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बकोरिया कांड और निरसा विधायक को धमकी मामले में सदन में हंगामा, रणधीर सिंह को फटकार

Ranchi: विधानसभा में शून्य काल में किसी मुद्दे को लेकर हंगामा होते कम ही देखा गया है. झारखंड विधानसभा में गुरुवार को यह नजारा भी देखना को मिला. राजधनवार विधायक राजकुमार यादव ने शून्य काल में अपने क्षेत्र की समस्याओं का सिर्फ जिक्र ही नहीं किया बल्कि राज्य में लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठाया. शून्य काल में जब उनकी बोलने की बारी आयी तो उन्होंने कहा कि जिस तरीके से राज्य के चर्चित बकोरिया कांड में पीड़ितों को केस वापस लेने की धमकी मिल रही है. उन लोगों को अपनी सुरक्षा की गुहार राज्यपाल से लगाना पड़ रहा है और जिस तरीके से सदन में कोयला माफिया के खिलाफ बोलने पर निरसा विधायक अरूप चटर्जी के घर में घुसकर घरवालों को बम से उड़ा देने की धमकी मिलती है. उससे साफ तौर पर राज्य के लॉ एंड ऑर्डर को सवाल उठते हैं. साथ ही कहा कि जब एक विधायक ही इस राज्य में सुरक्षित नहीं है, तो आखिर कौन इस राज्य में सुरक्षित है. इतना कहते ही सदन में विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया.

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सुरक्षा मामले पर हेमंत का मिला साथ

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सदन में विधायक अरूप चटर्जी को धमकी मिलने के मामले में हंगामा जैसे शुरू हुआ, प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन अपनी जगह पर खड़े हो गए. उनके साथ जेएमएम विधायक कुणाल षाड़ंगी और दूसरे जेएमएम के विधायक भी खड़े हो गए. कुणाल षाड़ंगी ने हाथ जोड़कर अध्यक्ष को कहा कि हुजूर जब हम ही सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य में कौन सुरक्षित है. मामले को लेकर विधायक भानू प्रताप सिंह, बादल पत्रलेख और शिवपूजन कुशवाहा भी हंगामा करने लगे. यही हाल ध्यानाकर्षण के दौरान भी हुआ. अध्यक्ष दिनेश उरांव बार-बार विधायकों को शांत हो जाने और अपनी जगह पर बैठने को कहते रहे. लेकिन विधायक इस बात पर अड़े थे कि संसदीय कार्य मंत्री इस मामले पर खड़े हो कर 24 घंटे के अंदर धमकी देने वालों की गिरफ्तारी करने का आश्वासन दें. लेकिन अध्यक्ष दिनेश उरांव ने ऐसा करने से मना कर दिया. काफी हो-हंगामे के बाद एक बार फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हुई.

सिल्ली विधायक सीमा देवी के सवाल का सीएम ने दिया जवाब

सिल्ली विधायक सीमा देवी ने सदन में तारांकित प्रश्नकाल के दौरान सवाल किया कि यूनिवर्सिटी पॉलिटेकनिक बीआईटी मेसरा में छात्रवृति आधी क्यों कर दी गयी है. उन्होंने अपने सवाल में कहा कि यूनिवर्सिटी पॉलिटेकनिक बीआईटी मेसरा में एसटी, एससी और ओबीसी बच्चों को स्टाइफन के तौर पर सालाना पहले पचास हजार रुपए मिलते थे. लेकिन नियमावली बनाने के नाम पर अब उसे घटाकर 25000 कर दिया गया है. आखिर ऐसे क्यों. इस पर सरकार की तरफ से मंत्री लुईस मरांडी ने जवाब दिया कि नए नियमावली के तहत अब छात्रवृति दी जा रही है. मंत्री महोदया के इस जवाब  पर सदन में हंगामा होने लगा. प्रदीप यादव ने कहा कि क्या नियमावली छात्रों की छात्रवृति घटाने के लिए बनी है. उनका साथ सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर भी करते दिखे. सभी ने मिलकर सरकार से इसपर विचार करने को कहा. हंगामा होता देख सीएम खुद जवाब देने के लिए खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा इस बात का ध्यान रखती है कि शैक्षणिक क्षेत्र में हर तरह की सुविधा मिले. इसी को ध्यान में रखकर नियमावली भी तैयार की गयी है. निश्चित तौर पर सरकार इस मामले पर विचार करेगी. सीएम के ऐसा कहने के बाद सदन का हंगामा थमा.

और जब कृषि मंत्री को अध्यक्ष की लगी फटकार…

ध्यानाकर्षण के दौरान एक तरफ जहां सदन की कार्यवाही चल रही थी. वहीं दूसरी तरफ सदन में बैठे राज्य के कृषि मंत्री रणधीर सिंह अखबार का मजा ले रहे थे. खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय किसी विधायक के सवालों का जवाब दे रहे थे. तभी अध्यक्ष दिनेश उरांव ने सरयू राय को बैठ जाने को कहा. उसके बाद अध्यक्ष ने रणधीर सिंह को कहा कि सदन की कार्यवाही चल रही है और आप अखबार पढ़ रहे हैं. ये सदन है कोई वाचनालय नहीं. अखबार पढ़ना है तो वहां जाइए जहां अखबार पढ़ने की जगह है. विधानसभा में उसके लिए भी काफी बड़ा जगह बनवाया गया है. इतना सुनकर उस वक्त तो मंत्री महोदय ने चुप्पी साध ली. लेकिन बाद में सदन में जब किसी बात पर हंगामा हो रहा था. उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि एक दो मामले में ही सारा समय निकल जाता है. हमारा बोलने का नंबर तो आता ही नहीं है. रातभर जागकर सदन में अपनी बात रखने की तैयारी करते हैं. लेकिन कोई फायदा नहीं होता है. सीनियर विधायकों की सेटिंग से सवाल पहले आ जाता है. हमलोग बैठे रह जाते हैं. ऐसे में अखाबर नहीं पढ़े तो और क्या करें.

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