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रांची से गिरफ्तार हुए जाली नोट के तस्कर को रिमांड पर लेगी एटीएस की टीम

एटीएस के विशेष न्यायाधीश ने रिमांड पर लेने की दी अनुमति

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Ranchi: 1 दिसंबर को रांची से गिरफ्तार हुए जाली नोट के तस्कर राजेश भुईयां को रिमांड पर लेकर एटीएस की टीम पूछताछ करेगी. इस मामले में अनुसंधान कर रहे एटीएस से अधिकारियों ने सिविल कोर्ट स्थित एटीएस के विशेष न्यायाधीश सह अपर न्यायायुक्त दिवाकर पांडेय की अदालत में आवेदन देकर रिमांड पर लेने के लिए अर्जी दाखिल की थी. जिसके बाद अदालत ने स्वीकार करते हुए उसे रिमांड पर देने की अनुमति प्रदान दे दी. अदालत से अनुमति मिलने के बाद एटीएस जाली नोट के तस्कर राजेश भुईयां को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी.

बांग्लादेश के रास्ते झारखंड में फल फूल रहा है जाली नोट का कारोबार

बांग्लादेश के रास्ते जाली नोट का कारोबार झारखंड में फल- फूल रहा है. झारखंड में जाली नोट के साथ कई तस्कर गिरफ्तार भी हो चुके हैं. 1 दिसंबर को रांची में जाली नोटों के साथ तस्कर के गिरफ्तार होने के बाद एक बार फिर इस बात की पुष्टि हो गई है कि जाली नोटों के तस्करों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं. पहले भी इस बात का खुलासा होता रहा है कि पाकिस्तान से बांग्लादेश के रास्ते जाली नोट बंगाल के मालदा पहुंचते हैं. उसके बाद आसानी से जाली नोट झारखंड पहुंचते हैं.

दो लाख के जाली नोट के साथ राजेश भुईयां हुआ था गिरफ्तार

झारखंड पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक दिसंबर को रांची के स्टेशन रोड स्थित सरकारी बस स्टैंड से 2000 रुपये के 104 जाली नोटों (208000 रुपये) के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार तस्कर राजेश भुइयां हजारीबाग जिले के चरही थाना क्षेत्र के जरबा का रहनेवाला है. वह पश्चिम बंगाल के मालदा से जाली नोट लेकर रांची पहुंचा ही था. वह नोट लेकर हजारीबाग के चरही जाने वाला था. इसी दौरान उसे पकड़ा गया. राजेश इसके पहले भी जाली नोट के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट की बंदी के दौरान भी उसने जाली नोट भुनाने की कोशिश की थी. उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को अपने गिरोह के अन्य साथियों की जानकारी दी है जिसके बाद मामले में कार्रवाई करते हुए रवि प्रजापति नाम के शख्स को एटीएस की टीम ने रविवार को हजारीबाग से गिरफ्तार कर लिया था.

झारखंड के बाजारों में खपाया जाता है जाली नोट

नकली नोट के कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार रवि प्रजापति से रांची में पूछताछ के दौरान उसने बताया कि इससे पहले भी वह आठ से दस बार मालदा के अनवर और इलम के जरिए 2000 के नकली नोट मंगा चुका है. वह इन नोटों को झारखंड के बाजारों में खपाता रहा है.

नोटबंदी के बाद 2016 के दिसंबर में मिला था जाली नोट

नोटबंदी के बाद नकली नोटों का पहला ज़खीरा देश में दिसंबर 2016 में आया था. जनवरी 2017 में बीएसएफ ने मालदा में 2000 के नकली नोट पकड़े थे. मिली जानकारी के अनुसार तब से अब तक इसी क्षेत्र में 40 लाख रुपये के नकली नोट पकड़े जा चुके हैं. आइएसआइ ने 2000 के नोटों में 17 में से 10 निशान हू-ब-हू नकल कर लिए हैं. चपई-नवाबगंज, मीरपुर और चिटगांव में नोट छापे जा रहे हैं. यहां से नोटों को शिवपुर लाया जाता है. नकली नोटों को छोटे-छोटे पैकेट में पैक किया जाता है और फिर तारबंदी के ऊपर से भारतीय सीमा में फेंक दिया जाता है.

अब तक गिरफ्तार जाली नोट के बड़े तस्कर

17 सितंबर 2016 को नकली नोट के एक बड़े सरगना की रांची के रातू रोड से गिरफ्तारी हुई. देश के विभिन्न राज्यों में जाली नोट का कारोबार करने के आरोप में गिरफ्तार अशोक गुप्ता करोड़ों के जाली नोट देश में खपा चुका है.

वर्ष 2015 में पाकिस्तान में छपे 1.15 लाख रुपए के नकली नोट के साथ दो तस्कर गिरफ्तार किये गये थे. निजी बस से पकड़े गए तस्करों में नेजाम नगर, रांची निवासी दानिश अंसारी के पास से 500 के 136 और जगन्नाथपुरा, रांची निवासी सत्तार अंसारी के पास से एक-एक हजार के 127 नकली नोट बरामद किये गये.

1 दिसंबर 2018 को रांची के स्टेशन रोड स्थित सरकारी बस स्टैंड से 2000 रुपये के 104 जाली नोटों (208000 रुपये) के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया गया.

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