न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बकोरिया कांडः जब मुठभेड़ फर्जी नहीं थी, तो सीबीआई जांच से क्यों डर रही है सरकार !

झारखंड सरकार बकोरिया कांड की सीबीआई जांच के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.

879

Surjit singh

झारखंड सरकार बकोरिया कांड की सीबीआई जांच के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. 27 अक्टूबर को अखबारों में इससे संबंधित खबर है. एक सूचना यह भी है कि इसे लेकर झारखंड पुलिस के तीन अफसरों ने शुक्रवार को हाई कोर्ट जाकर महाधिवक्ता से भी भेंट की. महाधिवक्ता ने अभी कोई राय नहीं दी है. क्योंकि अब तक की सुनवाई के दौरान झारखंड पुलिस के अफसरों ने महाधिवक्ता को इस मामले से अलग ही रखा था. महाधिवक्ता ने फाइल देख कर अपनी राय देने की बात अफसरों से कही है. हाई कोर्ट ने चार दिन पहले मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था. हाई कोर्ट ने यह पाया है कि झारखंड पुलिस की सीआइडी ने मामले की जांच सही तरीके से नहीं की. जिस तरह से जांच की गयी है, उससे झारखंड सरकार की जांच एजेंसी पर से आम लोगों का विश्वास डिगा है. अब सरकार हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि जब बकोरिया मुठभेड़ सही है, मुठभेड़ फर्जी नहीं है, तो फिर झारखंड पुलिस के अफसर और सरकार को सीबीआई जांच से क्यों ऐतराज है. अगर सीआइडी ने मुठभेड़ में सब कुछ सही पाया है और जांच सही तरीके से ही हुई है, तो फिर सीबीआई जांच में भी तो सच ही सामने आयेगा.

  इसे भी पढ़ें-बकोरिया कांडः डीजीपी के कारण गृहमंत्री की हैसियत से मुख्यमंत्री रघुवर दास भी आ सकते हैं जांच के…

hosp3

इस मामले में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जाना आत्मघाती कदम हो सकता है.

पुलिस के कुछ अफसर यह तर्क दे रहे हैं कि बकोरिया में कथित फर्जी मुठभेड़ में कई एजेंसियां आईबी, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस इंवॉल्व है. ऐसे में अगर मामले की सीबीआई जांच होगी, तो मीडिया ट्रायल होगा और सभी एजेंसियों की प्रतिष्ठा धूमिल होगी. वहीं कुछ पुलिस अफसर यह भी तर्क दे रहे हैं कि अगर मुठभेड़ और एक नक्सली समेत 12 लोगों की मौत के मामले में कुछ गलत नहीं हुआ है कि सीबीआई भी जांच के बाद यही बात कहेगी. तब इस मामले में अब तक लगे आरोप बेबुनियाद साबित होंगे. और झारखंड सरकार, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और आईबी की प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी ही होगी. लेकिन कानून के जानकार यह मानते हैं कि इस मामले में सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जाना आत्मघाती कदम भी हो सकता है. इस मामले में अफसरों की गलती से पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास तक लपेटे में आ चुके हैं. हाई कोर्ट का आदेश बहुत ही स्पष्ट है और तथ्यों पर आधारित है. हाई कोर्ट ने कोई सजा नहीं सुनायी है. सिर्फ जांच का ही आदेश दिया है. ऐसे में कहीं सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, तो मुख्यमंत्री और झारखंड पुलिस के अफसरों के मंसूबे पर पानी तो फिरेगा ही और ज्यादा फजीहत होगी.

इसे भी पढ़ेंःबकोरिया कांड : न्यूज विंग ने न्याय के लिए चलाया था अभियान, पढ़िये सभी खबरें एक साथ

सुप्रीम कोर्ट में सरकार को राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है

इस बीच पुलिस के ही कुछ सीनियर अफसरों का कहना है कि असल में सभी यह जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार को राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है. लेकिन इस मामले में फंसे कुछ अफसर इस मामले को और टालना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई में कम से कम तीन-चार माह का वक्त जरूर लगेगा. तब तक वह सुरक्षित रहेंगे. सरकार उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करेंगी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस मामले की जांच में लापरवाही करने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने को लेकर राज्य के डीजीपी डीके पांडेय, एडीजी सीआइडी अजय कुमार सिंह, सीआइडी के आइजी अरुण कुमार सिंह, सीआइडी के एसपी सुनील भाष्कर समेत तीन-चार अन्य आइपीएस परेशानी में आ सकते हैं. करीब एक साल तक जांच को दबाये रखने का आरोप तत्कालीन प्रभारी एडीजी सीआइडी अजय भटनागर (अभी सीबीआई में पदस्थापित हैं) पर भी लग रहे हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: