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टाना भगतों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए बना प्राधिकार, 10 करोड़ के खर्च का हिसाब-किताब नहीं

आठ जिलों में रह रहे हैं टाना भगत, कई सुविधाएं देने की थी घोषणाएं

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Deepak

Ranchi: झारखंड सरकार ने टाना भगतों के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए टाना भगत विकास प्राधिकार गठित किया है. इसके अध्यक्ष मुख्य सचिव बनाये गये हैं. प्राधिकार के लिए सलाना 10 करोड़ रुपये का बजट भी सरकार ने उपलब्ध कराया है. इसका हिसाब-किताब संबंधित विभाग नहीं दे रहा है. प्राधिकार की बैठकें नियमित नहीं होने से टाना भगतों के विकास के लिए संचालित हो रही योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है.

बैठक में नहीं आते हैं अधिकारी

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने पिछले दिनों प्राधिकार की कार्यकारिणी समिति की बैठक ली. इस बैठक में 15 विभागों के अधिकारियों को बुलाया गया था. लोकिन अधिकारी बैठक में आये ही नहीं. कल्याण विभाग के नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर बाद में बैठक की औपचारिकताएं पूरी की गयीं. प्राधिकार में योजना सह वित्त विभाग, ऊर्जा, पेयजल और स्वच्छता, स्कूली शिक्षा और साक्षरता, स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, वन और जलवायु परिवर्तन, उच्च और तकनीकी शिक्षा, खाद्य आपूर्ति, पर्यटन और कला संस्कृति और कल्याण विभाग के अधिकारी का रहना अनिवार्य है.

कई योजनाएं चला रही है सरकार

सरकार की मानें, तो टाना भगतों के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसमें टाना भगतों की सूची का सत्यापन कार्य शामिल है. रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, चतरा, पलामू और लातेहार में पंजी-2 (रजिस्टर-2) के आधार पर सत्यापन कार्य पूरा करना है. यह लंबित पड़ा हुआ है. सूची के सत्यापित होने से ही इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पायेगा.

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टाना भगतों के उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण (म्यूटेशन) अभी भी अंचलों में लंबित है. प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत इन्हें एक अतिरिक्त कमरा बनाकर उपलब्ध कराना है. ग्रामीण विकास विभाग को यह तय करना है कि 2017-18 से लेकर अब तक कितनी राशि खर्च की गयी. सभी टाना भगत परिवारों को सरकार की तरफ से चार-चार गाय दिया जाना है.

कृषि विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारियों को समन्वय स्थापित कर, यह काम पूरा करना है. कौशल विकास मिशन की तरफ से टाना भगतों को क्षमता विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाना है. यह भी धीमा चल रहा है. टाना भगत की महिलाओं को खादी ग्रामोद्योग आयोग से कंबल निर्माण का प्रशिक्षण भी दिया जाना है. मामला खटाई में पड़ा हुआ है.

टाना भगत की बालिकाओं का नर्सिंग प्रशिक्षण भी स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग में पड़ा हुआ है. उज्जवला योजना से सभी परिवारों को रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करानी है. यह खाद्य आपूर्ति विभाग के पास पड़ा हुआ है, वहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत आवासों में शौचालय का निर्माण भी किया जाना है. यह मामला भी सुस्त चल रहा है. टाना भगतों के आवास में नि:शुल्क बिजली कनेक्शन दिये जाने का मामला भी सूची तैयार नहीं होने से लंबित है.

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