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ट्यूशन में सालभर आयुष्मान खुराना और ताहिरा ने नहीं की बात, जानें ऐसा क्या चक्कर चला की बने जीवन साथी

बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना के जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : आयुष्मान खुराना नयी पीढ़ी के सबसे टैलेंटेड अभिनेताओं में शामिल हैं. 2012 रीलीज हुई अपनी पहली फिल्म विक्की डोनर में ही आयुष्मान ने अपनी अभिनय प्रतिभा की झलक दिखा दी थी. इसमें इन्होंने अपनी गायकी का भी जलवा दिखाया था. आयुष्मान ने पहली फिल्म से स्पर्म डोनेशन जैसे बोल्ड और नए विषयों पर काम करने का साहस दिखाने का सिलसिला शुरू किया था वो अब भी निरंतर चल रहा है.

आयुष्मान की सबसे खास बात यह है कि वे खुद को किसी खास तरह की ईमेज के बंधन में बांध कर रखना नहीं चाहते हैं. आयुष्मान की करीब आधा दर्जन फिल्में ऐसी हैं जो अच्छी हैं और इनमें इनकी अभिनय प्रतिभा के अलग- अलग रंग आप देख सकते हैं.

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जीवन का सफर

आयुष्मान खुराना का जन्म 14 सितंबर, 1984 को चंडीगढ़ में हुआ था. इंग्लिश लिटरेचर से बैचलर्स की डिग्री ली और साथ ही मास्टर्स उन्होंने मास कॉम्युनिकेशन से किया. आयुष्मान ने वीजे, आरजे और होस्ट के तौर पर भी फिल्मों में आने से पहले काम किया है.

बहुत सारे एक्टर आपको इंडस्ट्री में ऐसे मिलेंगे जो अपने जीवन का हमसफर इंडस्ट्री में नाम कमाने के बाद ढूंढ़ते हैं. मगर आयुष्मान के साथ ऐसा नहीं था. आयुष्मान को उनका प्यार बहुत पहले ही मिल गया था.

बहुत कम लोगों को इस बारे में पता होगा कि आयुष्मान खुराना और ताहिरा कश्यप की पहली मुलाकात तब हुई थी जब वे 12वीं क्लास में पढ़ते थे. फिजिक्स के ट्यूशन में वे पहली बार मिले थे.

मगर 1 साल तक दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी. ताहिरा और उनकी दोस्त को आयुष्मान पर क्रश था. हालांकि बाद में ताहिरा को भी ये पता चल गया था कि आयुष्मान के मन में भी उनके लिए फीलिंग्स हैं.

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ऐसे हुई एक्सीडेंटल मुलाकात

फिर एक इंसिडेंट ऐसा हुआ जिसके बाद दोनों की बातचीत भी शुरू हो गई. दरअसल एक दिन ताहिरा के पिता ने कहा कि उनका पूरा परिवार उनके एक एस्ट्रोलॉजर फ्रेंड के यहां जा रहा है. जब ताहिरा वहां पहुंची तो उन्हें पता चला की ये तो आयुष्मान का ही घर है और आयुष्मान के पापा ही वो एस्ट्रोलॉजर हैं.

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यूं शुरू हुई प्रेम कहानी

इस दौरान आयुष्मान ने अपने पिता संग किशोर कुमार का गाना ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ भी गाया था. बस यहीं से दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत हो गई थी. करीब 6 से 8 साल तक कपल ने एक-दूसरे को डेट किया और उसके बाद साल 2008 में शादी कर ली. इस शादी से कपल को 2 बच्चे भी हैं.

स्केच :प्रभात ठाकुर, कला निर्देशक, बॉलीवुड .

विराजवीर और वरुष्का. तो आईए आयुष्मान की उन फिल्मों का जायजा लेते हैं जो चर्चित रही हैं और बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही हैं.

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दम लगा के हईसा

2015 में रीलीज हुई दम लगा के हईसा में भी वो एक चुनौती पूर्ण भूमिका स्वीकार करते हैं. इसमें हिरोइन बनी संध्या (भूमि पेंडनकर) मोटी और साधारण दिखने वाली है, लेकिन ज्यादा पढ़ी लिखी है. वहीं प्रेम (आयुष्मान) एक कम पढ़ा लिखा लड़का है. प्रेम बहुत संकोच के साथ खुद से अधिक शिक्षित लेकिन अधिक वजन वाली लड़की से शादी करता है.

