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जेल में बंद मेंहदी हसन के अनुयायियों से 5 घंटे एटीएस ने की पूछताछ

Giridih: झारखंड एटीएस एंटी टेरिस्ट स्कॉयड की टीम गुरुवार को गिरिडीह पहुंची. टीम में एटीएस के इन्सपेंक्टर विनोद कुमार, सब इन्सपेंक्टर संतोष कुमार भी शामिल थे. उन्होंने शकील बिन हनीफ के दो अनुयायियों को रिमांड पर पर लिया. उसमें एक मो. हम्माद और दुसरा मो. माज शामिल है. पुलिस सूत्रों की मानें तो दोनों को ही एटीएस की टीम ने गिरिडीह नगर थाना में रखकर करीब पांच घंटे तक पूछताछ की. शकील बिन हनीफ के अनुयायियों का मानना है कि पैगंबर मोहम्मद को मानने से इनकार नहीं किया जा सकता. लेकिन जब कयातम आएगी, तो कयामत के आने से पहले मेंहदी हसन नबी एक साधारण इंसान के रुप में अवतरित होंगे.

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दरअसल, गिरिडीह में पैगंबर मोहम्मद को मानने और नहीं मानने का विवाद पिछले 25 दिनों से मुस्लिम समुदाय के बीच ही चल रहा है. पैगंबर मोहम्मद को नबी मानने वाले मेंहदी हसन को मानने वाले  मुस्लिम युवाओं पर भड़काने का आरोप लगाते रहे है. तो वहीं दूसरी तरफ मेंहदी हसन को मानने वाले शकील बिन हनीफ के अनुयायी का विरोध भी एक समुदाय के दूसरे पक्ष के लोगों के साथ चलता रहा. इसी क्रम में एक सप्ताह पहले भंडारीडीह में दोनों पक्ष के लोग आपस में भिड़े थे. जिसमें तौकिर कैसर और सरफराज नामक दो युवक को चोट लगा था. इसके बाद पैंगबर मोहम्मद सॉहब को मानने वाले पक्ष के लोगों ने केस दर्ज कराया था. केस दर्ज होने के बाद दो रांउड में 14 आरोपियों को जेल भेजा गया था. जेल भेजे गए आरोपियों में कोई इंजिनियर था, तो कोई अनुवादक. बहरहाल, एटीएस के जांच के बाद काफी हद तक स्पष्ट हो गया कि जेल में बंद मेंहदी हसन का अनुयायी कोई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन से नहीं है.

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