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आतंकियों के साथ गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह को जमानत, समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी NIA

New Delhi:  जम्मू कश्मीर पुलिस का डीएसपी देविंदर सिंह. नाम तो याद ही होगा. 13 जनवरी को श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे पर एक कार से उसे गिरफ्तार किया गया था. आतंकी संगठन हिजबुल के कमांडर सईद नवीद, रफी हैदर व इरफान मीर के साथ. दिल्ली की अदालत ने डीएसपी देविंदर सिंह को जमानत दे दी है. क्यों ? क्योंकि एनआइए ने निर्धारित समय सीमा के भीतर डीएसपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं की. हालांकि अदालत ने डीएसपी को अभी एनआइए की हिरासत में ही रहने का भी आदेश दिया है.

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एनआइए गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है. देश के गृह मंत्री अमित शाह हैं. एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह बार-बार यह कहते हैं कि आतंकी संगठनों को नहीं छोड़ेंगे. आतंकियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्श जायेगा. पर, उनके नियंत्रण वाली एजेंसी ही आतंकियों से मिल कर देश के खिलाफ साजिश रचने वाले डीएसपी के खिलाफ समय पर चार्जशीट नहीं दाखिल करती और अदालत उसे जमानत दे देती है. पर, कहीं कोई सवाल नहीं उठता.

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देविंदर सिंह पर कई संगीन आरोप

जानकारी के मुताबिक, डीएसपी देविंदर सिंह को 13 जनवरी को कुलगाम जिले में श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे पर एक कार से गिरफ्तार किया गया था. जिस वक्त उसे गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त वह आतंकी संगठन हिजबुल कमांडर सईद नवीद, एक दूसरे आतंकी रफी रैदर और हिजबुल के एक भूमिगत कार्यकर्ता इरफान मीर को लेकर जम्मू जा रहा था. तब खबर आयी थी कि डीएसपी देवेंद्र सिंह का काम चंडीगढ़ और दिल्ली में इन आतंकियों के लिए ठहरने की व्यवस्था करना था. पुलिस ने कार से हथियार भी बरामद किया था.

गौर करने की बात है कि डीएसपी देविंदर सिंह ने गिरफ्तारी के वक्त वहां मौजूद सीनियर अधिकारी से कहा था आप गलती कर रहे हैं. इस काम में बड़े-बड़े लोग शामिल हैं.

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डीएसपी देविंदर सिंह के बारे में एक तथ्य यह भी है कि उसी ने आतंकी अफजल गुरु को दिल्ली तक पहुंचाया था. आतंकी अफजल गुरु को संसद भवन पर हुए आतंकी हमले में गिरफ्तार किया गया था. जिसके खिलाफ कोर्ट में केस चला. कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनायी थी. जिसके बाद उसे फांसी दे दी गई. अफजल गुरु ने जिंदा रहते हुए अपने वकील को एक पत्र लिखा था. जिसमें उसने कहा था कि जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह ने ही उसे दिल्ली में भेजने का प्रबंध किया था. संसद हमला कांड में भी जांच एजेंसी ने अफजल गुरु के उस पत्र में उल्लेखित तथ्यों की जांच करना जरुरी नहीं समझा था. यही कारण है कि उस घटना में डीएसपी देविंदर सिंह ना सिर्फ बच निकला, बल्कि उसके बाद वह लगातार संवेदनशील स्थानों पर पोस्टिंग भी पाता रहा.

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