शुरुआत में इनका रिश्ता कई उतार-चढ़ाव से गुज़रता है पर पत्नी को पीठ पर लेकर दौड़ने की एक प्रतियोगिता में भाग लेने पर ये युगल करीब आ जाता है. इस फिल्म में भूमि का रोल भी ज्यादा दमदार था इसलिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का फिल्म फेयर अवार्ड भी दिया गया था.

इसमें आयुष्मान का रोल ग्लैमर विहीन और नायिका से कमजोर था इस बात को भलीभांति जानते हुए भी इन्होंने ये भूमिका स्वीकार की थी. आयुष्मान ने अपना किरदार बहुत अच्छे ढंग से लो प्रोफाइल रहकर निभाया था.

हल्की- फुल्की लव स्टोरी बरेली की बर्फी में आयुष्मान और राजकुमार राव में मुकाबला है. छोटे बजट की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी कामयाब रही थी.

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बधाई हो सिचुएशन कामेडी और बढ़िया अभिनय की सौगात

आयुष्मान खुराना (Ayushmann_Khurrana) की बधाई हो फिल्म ऐसी फिल्म है जिसमें आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे. निर्देशक अमित आर शर्मा ने ऐसे विषय को चुना है जो हास्य का सृजन कर देता है. इसमें रिटायरमेंट की उम्र के आसपास पहुंचे रेलवे टीसी की पत्नी बनी नीना गुप्ता प्रेग्नेंट हो जाती हैं. इसके बाद आक्वर्ड सिचुएशन में फंसे इस टिपिकल मध्यवर्गीय परिवार का मजाक आसपास के लोग उड़ाते हैं.

जवान बच्चों के माता-पिता अगर संतानोत्पत्ति करते हैं, तो इसे हमारे समाज में सही नहीं समझा जाता. तरह-तरह की बातें की जाती हैं, मज़ाक उड़ाया जाता है. शादी की उम्र के बच्चों को ख़ुद यह बात बड़ी अजीब लगती है कि उनके माता-पिता यह क़दम कैसे उठा सकते हैं. फिल्म ऐसी ही सोच पर मज़ाकिया अंदाज़ में आघात करती है.

इसमें मजेदार बात यह है कि जो मां प्रिगनेंट हुई है उसके बेटे नकुल (आयुष्मान खुराना) की उम्र शादी के लायक है. ऐसे में उसके दोस्त यार तो उसकी खूब खिंचाई करते ही हैं. यहां तक की गर्लफ्रैंड रैने(सान्या मल्होत्रा) भी अपनी हंसी नहीं रोक पाती. नकुल के छोटे भाई को तो स्कूल में इतना चिढ़ाते हैं कि मारपीट तक हो जाती है.

यह यूनिक किस्म के टॉपिक पर फिल्म बनी है.आयुष्मान खुराना ने इस फिल्म में भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है. बधाई हो में वे एक बार फिर कमाल करते हैं.

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आर्टिकल 15 महत्वपूर्ण मुद्दे पर संवेदनशील फिल्म

फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा ने एक बार फिर महत्वपूर्ण व सामयिक मुद्दे पर गंभीर व संवेदनशील फिल्म बनाई है. उत्तर प्रदेश के बैकड्राप पर दलितों के प्रति भेदभाव के मुद्दे को इसमें अच्छे ढंग से दिखाया गया है.

हमारी हिन्दी पट्टी खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में जातीय भेदभाव किस कदर हावी है उसको ये फिल्म शिद्दत से रेखांकित करती है.

फिल्म का सबसे प्लस प्वाइंट इसकी कहानी है. लेखक गौरव सोलंकी ने बढ़िया प्लाट चुना है. कहानी का तानाबाना भी अच्छा बुना है. फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के लालगांव की है.वहां पर आईपीएस ऑफिसर अयान रंजन (आयुष्मान खुराना) की नयी-नयी पोस्टिंग होती है. इसी दौरान लालगंज के दलित टोला की तीन लड़कियां गायब हो जाती हैं. वहीं पुलिस लीपापोती में लग जाती है. दो दिन बाद दो लड़कियों की लाश पेड़ पर लटकी हुई मिलती है.

पुलिस इसे ऑनर किलिंग का नाम देती है लेकिन अयान को जांच करने के दौरान पता चलता है कि हकीकत कुछ और ही है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला डॉक्टर दोनों लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म की बात लिखती है तो एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी (मनोज पहवा) उसे धमकाता है कि वो ये बात रिपोर्ट में ना लिखे. वहीं अयान लेडी डॉक्टर को विश्वास में लेकर तथा उसे सुरक्षा का आश्वासन देकर सही रिपोर्ट लिखने के लिए कहता है.

