Opinion

5 अगस्तः याद है, बरसी नहीं मनायेंगे! दुनिया की जन्नत एक बुरे सपने में तब्दील होने की

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Soumitra Roy

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से पूर्ण राज्य का दर्जा ले लिया गया. कश्मीरियों को लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं से वंचित कर दिया गया. जैसे स्वतंत्र निर्वाचित विधायिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की स्वतंत्रता आदि.

अधिकांश राजनीतिक नेता अभी भी जेल में हैं या घर में नजरबंद हैं. कई प्रतिबंध अभी भी जारी हैं. कश्मीरियों को 4-जी इंटरनेट से अब तक वंचित रखा गया है. संविधान के अनुच्छेद 370 और 35 ए को समाप्त करने के साथ ही मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि कश्मीर का आर्थिक उत्थान होगा. कश्मीरियों को एक बेहतर और उज्जवल कश्मीर का सपना दिखाया गया था.

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लेकिन देश तय कर चुका है कि वह 5 अगस्त को कश्मीर में जम्हूरियत को खत्म करने की बरसी नहीं मनायेगी. बल्कि राम मंदिर के भूमि पूजन का उत्सव मनाएगा. इसके साथ ही देश हमेशा के लिए भूल जाएगा कि मोदी सरकार ने कश्मीर की बेहतरी के कुछ वादे भी किये थे.

दिसंबर 2019 में, द कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद के आर्थिक नुकसान पर एक रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें क्षेत्रवार डेटा विश्लेषण से कश्मीर के केवल 10 जिलों में 17,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया था.

2011 की जनगणना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की साक्षरता दर देश में सबसे अधिक 67.16% होने के बावजूद, यह भारत में युवाओं की बेरोजगारी में सबसे ऊपर आने वाले राज्यों में से एक बन गया है.
जम्मू-कश्मीर में 1.5 लाख पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों ने जून 2019 में केवल 15 दिनों में ही खुद को बेरोजगार के रूप में रोजगार और परामर्श निदेशालय में पंजीकृत किया.

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अगस्त में अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, उसके बाद से और फिर कोरोना महामारी के लॉकडाउन के कारण हालात और बिगड़ते ही जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में भारत के 339 सार्वजनिक उपक्रम में से केवल 3 हैं. निवेश की यह कमी क्षेत्र में बेरोज़गारी के प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक है.

जम्मू-कश्मीर भारत में 80% सेब का उत्पादन करता है और एकमात्र कारण है कि भारत दुनिया के शीर्ष 5 सेब उत्पादक देशों में से एक है. भारत में 6,000 कोल्ड स्टोरेज में से केवल 30 जम्मू-कश्मीर में हैं.

जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प विभाग के अनुसार, 2019 की दूसरी तिमाही में हस्तशिल्प के निर्यात में 62% की गिरावट आयी है. जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक, जेके बैंक, ने स्टॉक एक्सचेंज में अपने शेयरों के मूल्य में तेज गिरावट देखी है. जो 2014 में 180 रुपये प्रति शेयर से घटकर आज 15 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है. यानी 1200 % की गिरावट. यह एक संकेत है कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था बीमार हो गयी है.

हालात यह है कि दुनिया की जन्नत एक बुरे सपने में तब्दील हो चुकी है.

डिस्क्लेमरः यह लेखक के निजी विचार हैं.

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