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#AyodhyaVerdict  : Supreme Court ने अयोध्या  फैसले के खिलाफ दायर सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज की

 फैजाबाद कोर्ट के 1962 के आदेश के अनुसार सीपीसी के ऑर्डर एक रूल आठ के तहत कोई भी नागरिक पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है. 

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NewDelhi : Supreme Court के पांच जजों की पीठ ने  राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में दाखिल सभी पुनर्विचार याचिकाएं गुरुवार को खारिज कर दी. जान लें कि याचिकाएं 9 नवंबर को  Supreme Court द्वारा दिये गये फैसले के खिलाफ दायर की गयी थी.

पुनर्विचार याचिकाओं को लेकर   Supreme Court के पांच जजों की पीठ ने कहा कि याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है. कहा कि नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने का कोई आधार नहीं है. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद मामले में नौ नवंबर को अपना फैसला सुनाया था.

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Supreme Court ने गुरुवार को चैंबर में विचार किया.

अयोध्या भूमि विवाद में नौ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाओं पर Supreme Court ने गुरुवार को चैंबर में विचार किया. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना  की पांच जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. पहले इस बेंच की अगुवाई करने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर हो चुके हैं. जस्टिस संजीव खन्ना ने उनकी जगह ली.

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 18 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गयी थीं

9 नवंबर को सर्वसम्मति से फैसले में तत्कालीन सीजेआई न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पूरी 2.77 एकड़ विवादित भूमि देवता राम लला के पक्ष में दी थी और केंद्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था. इस मामले में 18 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गयी थीं.

खबरों के अनुसार अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की विशेष पीठ के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुल 18 याचिकाएं दाखिल की गयी थीं.  इनमें 9 याचिकाएं पक्षकारों की ओर से और बाकी नौ अन्य याचिकाकर्ताओं की थीं.

कानूनन यह रिप्रेजेंटेटिव सूट यानी प्रतिनिधियों के जरिए लड़ा जाने वाला मुकदमा था. इस कारण  सिविल यानी दीवानी मामलों की संहिता सीपीसी के तहत पक्षकारों के अलावा भी कोई पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता था.  फैजाबाद कोर्ट के 1962 के आदेश के अनुसार सीपीसी के ऑर्डर एक रूल आठ के तहत कोई भी नागरिक पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है.

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