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पत्र फर्जी है तो लिखावट के नमूने और हस्ताक्षर की जांच हो, सबकुछ साफ हो जाएगा- बाबूलाल

‘मुकदमे की धमकी लेकर डराने की कोशिश कर रही बीजेपी, लेकिन मैं डरने वाला नहीं बीजेपी’

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Ranchi: बाबूलाल मरांडी के जेवीएम विधायकों से जुड़ें कथित पत्र को जारी करने से उठा सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा. बीजेपी ने पत्र को फर्जी बताया तो बाबूलाल मरांडी ने पलटवार करते हुए कहा कि अपनी असलियत सामने आने के बाद भाजपा नेता खुद पगलाये व बौखलाए दिख रहे हैं. बीजेपी ने बाबूलाल मरांडी को पत्र की सत्यता साबित करने की चुनौती दी है. इस चुनौती के जवाब में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हमने पत्र को राज्य के संवैधानिक शिर्ष को सौंप दिया है. पत्र के सत्यता की जांच उन्हे करवानी है, न की मुझे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज जिन लोगों पर पैसे के लेन-देन का आरोप है, वे आज भी संवैधानिक पद पर बने हुए हैं. हमने पत्र के जांच की मांग की है लेकिन सरकार हमारी जांच की मांग पर मौन है. अगर जरुरत पड़ी तो हम इसे लेकर राष्ट्रपति का दरवाजा भी खटखटाएंगे.

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लिखावट के नमूने और हस्ताक्षर की जांच हो

हमने शुरु से कहा है कि जेवीएम विधायकों को पैसा और पद का लालच देकर तोड़ा गया है. जब भी हमारे पास इससे जुड़े प्रमाण आये हमने राज्य की जनता, और उचित फोरम पर उसे रखा. इस बार भी हमने वही किया. पत्र हाथ से लिखा हुआ है. ऐसे में सीबीआई जांच हो, भाजपा के तमाम पदाधिकारियों के लिखावट के नमूने और हस्ताक्षर की जांच से सबकुछ  साफ हो जाएगा.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि दल बदलने वाले विधायकों को प्रेस के समक्ष अपनी बात कहने के स्थान पर प्रधानमंत्री के समक्ष जाना चहिए और खुद पर लगे अरोप पर जांच की मांग करनी चहिए. मुकदमा की बात कर भाजपा डरना चहती है मै इस लाड़ाई परिणाम आने तक लडूंगा.

लालकृष्ण आडवाणी से सीखें बीजेपी नेता

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज की भाजपा का चरित्र पूरी तरह बदल गया है. एक समय लालकृष्ण आडवाणी पर हवाला मामले में आरोप लगा था तो उन्होंने यह घोषणा की थी जब तक मैं आरोप से मुक्त नही होता तब तक संसद में नहीं आऊंगा और उन्होंने ऐसा किया भी. लेकिन वर्तमान भाजपा का चाल और चरित्र पूरी तरह बदल गया है.

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किस नेता का है नाम और किस विधायक ने लिये कितने पैसे

बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. आठ से छह विधायक सरकार बनते वक्त बीजेपी में शामिल हो गये. उस वक्त से विधानसभा के झालसा में इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष कर रहे हैं.

पत्र में क्या है

झाविमो सुप्रिमो बाबूलाल मरांडी की ओर से शुक्रवार को जारी किय गये पत्र जेवीएम विधायकों को भाजपा में शामिल होने के लिए 11 करोड़ रूपया लेन-देन का जिक्र है, जिसे शनिवार को 6 विधायक और रवींद्र राय के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फर्जी कहा गया था.

चिट्ठी के मुताबिक-

  • गणेश गंझू, जो सिमरिया के विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये चतरा के सांसद सुनील कुमार सिंह से लिये. मामले की निगरानी राकेश प्रासद कर रहे थे.
  • रणधीर कुमार सिंह, जो सारठ से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये महेश पोद्दार (जो अभी झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं) से लिये. मामले की निगरानी दीपक प्रकाश कर रहे थे.
  • नवीन जायसवाल, जो हटिया से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये नगर विकास मंत्री सीपी सिंह से लिये. मामले की निगरानी प्रदीप कुमार वर्मा कर रहे थे.
  • अमर कुमार बाउरी, जो चंदनकियारी से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये विधायक विरंची नारायण से लिये. मामले की निगरानी संजय सेठ कर रहे थे.
  • आलोक कुमार चौरसिया, जो डालटनगंज से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये अनंत ओझा से लिये. मामले की निगरानी उषा पांडे कर रही थीं.
  • जानकी कुमार यादव, जो बरकट्ठा से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री रघुवर दास से लिये. मामले की निगरानी राजेंद्र सिंह कर रहे थे.

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