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आयुष्मान का सधा हुआ अभिनय

कलाकारों के अभिनय की बात करें तो आयुष्मान खुराना ने बहुत बढ़िया काम किया है. नए नए आईपीएस अयान सिंघम के अजय देवगन की तरह मारधाड़ किए बिना ही बड़े सलीके से ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते हैं. इसमें उसे परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है. सीबीआई जांच बैठती है.

सस्पेंड भी कर दिया जाता है पर इन सब के बावजूद वो तीसरी लड़की को जिंदा बरामद करता है. इसके साथ ही लड़कियों से दुष्कर्म करने वालों का पता लगा कर उन्हें बेनकाब करता है और अपने पुलिस अधिकारी को भी गिरफ्तार करता है. हां ये सारी कवायद सत्ता में बैठे ताकतवर नेता के राजनीतिक दवाब को अनदेखा कर करता है.

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नए टॉपिक पर संजीदगी से बनी फिल्म बाला

हिंदी सिनेमा धीरे-धीरे बहुरंगी और मैच्योर होता जा रहा है इसका एक ताजातरीन उदाहरण आयुष्मान खुराना की हाल में रिलीज हुई फिल्म बाला है. अमर कौशिक की डायरेक्ट की हुई इस फिल्म में पुरुषों के गंजेपन की समस्या को आधार बनाकर एक बढ़िया कहानी का तानाबाना बुना गया है . पटकथा नीरेन भट्ट और करण मल्होत्रा ने लिखी है.

फिल्म अभिनेता ‘ विजय राज की आवाज़ के साथ मजेदार नोट पर शुरू होती है. इसमें सिर पर बालों के महत्व को बखूबी बताया गया है. बालमुकुंद शुक्ला उर्फ बाला (आयुष्मान खुराना) को एक बच्चे के रूप में दिखाया जाता है, जो अपने बालों को लेकर काफी इतराता है. बाला अपनी स्कूल की क्लासमेट और पड़ोसन लतिका (भूमि पेडनेकर) का काले रंग की वजह से मज़ाक उड़ाता था.

कानपुर के रहने वाले बाला के बाल भरी जवानी में ही तेजी से जुदा होने लगते हैं. ऐसे में इस हीरो टाइप बाला के फ्रस्ट्रेशन का दौर शुरू होता है.. बाला अपने सर पर बाल उगाने के सैकड़ों नुस्खे आजमाते हैं इनको देख कर दर्शक बेतहाशा हंसने को मजबूर हो जाते हैं.

फिल्म के डायलॉग बहुत बढ़िया है एकदम चुटकले, सटीक और स्वभाविक. आयुष्मान और भूमि दोनों ने कनपुरिया बोली के लहजे को बहुत बढ़िया ढंग से एडॉप्ट किया है. दर्शकों को हंसाने में डायलॉग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

फिल्म का संदेश बहुत गहरा लेकिन स्पष्ट है कि किसी भी तरह की शारीरिक कमी चाहे वो गंजापन हो, मोटापा हो, काला या सांवला होने, नाटे होने को स्वभाविक रूप से स्वीकार करने की जरूरत है. किसी का भी इन आधारों पर मजाक नहीं उड़ाना चाहिए.

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अंधाधुन स्पेंस थ्रिलर

दृश्य और बदलापुर जैसी सफल सस्पेंस थ्रिलर बनाने वाले निर्देशक श्रीराम राघवन के साथ आयुष्मान अंधाधुन फिल्म में एक नये अंदाज में नजर आते हैं. वो एक पियानो बजानेवाले कलाकार के रोल में है जो लोगों की सहानुभूति और नाम पाने के लिए अंधा होने का नाटक करता है.

एक बार उसे पुराने जमाने के सुपर स्टार की भूमिका निभाने वाले (अनिल धवन) अपनी पत्नी बनी तब्बू की एनीवर्सरी पर उसे सरप्राइज देने के लिए अपने घर पर पियानो बजाने के लिए बुलाता है. वहां जब आयुष्मान जाता है तो उसी समय अनिल धवन की हत्या कर दी जाती है.

इसके बाद से कहानी बहुत तेजी से चलती है और कई घुमावदार मोड़ लेती है. बदलापुर की तरह ही श्रीराम राघवन कहानी को बहुत बढ़िया मैसेज के साथ खत्म करते हैं.

इस फिल्म में भी आयुष्मान अपनी भूमिका में जमते हैं. वे बेहद सहज अभिनय करते हैं. इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. अभी आयुष्मान चंडीगढ़ करे आशिकी, डॉक्टर जी और अनेक जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगे.

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