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‘शौचालय’ से आ रही लाखों के घोटाले की बदबू

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Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के राज्य को ओडीएफ घोषित करने के सपने पर लगता है कि ग्रहण लग गया है. दरअसल स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत रांची शहर के हर वार्ड में रांची नगर निगम को कई शौचालय बनाने थे. इसके तहत विभिन्न वार्डों में निगम ने जितने भी शौचालय बनाये हैं, उसमें एक बड़े घोटाले के संकेत मिल रहे हैं. घोटाले का संकेत मिला है हटिया इलाके के वार्ड नंबर 52 (परिसीमन पूर्व वार्ड 55) स्थित गनियोर टोली से. इस बस्ती में 300 के करीब झोपड़ियां हैं. यहां एसबीएम के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की राशि हर लाभुक को दी जानी थी. इस हिसाब से केवल इसी बस्ती में करीब 36 लाख रुपये की लागत से शौचालय निर्माण किया जाना था. लेकिन, वर्तमान स्थिति यह है कि यहां पर मुश्किल से कुछ ही घरों में शौचालय निर्माण किया गया है. स्थानीय पार्षद (वार्ड 52) निरंजन कुमार का कहना है कि केवल चार-पांच लाभुकों को ही रांची नगर निगम द्वारा पैसा दिया गया, वह भी कुछ को आधा पैसा मिला, कुछ को कुछ भी नहीं मिला. निगम के ठेकेदारों ने बस्ती में जितने भी शौचालय बनाये, वे आधे-अधूरे ही बने. यहां तक कि पार्षद द्वारा जानकारी देने के बाद डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने भी इलाके का दौरा कर मामले की जांच करने की बात कही थी. लेकिन, आज भी बस्ती के लाभुक इसी आस में बैठे हैं कि कभी तो निगम के आला अधिकारी उनके दर्द का निवारण करेंगे.

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लाभुकों की सूची में था नाम, फिर भी नहीं मिली राशि, नहीं बन पाया शौचालय

शौचालय निर्माण में हो रही इस अनियमितता की न्यूज विंग संवाददाता ने पड़ताल की. इसमें गनियोर टोली के कई लाभुकों ने बताया कि कैसे निगम के अधिकारी-सुपरवाइजर उन्हें आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने का काम कर रहे हैं. इन्हीं लाभुकों में से एक मालती देवी ने न्यूज विंग को बताया कि शौचालय निर्माण वाली लिस्ट में उनका नाम था, लेकिन ठेकेदारों ने शौचालय निर्माण सामग्री को उनके आवास से दूर रेल की पटरी के पास गिराकर उनसे कहा कि सामग्री ढोकर खुद लायें, तभी शौचालय निर्माण कार्य पूरा किया जायेगा. लाभुक के ऐसा नहीं करने पर ठेकेदारों ने शौचालय निर्माण नहीं करने की घमकी भी दी थी. बाद में जब 12 हजार रुपये की राशि निगम ने नहीं दी, तो उन्होंने खुद ही शौचालय निर्माण का काम शुरू कर दिया. हालांकि, आर्थिक तंगी होने के कारण शौचालय निर्माण का कार्य पूरा नहीं किया जा सका.

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ठेकेदार ने अधूरा छोड़ दिया शौचालय निर्माण का काम, राशि भी नहीं मिली

बस्ती की ही लाभुक चैती देवी की बेटी ने कहा कि सरकारी ठेकेदार ने शौचालय निर्माण कार्य शुरू तो कर दिया, लेकिन काम अधूरा ही किया. अब परिवार की महिलाओं को शौच के लिए बस्ती में स्थित सामुदायिक भवन में ही जाना पड़ता है. पड़ताल के दौरान लाभुक डहरु स्वांसी के घर पर बनाये शौचालय पर कोई दरवाजा ही नहीं देखने को मिला. पूछने पर उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने न दरवाजा लगाया, न ही उन्होंने शौचालय निर्माण की राशि दी.

