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खराब नेटवर्क से हैं परेशान, नंबर नहीं नेटवर्क प्रोवाइडर बदलिये

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PREM KUMAR 

आजकल नेटवर्क की समस्या आम है. बहुत कम नेटवर्क प्रोवाइडर ऐसे हैं, जो सही नेटवर्क प्रोवाइड कर पाते हैं. ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहक बनाने के चक्कर में नेटवर्क कंपनियां कम क्षमता वाले टावर्ज़ पर ज़्यादा मोबाइल कनेक्शन का लोड दे देती हैं. इससे नेटवर्क सर्विस ख़राब हो जाती है. इंटरनेट का स्लो चलना, दूसरे नेटवर्क मोबाइल पर कॉल नहीं लगना, कॉल ड्रॉप हो जाना, कॉल का जम्प करना, मोबाइल में नेटवर्क सिग्नल कम या ग़ायब रहना- ये सब ख़राब नेटवर्क की पहचान हैं. अगर आप भी ऐसी परेशानी को झेल रहे हैं, तो आप भी आज ही अपने नेटवर्क प्रोवाईडर से बात कीजिए. अपनी समस्या बताइये, समस्या का हल न हो पाए तो तुरंत अपने नेटवर्क प्रवाइडर को बदल डालिये.

क्या करना होगा 

नेटवर्क प्रोवाइडर बदलना बहुत ही आसान है. सिर्फ़ आपको एक मेसज करना है. इसके लिए PORT स्पेस और फिर मोबाइल नंबर लिखकर 1900 पर SMS कीजिये. इसके बाद आपके मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज के साथ UPC-Unique Port Code नंबर आयेगा. इसकी वैलिडीटी 15 दिन होती है. इसे आपको अपने नये  नेटवर्क प्रोवाईडर को भेजना है. वो आपकी KYC की औपरचारिकता पूरी करने के बाद आपको एक नया SIM Card  इश्यू करेगा. इसका भी कन्फर्मेशन आपको मैसेज से मिल जायेगा. इसके बाद लगभग 15 दिनो के अंदर आपका पुराना SIM जब बंद हो जायेगा, फिर आप नये SIM कार्ड को इन्सर्ट कर लें. पुराने SIM के बंद होते ही नया SIM तुरन्त चालू हो जाता है. अगर आठ दिनों तक पुराना SIM बन्द न हो, तो अपने नये नेटवर्क प्रोवाइडर से सम्पर्क करें. अगर पुराना SIM बंद होकर भी नया SIM चालू न हो तो भी अपने नये नेटवर्क प्रोवाइडर से बात करें.

मोबाइल पोर्टेबिलिटी के लाभ

  • पहले हम एक ही सर्किल में मोबाइल को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पोर्ट कर सकते थे. मतलब UP के नंबर को उसी क्षेत्र में बदला जा सकता था.
  • पोस्टपेड को प्री पेड में भी पोर्ट किया जा सकता हैं.
  • MNP के कारण उपभोक्ता को शहर बदलने पर अपना नंबर नहीं बदलना होगा. वे आजीवन एक ही नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

मोबाइल पोर्टेबिलिटी के संबंध में अन्य जरूरी बातें

  • एक बार UPC-Unique Port Code प्राप्त होने के बाद समय रहते अगर इसका इस्तेमाल न किया जाए तो यह रद्द कर दिये जाते हैं.
  • अगर उपभोक्ता का पेंडिंग बिल है और नंबर पोर्ट हो चूका हैं, तब बिल भरने के लिए उपभोक्ता को तीन महीने का समय दिया जायेगा. अन्यथा नंबर बंद कर देने का प्रावधान है.
  • किसी भी कंपनी का नंबर पोर्ट करने के बाद आपको कम से कम तीन महीने उसी कंपनी से जुड़ा रहना अनिवार्य हैं.
  • मोबाइल पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया के दौरान कंपनी द्वारा लगभग दो घंटे के लिए नंबर बंद किया जाता हैं.
  • पोर्ट होने के बाद कुछ समय तक नयी कंपनी का नाम नंबर के साथ नहीं आता है. जैसे ही आप रिचार्ज करते हैं, आपका नेटवर्क और सर्किल डिस्पले होने लगता है. मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के कारण कई बार हमें खुद यह केटेगरी भरनी पड़ती है. क्योंकि वह पिछली कंपनी का नाम और नेटवर्क ही दिखाता रहता है.

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