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#Aramco के संयंत्रों पर हमले से तेल उत्पादन में भारी कमी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने की आशंका

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Riyadh : सऊदी अरब में Aramco के दो बड़े संयंत्रों अब्कैक और खुरैस पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन अटैक से लगी आग पर हालांकि काबू पा लिया गया है, पर इस हमले से बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों के बाद वहां तेल उत्पादन में हर दिन 50 लाख बैरल की कमी आयी है. यह सऊदी अरब के कुल तेल उत्पादन का आधा हिस्सा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी इजाफे की आशंका जताई जा रही है.

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जान लें कि हमले के बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस हमले से दुनिया के शक्तिशाली देशों (P5+1) के साथ परमाणु समझौते को लेकर ईरान की बातचीत खटाई में पड़ने के आसार नजर आ रहे हैं. अमेरिका के साथ भी उसका तनाव बढ़ सकता है. अमेरिका और सऊदी अरब खाड़ी में टैंकरों पर हुए हमलों के लिए ईरान को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

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हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है

सऊदी की सरकारी मीडिया के अनुसार ड्रोन अटैक में दोनों प्रतिष्ठानों में भीषण आग लग गयी. जारी तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि अरामको की सबसे बड़ी रिफाइनरी वाले इलाके में भयानक आग लगी थी. दूसरा ड्रोन हमला खुरैस तेल के इलाके में हुआ और वहां भी आग लग गयी. यमन के Houthi rebels ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको के दो संयंत्रों में शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया था. ऐसा माना जाता है कि हूति विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है.

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कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है

यमन के विद्रोहियों द्वारा हमला ऐसे समय में किया गया है, जब यह कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है. इस हमले के बाद सऊदी अरब के तेल का कुल उत्पादन लगभग आधा हो गया है. आधिकारिक सऊदी समाचार एजेंसी ने गृह मंत्रालय के एक बयान के हवाले से कहा है किअंतरराष्ट्रीय समयानुसार एक बजे अरामको के औद्योगिक सुरक्षा दलों ने अब्कैक और खुरैस में ड्रोन हमले के कारण लगी आग से निपटना शुरू किया. उन्होंने बताया कि दोनों संयंत्रों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है.

हूती विद्रोही सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों के लिए गंभीर खतरा बन गये हैं.

ईरान के साथ चल रहे क्षेत्रीय तनावों के बीच यह हमला हुआ है. इन हमलों से पता चलता है कि ईरान से जुड़े हूती विद्रोही सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों के लिए कैसे गंभीर खतरा बन गये हैं. सऊदी अरब दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है.

हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने सीमा पार सऊदी अरब के हवाईअड्डों और अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिये हैं. इसे वह यमन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में सऊदी अरब के नेतृत्व में लंबे समय से की जा रही बमबारी का बदला बताते हैं. हमले के बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव चरम पर है.

आधिकारिक सऊदी समाचार एजेंसी ने ऊर्जा मंत्री शहजादा अब्दुलअजीज के हवाले से बताया कि हमले की वजह से अब्कैक और खुरैस में अस्थायी तौर पर उत्पादन का काम रोक दिया गया है.

इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. पोम्पिओ ने कहा,ईरान ने दुनिया के ऊर्जा आपूर्ति पर अप्रत्याशित हमला किया. यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोही संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य याह्या सारए ने बताया कि इस हमले को अंजाम देने के लिए 10 ड्रोन सऊदी भेजे गये थे.

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