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बाघमाराः टूट सकता है ढुल्लू का तिलिस्म, जलेश्वर ठोंक रहे ताल

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Nitesh ojha 

Ranchi: जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बाघमारा विधानसभा क्षेत्र का समीकरण बदलने लगा है. सिर्फ बाघमारा ही नहीं जलेश्वर के कांग्रेस में शामिल होने से गिरिडीह और धनबाद लोकसभा सीटों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. जानकार बताते हैं कि जलेश्वर महतो की महतो वोट बैंक पर अच्छी पकड़ है. इस कारण बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. साथ ही धनबाद औऱ गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में महतो वोट बैंक के छिटकने से भाजपा को परेशानी हो सकती है.

पिछले दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस में जलेश्वर ने यह हुंकार भी भरी थी कि यदि वे पूरे राज्य में कांग्रेस और महागठबंधन को मजबूत करेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि सीएम के संऱक्षण पाने से आज इलाके में कानून का राज खत्म हो गया है, वरना ढुल्लू महतो को तो वे 2 मिनट में साफ कर देंगे. जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में ढुल्लू महतो कई विवादों में उलझ गये हैं. कोयला लोडिंग के रेट को लेकर ढुल्लू और स्थानीय व्यवसायी आमने सामने हैं. इसका असर भी उस इलाके में पड़ रहा है.

महतो बहुल क्षेत्र है गिरिडीह-धनबाद लोस क्षेत्र

गिरीडीह, धनबाद, बोकारो जैसे इलाकों में महतो वोट प्रबल है. मोदी लहर में भी गिरीडीह सांसद रविंद्र पांडेय को जेएमएम प्रत्याशी जगन्नाथ महतो कड़ी टक्कर दी थी. वहीं बाघमारा से जलेश्वर महतो दो बार (2000 से 2009 तक जदयू पार्टी से) विधायक रह चुके हैं. गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में पड़नेवाले डुमरी, गोमिया, बेरमो, टुंडी) में महतो जाति के ही लोग वर्तमान में विधायक हैं. यूं तो बाघमारा में भी महतो वोट अधिक है, पर वर्तमान बाघमारा विधायक इस जाति से संबंध नहीं रखते हैं. ऐसे में बाघमारा के टाइगर कहे जानेवाले ढुल्लू को अपनी विधायकी बचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है. साथ ही गिरीडीह लोकसभा सीट में अपने प्रभाव को बचाये रखना भी मुश्किल होगा.

विवादों में रहे हैं ढूल्लू, भाजपा सांसद से भी बढ़ी हैं दूरियां

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में शामिल हुए जलेश्वर महतो ही केवल महतो वोटों से ढुल्लू को नुकसान पहुंचा सकते हैं. हाल के रवैये से स्वयं ढूल्लू ने भी धनबाद, गिरिडीह इलाकों में भाजपा को नुकसान पहुंचाने का प्लॉट तैयार किया हुआ है. बाघमारा विधायक समर्थकों के रंगदारी मांगने से धनबाद हार्ड कोक इलाके के उद्यमी नाराज हैं. बढ़ती रंगदारी राशि के खिलाफ इन उद्यमियों ने बाघमारा से कोलियरियों से कोयला उठाव नहीं करने का निर्णय लिया था. इसी तरह असंगठित मजदूर भी ढुल्लू से काफी परेशान रहे हैं. मजदूरों का कहना है कि ढुल्लू महतो लोडिंग प्वाइंट पर अपना वर्चस्व कायम करना चाहते हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि गिरिडीह सांसद रविंद्र पांडे से उनका विवाद भी खुल कर सामने आ चुका है.

महागठबंधन बनने से वोट बैंक होगा प्रभावित 

गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र में वर्तमान में 6 विधानसभा गिरिडीह,  डुमरी,  गोमिया,  टुंडी,  बेरमो और बाघमारा आते हैं. आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की तुलना में साझा महागठबंधन प्रत्याशी को ज्यादा वोट मिल सकते हैं. भाजपा के रविंद्र पांडेय को जहां 3,91,913 वोट मिले थे. तो जेएमएम उम्मीदवार जगरनाथ महतो को 3,51,600, झाविमो उम्मीदवार सबा अहमद को 57,380 और जदयू के जलेश्वर महतो को 40,010 वोट मिले थे. इस लिहाज से महागठबंधन प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी से करीब 60000 वोट अधिक ही मिले थे.

क्या कहते हैं आकड़े

वहीं 2014 चुनाव में विधानसभा में पड़े वोटों के आंकड़ों को देखें तो उपरोक्त 6 सीटों में से गिरिडीह, डुमरी, गोमियो और टुंडी पर जेएमएम और कांग्रेस का बेरमो और बाघमारा (जलेश्वर महतो के शामिल होने के बाद) में दावा मजबूत है. इस तरह सभी विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन का प्रभाव मजबूत दिखता हैः

  • गिरिडीह – निर्भय कुमार शाहाबादी (भाजपा) को  57450 और सुदिव्य कुमार (जेएमएम) को 47517 वोट. हार का अतंर था 9933 वोटों का.
  • डूमरी – जगरनाथ महतो (जेएमएम) को 77984 और लालचन्द महतो(भाजपा) को 45503 वोट. हार का अंतर था 32481 वोटों का.
  • गोमिया – योगेन्द्र प्रसाद (जेएमएम) को 97799 और माधव लाल सिंह (भाजपा) को 60285 वोट. अंतर रहा 37514 वोटों का.
  • बेरमो – योगेश्वर महतो (भाजपा) को 80489 और राजेन्द्र प्रसाद सिंह (कांग्रेस) को 67876. अंतर रहा 12613 वोटों का.
  • टुन्डी – राज किशोर महतो (आजसू) को 55466 और मथुरा प्रसाद (जेएमएम) को 54340. अंतर रहा 1126 वोटों का.
  • बाघमारा – ढुल्लू महतो (भाजपा) को 86603 और जलेश्वर महतो (कांग्रेस) को मिले 56980. अंतर रहा 29623 वोटों का.

गिरिडीह सहित कई अन्य इलाके होंगे प्रभावित : जलेश्वर महतो 

कांग्रेस में शामिल होने के बाद भाजपा और बाघमारा विधायक को हो रहे नुकसान पर जलेश्वर महतो ने न्यूज विंग से कहा कि भाजपा की जो नीतियां रही हैं, उसे हराने के लिए ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा है. ऐसा नहीं है कि उनका प्रभाव केवल गिरिडीह तक ही है. बल्कि धनबाद, पलामू, हजारीबाग, जमशेदपुर, बोकारो, रांची, संथाल जैसे इलाकों में भी उऩका असर है. गिरिडीह या बाघमारा सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि पार्टी जो निर्णय लेगी, उनका वे निवर्हन करेंगे. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि इलाके में उनके स्थिति को लेकर शीर्ष नेताओं को जनता, कार्यकर्ताओं से राय लेनी चाहिए.

महतो राजनीति नहीं करते, महागठबंधन की जीत तय : जगरनाथ महतो 

वहीं डुमरी से जेएमएम सांसद जगरनाथ महतो ने बताया कि वे महतो वोट बैंक की राजनीति न कर विकास की राजनीति करते हैं. जलेश्वर महतो के कांग्रेस में शामिल होने पर भाजपा पर पड़नेवाले प्रभाव पर कहा कि पिछले चुनाव में वे महागठबंधन से बाहर थे. इस बार वे कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. महागठबंधन को फायदा होना तय है.

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