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विपत्ति में संपत्ति बनाने वालों के खिलाफ बाबूलाल चलायेंगे मुहिम, प्राइवेट अस्पतालों से कहा- सरकारी दर से ना लें अधिक राशि

सिर्फ मुनाफा कमाने का हथियार कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने बना लिया है

Ranchi: भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कोरोना काल में प्राइवेट हॉस्पिटलों पर नकेल कसे जाने की अपील की है. गुरुवार को उन्होंने कहा कि रांची समेत झारखंड के प्राइवेट अस्पताल संचालक कोरोना काल में सरकार और समाज का साथ देने में गंभीरता दिखायें.

कोरोना की दूसरी लहर और इस प्रलयकारी काल में लोगों को मौत के मुंह से बचाने में सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों एवं उनके सेवाभावी डाक्टर्स, नर्सेस, पारा मेडिकल स्टाफ्स महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. पर दुःख की बात यह भी है कि विपदा के इस अवसर को सिर्फ मुनाफा कमाने का हथियार कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने बना लिया है.

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बाबूलाल ने ऐसे लोगों को सामने आने की भी अपील की है जो अस्पतालों की लूट के शिकार हुए हैं. इसके लिये लोगों को तथ्य परक जानकारी और प्रमाण के साथ व्हाट्सएप नम्बर 8674922223 तथा ई-मेल [email protected] पर संपर्क करने को कहा है. इस आधार पर उन्होंने सदन से लेकर कोर्ट तक जाने की बात कही है.

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एडमिशन से लेकर डिस्चार्ज किये जाने तक लूट

बाबूलाल के मुताबिक कई ऐसे भुक्तभोगी, मरीजों और उनके परिजनों की आपबीती सुनी है जिनसे बड़ी पीड़ा होती है. लोग बता रहे हैं कि कई अस्पताल ऐसे हैं जिनमें भर्ती किये जाने से लेकर इलाज, डिस्चार्ज तक किये जाने में लापरवाही, उपेक्षा बरती गयी.

पक्षपात किया गया. उन जगहों पर रोगियों को बीमारी की गंभीरता नहीं, बल्कि उसकी हैसियत और मुंह देखकर इलाज और देखभाल किया जाता है. सरकार द्वारा दर निर्धारित किये गये होने के बावजूद कुछ अस्पतालों ने उसे नजरअंदाज कर रखा है. वे लूटने और तड़पते-बिलखते लोगों के खून चूसने का कीर्तिमान बना रहे हैं.

लोगों की मानें तो मरीजों को ऑक्सीजन लगा कर यूं ही दिन-रात छोड़ दिया जा रहा है. कोई देखने तक नहीं आता. स्लाइन लगाने के बाद उसे कोई जल्दी झांकता तक नहीं. स्लाइन खत्म हो जाता है, मरीज घंटी बजाता रहता है पर कोई एटेंड करने नहीं आता. नतीजतन स्लाइन बोतल खाली होने के बाद भी लगा ही रह जाता है.

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डाक्टरों के मुताबिक यह इतना खतरनाक काम है कि मरीज की जान भी जा सकती है. कुछ अस्पतालों में पहले से उपलब्ध बेड के हिसाब से या कार्य क्षमता के अनुसार विशेषज्ञ डाक्टर, नर्स-टेक्नीशीयन, पारा मेडिकल स्टाफ हैं ही नहीं. ऊपर से अस्पताल के गली-कूची तक में अनगिनत बेड लगा ऑक्सीजन की नली नांक में ठूंसकर पैसा लूटा जा रहा है.

इलाज के नाम पर तड़पते-कराहते लोगों को कोई देखने वाला तक नहीं. बेड के बगल में मरे परे मरीज को घंटो वहां से हटाने वाला कोई नहीं. नतीजतन बगल में पड़े मरीज यह सब देख हार्ट अटैक से मर रहे.

बाबूलाल ने प्राइवेट अस्पतालों से विनती की है कि वे ऐसी लापरवाही और सिर्फ लूटने की प्रवृति से बाज आयें. वे ये समझने की कोशिश करें कि सहने की सीमा जब जवाब दे देती है तब लोगों का आक्रोश फूटता है. ऐसी स्थिति न आये इसके लिये वे ऐसे अस्पतालों को आगाह कर रहे हैं.

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