हैं.

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