Khas-KhabarRanchi

बकोरिया कांड: पुलिस अधिकारियों के बयान का मिलान करेगी CBI

Ranchi: पलामू के बकोरिया में 8 जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ कांड की सीबीआइ जांच में तेजी आते ही, कांड से जुड़े कई अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच के लिए सीबीआइ टीम के द्वारा कथित मुठभेड़ के समय पुलिस अधिकारियों के द्वारा दिए बयान और वर्तमान में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा पूछताछ के दौरान दिए बयान का मिलान करेगी. बताया जा रहा है कि घटना के समय अधिकारियों के द्वारा दिए बयान से संबंधित वीडियो क्लिप और पेपर कटिंग को खोजने में सीबीआइ की टीम जुटी हुई है.

इसे भी पढ़ेंःचास SDM IAS शशि प्रकाश ने आखिर क्यों कहा- इसे दूर ले जाकर इतनी जोर से मारो कि आवाज मुझ तक आये, देखें वीडियो

ram janam hospital
Catalyst IAS

पलामू में सीबीआइ की टीम कर रही है कैंप

The Royal’s
Sanjeevani
Pitambara
Pushpanjali

मामले की जांच के लिए सीबीआइ की 10 सदस्यीय टीम 18 फरवरी को ही पलामू पहुंच चुकी है और दो हिस्सों में बंटकर टीम अगले 10 दिनों तक पलामू में कैंप करेगी और मुठभेड़ की सच्चाई का पता लगायेगी.

सीबीआइ की टीम ने पलामू सर्किट हाउस में अपना कार्यालय बना रखा है. सीबीआइ अफसरों की एक टीम मुठभेड़ में मारे गए 12 लोगों के परिजनों का बयान लेगी,वहीं दूसरी टीम मुठभेड़ में शामिल रहे पुलिस अफसरों के बयान दर्ज करेगी.

मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों और उनके साथ अभियान में शामिल सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. अबतक 250 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. जिसमें अधिकारियों के चालक तक शामिल हैं.

एएसपी स्तर के अफसर कर रहे केस की मॉनिटरिंग

सीबीआइ टीम का नेतृत्व एएसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं. गौरतलब है कि बकोरिया मुठभेड़ की प्राथमिकी दर्ज करने वाले दारोगा मोहम्मद रुस्तम ने अपना बयान बदल दिया है. मोहम्मद रुस्तम अब सीबीआइ के सरकारी गवाह बन चुके हैं.

बकोरिया मुठभेड़ से जुड़े दारोगा हरीश पाठक और गुलाम रब्बानी पहले से ही अलग-अलग राग अपना रहे हैं. इस मामले में पूछताछ के दौरान मो. रुस्तम के ड्राइवर ने अलग-अलग बयान दिया है.

इसे भी पढ़ेंः#RSS चीफ मोहन भागवत ने रांची में कहा, राष्ट्र या राष्ट्रीय शब्द कहें, राष्ट्रवाद में है नाजी हिटलर की झलक

पुलिस की जांच को गलत ठहराने के लिए कई सबूत

जांच के दौरान इस कांड से जुड़े पुलिस अफसरों से सीबीआइ पूछताछ भी कर रही थी. सीबीआइ और एफएसएल टीम को नाट्य रूपांतरण के दौरान ही कई ऐसे सबूत मिले थे, जो पुलिस जांच को गलत ठहरा रहे थे.

पुलिस ने अपनी जांच में बताया है कि एक स्कॉर्पियो से 12 नक्सली आ रहे थे. जो पुलिस को देखते ही गोलियां चलाने लगे. एफएसएल विंग के सदस्यों ने पाया कि स्कॉर्पियो में 12 लोगों के बैठने के बाद बंदूक से पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करना संभव नहीं हैं.

गाड़ी के अंदर किसी भी सीट पर बंदूक जैसे बड़े हथियार का मूवमेंट संभव नहीं है. 12 लोगों के बैठने के बाद स्कॉर्पियो में हाथ-पैर हिलाने में भी परेशानी होगी, ऐसे में अंधाधुंध फायरिंग की बात कहीं से सही प्रतीत नहीं होती. बकोरिया कांड में मारे गये सभी 12 लोगों को गोली कमर के ऊपर लगी थी.

जवाबी कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गये थेः पुलिस

बकोरिया मुठभेड़ को लेकर पुलिस का कहना है कि 8 जून 2015 की देर रात पुलिस सतबरवा के बकोरिया गांव के पास सर्च अभियान चला रही थी. इस दौरान पुलिस पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गये थे. पुलिस ने जानकारी दी थी कि करीब तीन घंटे तक मुठभेड़ चली और घटनास्थल से पुलिस ने एक वाहन, 8 राइफल, 250 कारतूस आदि जब्त किये थे.

झारखंड HC के आदेश के बाद CBI ने दर्ज की थी प्राथमिकी

पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र बकोरिया में आठ जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीबीआइ दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज की थी. यह प्राथमिकी झारखंड हाई कोर्ट के 22 अक्टूबर 2018 को दिए आदेश पर दर्ज की गयी थी. इस घटना में पुलिस ने 12 लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.

इसे भी पढ़ेंःझारखंड के विकास में बाधक लेवी के कारण होती रही हैं हत्याएं और आगजनी की घटनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button