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सांसद कोष से अब अटल ज्योति योजना के लिए 2000 स्ट्रीट लाइट लगानी जरूरी

पांच राज्यों के लिए केंद्रीय गैर परंपरागत ऊर्जा मंत्रालय से शुरू की गयी थी योजना, 488 करोड़ की योजना में झारखंड को नहीं मिला है अब तक कोई लाभ

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Ranchi: केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से पांच राज्यों के लिए अटल ज्योति योजना शुरू की गयी है. 2016-17 में शुरू की गयी योजना झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, ओड़िशा और असम के लिए शुरू की गयी थी. 488 करोड़ की योजना में वैसे शहरी, ग्रामीण, अर्द्धशहरी इलाकों में सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट की स्थापना करनी थी. जहां बिजली की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.

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इस योजना के बारे में अब तक झारखंड के सांसदों को अधिक जानकारी ही नहीं है. उनकी तरफ से अधिकतर सड़क, नाली, सामुदायिक भवन के लिए ही विकास फंड की राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाता रहा है. इसके लिए इइएसएल के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार ने 2016 में ही सभी राज्यों को अवगत कराया था.

केंद्र की योजना में एमएनआरइ से 75 % अनुदान

केंद्र सरकार ने गैर परंपरागत ऊर्जा के स्त्रोत (एमएनआरइ) के तहत ब्यूरो ऑफ एनर्जी इफीशियेंसी (बीइइ), एनर्जी इफीशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (इइएसएल) को भी शामिल किया है. इसमें इन राज्यों के सांसदों, राज्यसभा सांसदों और विधानसभा सदस्यों को इस योजना का लाभ लेना था. योजना में केंद्र के एमएनआरइ मंत्रालय से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाना था.

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प्रत्येक सांसदों को दो हजार स्ट्रीट लाइट लगाने की अनुशंसा संबंधित जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, नगरपालिका, पंचायत मुख्यालय को करनी थी. इसकी लागत 4.40 करोड़ आती है. इसमें से सांसद कोष से 25 फीसदी राशि 95,49,500 रुपये ही जारी करने थे. सरकार की यह योजना नेशनल मिशन फॉर इनहैंस्ड इनर्जी इफीशिएंसी (उन्नत) और स्ट्रीट लाइटिगिं नेशनल प्रोग्राम (एसएलएनपी) के तहत कवर हो रही थी.

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योजना में पांच वर्ष तक का वार्षिक रख-रखाव भी

योजना में स्ट्रीट लाइट लगानेवाली कंपनियों को पांच वर्ष तक उसके रख-रखाव का जिम्मा भी दिया जाना था. एक स्ट्रीट लाइट की कीमत इइएसएल की तरफ से 19099 रुपये तय की गयी थी. इसमें सात वाट की एलइडी लाइट, चार्ज कंट्रोलर, 40 वाट का माड्यूल समेत 160 वाट का लिथियम बैटरी लगाना अनिवार्य किया गया है. इसमें नौ मीटर का पोल भी लगाना जरूरी है. केंद्र सरकार की तरफ से योजना के तहत एमएनआरइ से 362.25 करोड़ रुपये रिलिज करना था. जबकि एमपी स्थानीय विकास कोष के लिए 120 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है.

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