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बीजेपी की पिच पर बाबूलाल ने पार्टी विलय वाला एक फिक्स्ड मैच खेला!

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: अभी भी जेवीएम का बीजेपी में विलय नहीं हुआ है. औपचारिक तौर पर जेवीएम के मांडर विधायक बंधु तिर्की और पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव कांग्रेस में शामिल भी नहीं हुए हैं. लेकिन ये दोनों चीजें होंगी, ये तय माना जा रहा है.

पिछले करीब 15 दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर गौर फरमाया जाए, तो सारा कुछ फिक्स लग रहा है. बाबूलाल को अपनी राजनीतिक जीवन के लिए एक पिच की जरूरत थी, जो बीजेपी से बेहतर कोई नहीं हो सकती थी.

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बाबूलाल के बीजेपी में जाने के बाद तेज-तर्रार बंधु तिर्की और प्रदीप यादव दोनों को एक मजबूत ठौर की जरूरत पड़ती. इसलिए जेवीएम के तीनों विधायकों ने मिलकर बड़ी ही चालाकी से अपना काम निकाला. जेवीएम ने सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे वाले फॉर्मूले पर काम किया. तीनों विधायक जो करना चाह रहे थे, उसे पूरा होने में अब महज औपचारिकता ही बाकी है.

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प्रदीप का बीजेपी में ना जाना उनकी बड़ी डिमांड बनी

पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव ने जेवीएम के मांडर विधायक बंधु तिर्की का हाथ थाम कांग्रेस के करीब पहुंचे हैं.

प्रदीप यादव की शुरुआती राजनीति बीजेपी से जुड़ी हुई थी. जेवीएम बनने के बाद वो बाबूलाल का साथ देने बीजेपी में आये थे. लेकिन कमोबेश उनकी राजनीतिक विचारधारा बीजेपी की ही रही है. ऐसे में उनकी घर वापसी उतनी मुश्किल नहीं होती. लेकिन अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा की वजह वो बीजेपी में शामिल नहीं हो पाये.

प्रदीप यादव बीजेपी में एक अहम रोल चाह रहे थे. चूंकि पार्टी सरकार में नहीं है, इसलिए किसी तरह के मंत्री पद का सवाल ही नहीं है. विपक्ष में रहने की वजह से सबसे पावरफुल सीट नेता प्रतिपक्ष की होती है. प्रदीप यादव की चाह भी कुछ ऐसी ही थी. लेकिन बीजेपी के पुराने दिग्गजों और पार्टी आला कमान को ये गवारा नहीं था.

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प्रदीप यादव को सरकार से बाहर बीजेपी में एक साधारण विधायक बनना नागवार था. ऐसे में उन्होंने एक सेफ एग्जिट प्लान पर काम किया. बंधु तिर्की का हाथ थामा और कांग्रेस के करीब पहुंचे.

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बंधु तिर्की को पार्टी से निकालना एक राजनीतिक स्टंट

बाबूलाल मरांडी ने कार्यसमिति को भंग कर दोनों विधायकों से पार्टी का हर पद छीन लिया. अब वो एक साधारण विधायक थे. चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी काम करने का आरोप लगाकर बंधु को पार्टी से बाहर किया. जिसके बाद प्रदीप यादव और बंधु तिर्की एक साथ राजनीतिक समीकरण बनाते दिखे.

सोनिया और राहुल के साथ बंधु तिर्की और प्रदीप यादव. जेवीएम के मांडर विधायक बंधु तिर्की और पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव कांग्रेस में शामिल होने की खबर जोरों पर है.

बंधु और प्रदीप ने मीडिया के सामने दसवीं अनुसूची के कानूनों का हवाला देते हुए, यह बताया कि बंधु तिर्की को पार्टी से निकालने के बावजूद बाबूलाल जेवीएम का विलय बीजेपी में नहीं कर सकते. लेकिन दूसरे दिन ही सोनिया और राहुल के साथ उनका फोटो वायरल हुआ.

कांग्रेस की शरण में जाने के बाद दोनों विधायकों का जेवीएम का बीजेपी में विलय का विरोध अपने-आप ठंडे बस्ते में चला गया. दूसरी तरफ बाबूलाल भी अब आसानी से अपनी सेना के साथ बीजेपी में विलय कर सकते हैं.

इस राजनीतिक हथकंडे से तीनों का काम आसान हुआ और किसी को कोई नुकसान भी नहीं हुआ. इसलिए कहा जा रहा है कि बाबूलाल ने पार्टी विलय के मामले को बीजेपी की पिच पर बड़े ही शानदार तरीके से एक फिक्स्ड मैच खेला.

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