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पूर्व सीएम रघुवर दास के करप्शन केस को सामने ला रहे बाबूलाल मरांडीः झामुमो

Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आरोप लगाया है कि पूर्व सीएम रघुवर दास की पोल पट्टी खोलने के मिशन पर बाबूलाल मरांडी लगे हुए हैं.

पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले दिनों बाबूलाल साहेबगंज के कई हिस्ट्रीशीटर, कानून की नजर में फरार लोगों संग मीडिया के सामने आये.

अंकुश राजहंस, मुकेश शुक्ला व रीता देवी जैसी महिला के साथ उन्होंने झामुमो के केंद्रीय सचिव और बरहेट विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा पर अनर्गल आरोप लगाया. ये सभी लोग कानून की नजर में दागदार हैं या सरल लोग नहीं हैं.

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पूर्ववर्ती रघुवर सरकार में ये सभी लोग हिस्ट्रीशीटर, भगोड़े साबित हुए हैं. अब इनके जरिये पुराने मामलों को उछाल कर बाबूलाल रघुवर दास के समय की गड़बड़ियों को ही सामने लाने में जुटे हुए हैं. उनका असल निशाना रघुवर ही हैं.

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रूपा तिर्की मामले की जांच जरूरत पड़ने पर सीबीआइ से लेकर इंटरपोल तक करायी जायेगी. फिलहाल पुलिस इस पर गंभीरता से लगी है.

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राजधनवार के बजाये साहेबगंज पर नजर

सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजधनवार के लोगों ने बाबूलाल मरांडी को विधानसभा के लिए अपना प्रतिनिधि चुना. पर बाबूलाल जीतने के बाद कभी उधर जाते नहीं. इसके बजाये संतालपरगना के चर्चित, कुख्यात लोगों संग बैठ रहे हैं. अपनी ताकत का संरक्षण प्रदान करके उनके संग पीसी कर रहे हैं. उनका साथ एक सांसद भी दे रहे हैं जो झारखंड पुलिस को औकात बताने का काम कर रहे हैं पर गृह मंत्रालय चुप है.

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अंकुश राजहंस कानून की नजर में फरार है. रघुवर दास के शासन में एक पदाधिकारी के अंगरक्षक को दो घंटे तक बंधक बना लिया था. प्रशासन की टीम अवैध खनन को रोकने साइट पर गयी थी.

17 अक्टूबर 2018 की यह घटना है. बाद में इस पर केस हुआ. पर सीएम आवास से उसके लिए पैरवी कर राहत दिलायी गयी. महिला रीता देवी से एक जमीन के बारे में बाबूलाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में काम निकलवाते हैं.

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महिला के जमीन पर दावे संबंधी मामले को 2020 में कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इसके बाद अपने हक के लिए वह किसी भी तरह के कोर्ट में फिर से दावा करने नहीं गयी. वास्तव में कागजात शिवशंकर के नाम से है.

पिंटू शुक्ला के बारे में प्रशासन का मानना है कि उसका जो मकान बना हुआ है, वह एसपीटी की धारा 20, 42 का उल्लंघन करके बनाया हुआ है.

पाकुड़ में उसके मकान को ध्वस्त करने को कहा गया ( मामला 2018). इसी तरह मंडल और अन्य लोगों से पंकज मिश्रा के बारे में उटपटांग झूठ बोलवाया गया.

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संथाल में अवैध क्रशर चला रहे भाजपाई

उन्होंने कहा कि साहेबगंज में किसी भी तरह की अनियमितता होने की बात पर वहां से चुन कर आये सांसद, विधायक या अन्य नेता कुछ नहीं बोल रहे. निचले स्तर पर भी कोई विरोध नहीं. कोई भी बयान नहीं.

पर भाजपा के बाबूलाल मरांडी को अब तक कायदे से पार्टी का नेता तक नहीं माना गया और जो स्वयंभू नेता हैं, वे अनर्गल आरोप लगा रहे.

वे इस फिराक में हैं कि अगर उनकी तरफ से उछाले गये विषय पर सरकार जांच कराये तो इसकी जड़ में रघुवर दास निकलें. वे जानबूझ कर 2015 से 2019 की अवधि के मामलों को सामने ला रहे हैं.

अंकुश राजहंस का जून 2020 में 8 एकड़ 56 डिसमिल जमीन पर से लीज खत्म हो चुका है. बावजूद इसके 28 जगहों पर वह अवैध तरीके खनन कर रहा. जांच में पता चलने पर केस दर्ज हुआ है.

इसी तरह प्रदेश भाजपा के 50 नेताओं का नाम झामुमो को मालूम है जबकि झामुमो के एक भी नेता का अवैध क्रशर उधर नहीं चल रहा.

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