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बीएयू के कृषि वैज्ञानिकों ने डिजाइन किया बैचलर इन हर्बल कोर्स, यूजीसी ने दी मान्यता

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Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), कांके के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा एक ऐसा कोर्स डिजाइन किया गया है, जो पूरी तरह से हर्बल तकनीक पर अधारित है. यूजीसी ने इसे वोकेशनल कोर्स के रूप में मान्यता दे दी है. हर्बल उपचार एवं उत्पाद के छात्रों को करियर बनाने में यह कोर्स मदद करेगा. यह कोर्स देश का ऐसा पहला कोर्स है.

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तीन साल का होगा कोर्स

कोर्स के नोडल अधिकारी डॉ कौशल कुमार ने बताया कि यह कृषि विज्ञान के छात्रों के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा. छह माह के कोर्स के दौरान छात्र हर्बल उपचार के लिए डिप्लोमाधारी हो जायेंगे. वहीं, एक साल के बाद छात्रों को प्लांटिंग ग्रो की डिप्लोमा डिग्री भी इस कोर्स में प्रदान की जायेगी. तीन साल की पढ़ाई के बाद छात्रों को कोर्स में डिग्री प्रदान की जायेगी.

हर्बल फार्मा की पढ़ाई होगी कोर्स के माध्यम से

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बी-फार्मा की तर्ज पर हर्बल-फार्मा की पढ़ाई भी इस कोर्स के माध्यम से करायी जायेगी, ताकि कोर्स पूरा कर छात्र आयुर्वेद एवं होमियोपैथी चिकित्सा में दवा बना सकें. वहीं, छात्र कोर्स के माध्यम से स्वरोजगार से जुड़ सकते हैं और हर्बल उत्पाद तैयार कर सकते हैं.

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