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छोटानागपुर डायसिस की स्वायतत्ता का मामला : आखिर क्यों नहीं सुलझ रहा विवाद

Ranchi : पिछले दिनों चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआइ) से जुड़े छोटानागपुर डायसिस ने खुद को सीएनआइ से अलग करने की घोषणा कर दी थी. छोटानागपुर डायसिस के बिशप बीबी बास्के ने कई अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि डायसिस अब स्वायत है और अपने मामले में खुद ही निर्णय लेगा. बिशप के इस निर्णय के बाद उनके समर्थकों और विरोधी आमने सामने हैं.

सिनोड ने कहा स्वायतता की घोषणा गंभीर अनुशासनहीनता का मामला

इसके बाद सीएनआइ की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आयी और 21 जुलाई को सीएनआइ के सर्वोच्च निकाय सिनोड ने बिशप बीबी बास्के को छुट्टी दे दी. सिनोड की ओर से कहा गया कि बिशप बास्के ने असंवैधानिक तौर पर छोटानागपुर डायसिस को सीएनआइ से अलग करने की घोषणा की है. कहा गया कि यह गंभीर अनुशासनहीनता, निंदनीय और अवज्ञा का मामला है.

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सिनोड की ओर से जांच कमेटी का गठन

इसके साथ ही सिनोड की ओर से बिशप को उनके सभी दायित्वों से फिलहाल मुक्त करते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया गया है. डायसिस का कार्य़ चलता रहे इसके लिए सिनोड के प्रतिनिधि के रूप में मॉडरेटर कॉमिशरी के रूप में रेव्ह जोलजस कुजूर को नामित किया गया है. हालांकि इसके बाद भी छोटानागपुर डायसिस में विवाद का अंत नहीं हुआ और दोनों ही पक्षों से आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चलता रहा.   

इस दौरान सुलह की कोशिशें भी चलती रही हैं, पर अभी तक इसमें कुछ खास प्रगति नहीं हुई है. जांच कमेटी ने अभी तक क्या किया है यह भी अभी स्पष्ट नहीं है.

1970 में गठन हुआ था सीएनआइ का

गौरतलब है कि चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआइ) का गठन 29 नवंबर 1970 को हुआ था. इसके अंर्तगत 27 डायोसिस (छोटानागपुर डायसिस सहित) है. सीएनआइ का अपना संविधान है और सिनोड इसका सर्वोच्च निकाय है. छोटानागपुर डायसिस के तहत इसके अपने इलाके, चर्च, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अन्य संस्थान है. 1970 के बाद से अभी तक छोटानागपुर डायसिस के विश्वासी सीएनआइ के संविधान और नियमों के तहत बपतिस्मा, शादी, मृत्यु सहित अन्य संस्कारों को करते रहे हैं.    

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