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मिट्टी के हवाले हुईं बलमदीना एक्का, सरकार नहीं रख पायी परमवीर अल्बर्ट एक्का की मिट्टी की लाज

Ranchi: बलमदीना एक्का रुखसत हो गयीं. उनकी हसरत अधूरी रही. हसरत यह कि परमवीर अल्बर्ट एक्का की जन्मभूमि पर उनका स्मारक बने. सरकार परमवीर की पत्नी की इस छोटी सी ख्वाहिश की कद्र नहीं कर सकी.

परमवीर अल्बर्ट एक्का जिस सरजमीं पर शहीद हुए थे, वहां से मिट्टी तो बड़ी मशक्कत के बाद आ गयी थी, लेकिन उस मिट्टी का सम्मान न हो सका. मिट्टी लाने के नाम पर सियासत तो खूब हुई, लेकिन उसकी लाज न तो झारखंड की पिछली सरकार रख पायी, न यह सरकार.

पांच साल गुजर गये और अब तो बलमदीना एक्का भी गुजर गयीं, लेकिन एक अदद स्मारक नहीं बन सका. मुमकिन है कि जहां परमवीर की मिट्टी रखी गयी है, वहां बाद में कभी भव्य स्मारक बन भी जाये, लेकिन बलमदीना एक्का इसी कसक के साथ आज खुद मिट्टी बन गयीं.

Sanjeevani

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परमवीर अल्बर्ट और बलमदीना एक्का के बेटे विंसेंट एक्का का याद है जनवरी 2016 का वह दिन. अगरतल्ला के धुलकी गांव में अपने पिता की कब्र को निहारते हुए उनकी आंखें नम हो गयीं थीं. वे नि:शब्द थे.

1971 के भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में अद्वितीय शौर्य और बहादुरी दिखानेवाले उनके पिता लांस नायक अल्बर्ट एक्का शहादत के बाद इसी जगह पर दफनाये गये थे. विंसेंट सहित झारखंड के दस लोग उस जगह से मिट्टी लाने अगरतल्ला गये थे.

झारखंड सरकार ने उन सभी को अगरतल्ला भेजने में मदद की थी ताकि शहीद की कब्र की मिट्टी गुमला लायी जा सके. त्रिपुरा के तत्कालीन मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने भी अपना फर्ज निभाया. शहीद के पुत्र सहित सभी दस लोगों का सत्कार किया और मिट्टी को सम्मान के साथ झारखंड तक भेजने में मदद की.

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था स्मारक का शिलान्यास

कई दशक के बाद शहीद की मिट्टी गुमला के गांव जारी पहुंची. रांची से 160 किलोमीटर दूर गुमला जिले में पहाड़ों-जंगलों से घिरा है जारी गांव. झारखंड सरकार ने घोषणा की थी कि शहीद अल्बर्ट एक्का का स्मारक बनवाया जायेगा.

तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 3 दिसंबर को 2015 को शहीद के गांव जारी में स्मारक का किया था शिलान्यास. इसके बाद सरकार स्मारक बनाने के अपने वादे को भूल गयी.

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जनसहयोग से बना है छोटा सा चबूतरा

सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने जनसहयोग से लांस नायक अल्बर्ट एक्का का स्मारक बनाने की पहल की. लोगों से इसके लिए एक ईंट और पांच रुपये का सहयोग मांगा.

3 दिसंबर 2018 को अपने स्तर पर स्मारक बनाने के लिए आधारशिला रखी गयी. एक छोटा चबूतरा भी बनाया गया, लेकिन इसे स्मारक बनाने का सरकार का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ.

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