JharkhandKhas-KhabarRanchi

बकोरिया कांड: CBI की टीम पहुंची पलामू, मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों से हो रही है पूछताछ

Palamu : पलामू के बकोरिया में हुई चर्चित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ कांड की सीबीआइ ने जांच तेज कर दी है. सीबीआइ के एसपी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम इन दिनों पलामू में कैंप कर रही है.

और मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों और उनके साथ अभियान में शामिल सभी शख्स से पूछताछ की जा रही है. अबतक 250 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. जिसमें अधिकारियों के चालक तक शामिल हैं.

इसे भी पढ़ें – संकट में पीएम का यूथ को स्किल्ड करने का सपनाः राज्य के 50 फीसदी ITI में ट्रेनर ही नहीं

Catalyst IAS
ram janam hospital

दो टीमों में बंटकर कर हो रही जांच

The Royal’s
Pitambara
Sanjeevani
Pushpanjali

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, पलामू में उनके 10 पदाधिकारी दो टीमों में बंटकर जांच कर रहे हैं. हर बिन्दु पर जांच तेज की गयी है. जांच लंबी चलने की संभावना है. मुठभेड़ में शामिल सभी अधिकारियों के साथ-साथ कर्मियों से पूछताछ की जा रही है. जिले में फिलहाल टीम दस दिनों तक रूकेगी और घटना के हर पहलु की पड़ताल करेगी. इसके लिए परिसदन को कैंप कार्यालय बनाया गया है.

झारखंड पुलिस के कई बड़े अफसराें की भी बढ़ेगी परेशानी

बहुचर्चित बकाेरिया कांड में एफआइआर दर्ज कराने वाले तत्कालीन सब इंस्पेक्टर माेहम्मद रुस्तम काे सीबीआइ ने सरकारी गवाह बना लिया है. अब सीबीआइ काे उम्मीद है कि बकाेरिया कांड का सच जल्द ही सामने आ जाएगा.

वहीं झारखंड पुलिस के कई बड़े अफसराें की परेशानी भी बढ़ेगी. क्याेंकि सीबीआइ की पूछताछ में माे. रुस्तम अपने बयान से पलट गये थे. मो रुस्तम ने अपने बयान में सतबरवा ओपी के तत्कालीन थानेदार दारोगा हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया था. साथ ही कहा था कि उसे सीनियर अफसरों ने लिखी हुई प्राथमिकी दी थी, जिस पर उसने सिर्फ हस्ताक्षर किया था.

उल्लेखनीय है कि घटना के बाद पुलिस अफसरों ने उस वक्त के थानेदार हरीश पाठक पर प्राथमिकी दर्ज करने का दबाव बनाया था. हरीश पाठक द्वारा फर्जी मुठभेड़ की प्राथमिकी दर्ज करने से इंकार करने पर सीनियर अफसरों ने इंस्पेक्टर मो. रुस्तम से प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

इसे भी पढ़ें- #China में उइगर मुस्लिम उत्पीड़न के शिकारः नमाज पढ़ने-दाढ़ी रखने के कारण कैद

पुलिस के खिलाफ CBI के पास कई साक्ष्य

जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुई कथित पुलिस और नक्सली मुठभेड़ की जांच सीबीआइ के द्वारा तेज कर दी गयी है. बकोरिया कांड की जांच कर रही सीबीआइ जल्द ही सच सामने लाने वाली है.

सीबीआइ और सेंट्रल फॉरेंसिक लैब को जांच के क्रम में कई साक्ष्य ऐसे मिले हैं जो पुलिस जांच को गलत ठहराते हैं. बीते वर्ष 3 जुलाई 2019 को सीबीआइ के बड़े अधिकारी और सेंट्रल फोरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन पलामू पहुंचे थे और सीबीआइ की टीम ने घटना का डेमो किया था. इस दौरान बहुत हद तक सीबीआइ को इस कांड के अनुसंधान में सफलता हाथ लगी थी.

पुलिस की जांच को गलत ठहराने के लिए कई सबूत

जांच के दौरान इस कांड से जुड़े पुलिस अफसरों से सीबीआइ पूछताछ भी कर रही थी. सीबीआइ और एफएसएल टीम को नाट्य रूपांतरण के दौरान ही कई ऐसे सबूत मिले थे जो पुलिस जांच को गलत ठहरा रही थी.

पुलिस ने अपनी जांच में बताया है कि एक स्कार्पिओ गाड़ी से 12 नक्सली आ रहे थे. जो पुलिस को देखते ही गोलियां चलाने लगे. एफएसएल विंग के सदस्याें ने पाया कि स्कार्पिओ में 12 लोगाें के बैठने के बाद बंदूक से पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करना संभव नहीं हैं.

स्कार्पिओ के अंदर किसी भी सीट पर बंदूक जैसे बड़े हथियार का मूवमेंट संभव नहीं है. 12 लोगों के बैठने के बाद स्कार्पिओ गाड़ी में हाथ-पैर हिलाने में भी परेशानी होगी, ऐसे में अंधाधुंध फायरिंग की बात कहीं से सही प्रतीत नहीं होती. बकोरिया कांड में मारे गये सभी 12 लोगों को गोली कमर के ऊपर लगी थी.

इसे भी पढ़ें- भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, ब्रिटेन-फ्रांस को पीछे छोड़ा: रिपोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने दर्ज की थी प्राथमिकी

पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र बकोरिया में आठ जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के मामले में सीबीआइ दिल्ली ने प्राथमिकी दर्ज की थी.

यह प्राथमिकी झारखंड हाई कोर्ट के 22 अक्टूबर 2018 को दिए आदेश पर दर्ज की गयी थी. इस घटना में पुलिस ने 12 लोगों को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.

मृतकों के परिजनों ने की थी सीबीआइ जांच की मांग

मृतकों के परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाइकोर्ट में राज्य की जांच एजेंसी सीआइडी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ जांच की मांग की थी.

सीबीआइ ने पलामू के सदर थाना कांड संख्या 349/2015, दिनांक 09 जून 2015 के केस को टेकओवर करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी. इस केस के शिकायतकर्ता तत्कालीन सतबरवा ओपी प्रभारी मोहम्मद रुस्तम हैं.

उन्होंने लातेहार के मनिका थाना क्षेत्र के उदय यादव, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के निमाकातू निवासी एजाज अहमद, चतरा के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मझिगांव निवासी योगेश यादव व नौ अज्ञात मृतक और एक अज्ञात नक्सली के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. हाइकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि वादी सहित पुलिस के अधिकारी हरीश पाठक ने भी पूरी जांच पर सवाल खड़े किये थे.

मुठभेड़ का हुआ था डेमो 

जुलाई 2019 में सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब के निदेशक एनबी वर्धन पंहुचे थे. उस दौरान पूरी मुठभेड़ का डेमो कराया गया था, लेकिन जांच के दौरान बारिश ने डेमो में खलल डाला था.

इसे भी पढ़ें- मीडिया के सामने खुलकर बोले प्रशांत किशोर, हमें पिछलग्गू नहीं बल्कि एक सशक्त नेता चाहिए

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button