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झारखंड की बालू कथा (7) : रक्षक ही भक्षक! धनबाद में 9 थानों की नजरों के सामने से दौड़ती हैं बालू लदी अवैध गाड़ियां

Ranchi: धनबाद में बराकर, जमुनिया और दामोदर नदी घाट किनारे से बालू लाया जाता है. बराकर नदी जो गिरिडीह के रास्ते बंगाल तक जाती है, वहां से बालू उठाव के अलावे दामोदर नदी घाट से बालू का अवैध उठाव करके शहर औऱ इसके ग्रामीण क्षेत्रों में खपाया जाता है.

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दिलचस्प यह है कि लगभग 10 थाना क्षेत्र के रास्तों से बालू लाकर जगह जगह डंप किया जाता है. पर अवैध कारोबारियों में पुलिस का डर नहीं दिखता. दरअसल रक्षक पर ही भक्षक बनने का आरोप है.

अवैध कारोबार को सख्ती से रोकने की बजाये सभी गंगा नहाने का जुगाड़ तलाशते हैं. ऐसे में बालू माफियाओं की चांदी दिखती है. सुबह सवेरे 2.30-3.00 बजे से बालू को जगह-जगह पर गिराये जाने का सिलसिला सुबह 10 बजे तक जारी रहता है. रात के अंधेरे से ही बालू का अवैध कारोबार शुरू हो जाता है.

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इन थानों से गुजरती हैं गाड़ियां

चाहे बराकर नदी हो, जमुनिया हो या दामोदर नदी घाट, सभी जगहों से गाड़ियां हरिहरपुर थाना क्षेत्र से होकर जरूर गुजरती हैं. बराकर नदी से दो रुट से बालू गाड़ी तोपचांची प्रखंड तक आती है. इनमें एक रुट औऱ थाना क्षेत्र डुमरी, निमियाघाट, तोपचांची के साथ साथ हरिहरपुर का है.

दूसरा पीरटांड़, खुखरा के अलावे तोपचांची और हरिहरपुर है. दामोदर नदी का एक रुट वह है जिसमें महुदा, बाघमारा, बरोरा थाना के अलावा हरिहरपुर भी है. यानि कुल 9 थाना के रास्तों से सैकड़ों ट्रैक्टर हर दिन अवैध तरीके से बालू का उठाव करके दौड़ती नजर आती हैं.

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30 हजार तक का लग जाता है चूना

जानकारी के मुताबिक, अवैध माइनिंग के फाइन के तौर पर 10,000 रुपये पकड़े गये गाड़ी वालों से वसूले जाते हैं. पर अगर गाड़ी पकड़ कर थानों तक ले आयी गयी तो 10,000 रुपया फ़ाईन के अलावा अलग से 15-20 हजार और लिया जाता है.

यानि तीस हजार तक जेब ढ़ीली करनी पड़ सकती है. भले ही उसकी कितनी भी उंची पैरवी क्यों न हो. इस झंझट से बचने को गाड़ी वाले हर थाने को 1500-2000 रुपये का नियत नजराना दे दिया करते हैं.

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समय-समय पर थाना वाले इसकी सूची अपडेट करते रहते हैं कि कितनी नयी गाड़ियां रोड पर बालू, गिट्टी लिये दौड़ने लगी हैं. कहां कहां उनका कारोबार चल रहा है.

इस पर ठोस रणनीति नहीं बनती कि जो भी गाड़ियां बालू का अवैध उठाव बिना वाजिब कागजात कर रहे हैं, उन्हें कैसे हतोत्साहित किया जाये. बल्कि आरोप लगता है कि अवैध गाड़ी वालों से वसूली करने में थानों के वाहन चालक या सिपाही अहम रोल अदा करते हैं.

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