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शौचालय नहीं बनने की वजह से बाहर बगीचे में शौच करने को हैं मजबूर

इसी बस्ती के लाभुक गंगा राम के परिजन ने बताया कि शौचालय निर्माण पूरा नहीं होने पर आज भी शौच के लिए बाहर बगीचा में जाना पड़ता है. ओडीएफ की जानकारी होने के बाद राशि नहीं मिलने की बात पर उऩका कहना था कि उन्हें इसके लिए जानकारी नहीं दी गयी थी. इसी तरह शौचालय निर्माण नहीं होने से परेशानी झेल रहे लाभुकों की संख्या कहीं अधिक है, जिनमें घनश्याम लोहरा, मनोज यादव आदि कई लाभुक शामिल हैं.

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हमारे वार्ड को देहात नहीं समझे निगम : पार्षद

वार्ड 52 के पार्षद निरंजन कुमार ने न्यूज विंग को बताया कि बस्ती में शौचालय निर्माण योजना की स्थिति बद से बदतर है. बस्ती में 300 घरों में शौचालय निर्माण किया जाना था, लेकिन चार-पांच को छोड़ अभी तक किसी घर में शौचालय निर्माण नहीं हुआ है. इसे लेकर डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय को दो माह पहले ही इलाके का उन्होंने दौरा करवाया था, लेकिन अभी तक लाभुकों को इसका लाभ नहीं मिला है. निगम को सोचना चाहिए कि उनका वार्ड देहात नहीं है. निगम की सारी सुविधाएं इस बस्ती को भी मिलनी चाहिए.

जांच कर घोटाले की सच्चाई सामने लानी चाहिए : मेयर

पूरे मामले की जानकारी मेयर आशा लकड़ा और निगम के सबंधित अधिकारियों से ली गयी. शौचालय निर्माण नहीं होने के सवाल पर जहां मेयर ने कहा कि अगर लाभुक को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ी है, तो उन्हें उनके पास आना चाहिए. जहां तक घोटाले की बात है, तो इसपर जांच कर सच्चाई को सामने लाना चाहिए.

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सिर्फ 12 से 15 घरों में ही शौचालय निर्माण किया जाना था : सुपरवाइजर

वहीं, पुराने वार्ड 55 का काम देखनेवाले निगम के अधिकारी ने तत्काल ही हटिया इलाके के सुपरवाइजर से इसकी जानकारी ली. इस पर उसने बताया कि इस बस्ती में केवल 12 से 15 घरों में ही शौचालय निर्माण किया जाना था. वहीं, पार्षद निरंजन के दिये बयान पर उन्होंने कहा कि अगर पार्षद ऐसा कह कर रहे हैं, तो उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है. निगम की तरफ से कई लाभुकों के खाते में एडवांस राशि के रूप में छह हजार रुपये दिये गये थे. ऐसे में यह देखना होगा कि क्या लाभुकों ने इस राशि को खर्च ही नहीं किया या उन्हें इस राशि की जानकारी ही नहीं दी गयी थी.

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दो-तीन दिनों में जांच कर मामले का पोस्टमॉर्टम करेंगे : डिप्टी मेयर

इस मामले पर न्यूज विंग ने डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय से बात की. उन्होंने पहले तो इस बस्ती का नाम सुने जाने से ही इनकार किया. जब उन्हें बताया गया कि दो माह पहले उन्होंने इस बस्ती का दौरा किया था, तब उन्होंने बस्ती का नाम सुने जाने की बात स्वीकार की. उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े निगम के सिटी मैनेजर को उन्होंने रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया था. स्थानीय पार्षद ने भी दो दिनों पहले फोन पर उन्हें इसकी जानकारी दी थी. अब जब यह बात मीडिया में आ गयी है, तो अगले दो से तीन दिनों में पूरे मामले का पोस्टमॉर्टम कर बुधवार तक इस पर वह रिपोर्ट बतायेंगे.

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