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बकोरिया कांड : सीबीआई जांच रुकवाने का प्रयास कर रहे लोगों को  चिन्हित करने को लेकर पीआईएल ,जांच की मांग

Ranchi : पलामू के बकोरिया में 8 जून 2015 को हुई कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस मैनेज कर रहे लोगों को चिन्हित करने और उनके खिलाफ जांच की मांग को लेकर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में अधिवक्ता राजीव कुमार के द्वारा पीआईएल दायर की गयी है.

केस मैनेज करने में कथित तौर पर लगे लोगों की भूमिका की सीबीआई से जांच की मांग की गयी है.याचिकाकर्ता के मुताबिक बिना सरकार की सहमति के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के द्वारा एसएलपी दायर की गयी. इस मामले में सीबीआई, झारखंड सरकार के गृह सचिव और विधि सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है

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क्या है मामला

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मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पलामू में हुए बकोरिया कांड की सीबीआई जांच रुकवाने के लिए पुलिस अफसरों ने कारोबारियों से 19 करोड़ रुपए की उगाही की थी. इतनी बड़ी रकम से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं समेत केस से जुड़े वरिष्ठ अफसरों को मैनेज करना था. जांच एजेंसी के एक विंग ने इसका खुलासा किया है. इस विंग के अनुसार रकम की उगाही विभिन्न जिलों के कोयला व्यवसायियों, ट्रांसपोर्टर्स, बिल्डर, होटल कारोबारी समेत एसपी रैंक के पुलिस अधिकारियों से की गयी.इसके लिए संबंधित जिलों के पुलिस अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी.

जांच के दौरान उगाही और उसमें संलिप्त पुलिस अधिकारियों की जानकारी विंग को कॉल सर्विलांस से मिली है. जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि उगाही की गयी रकम दिल्ली भेजवाने में रांची रेंज में पदस्थापित एक वरीय पुलिस अफसर की सक्रिय भागीदारी रही है. कहा गया कि झारखंड हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के भाई सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं,जिन्होंने पूरे मामले को मैनेज करने के लिए जिम्मेवारी ली थी.

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सीआईडी जांच पर संदेह के बाद हाईकोर्ट ने दिया था सीबीआई जांच का आदेश

बकोरिया गांव में 8 जून 2015 को तथाकथित मुठभेड़ हुई थी. 22 अक्तूबर 2019 को हाईकोर्ट ने बकोरिया मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने सीआईडी अनुसंधान के कई बिंदुओं पर संदेह जताया था. इसके बाद 19 नवंबर को सीबीआई दिल्ली के स्पेशल सेल ने इस मामले में केस दर्ज किया था.

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