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कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर, महानगर अध्यक्ष कभी थे सुबोधकांत के साथ, अब दिख रहे डॉ अजय कुमार के गुट में

 झारखंड प्रदेश कांग्रेस में जम कर गुटबाजी  हो रही  है. गुटबाजी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री व रांची से लोकसभा प्रत्याशी रहे सुबोधकांत सहाय के समर्थकों के बीच है.

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Ranchi :  झारखंड प्रदेश कांग्रेस में जम कर गुटबाजी  हो रही  है. गुटबाजी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री व रांची से लोकसभा प्रत्याशी रहे सुबोधकांत सहाय के समर्थकों के बीच है. मामला पूरी तरह से रांची लोकसभा चुनाव के रिजल्ट से जुड़ा हुआ है. जिस तरह से सुबोधकांत सहाय को चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी, उसके लिए उनके समर्थक डॉ अजय कुमार पर आरोप लगा रहे हैं. हालांकि इस गुटबाजी के बीच सबसे अधिक चर्चा रांची महानगर अध्यक्ष संजय पांडेय की  है. महानगर अध्यक्ष होने के नाते चुनाव के दौरान सुबोधकांत के पक्ष में उनकी भूमिका काफी चर्चा में रही थी.

सुबोधकांत के साथ चुनाव प्रचार में वे हमेशा एक्टिव दिखे थे. लेकिन जैसे ही चुनाव में सुबोधकांत की हार हुई, तो वे उनके विरोध में दिखने लगे. हालांकि इन सब के बीच सुबोधकांत के समर्थकों का कहना है कि रांची लोकसभा चुनाव में उनके द्वारा बूथ मैनजमेंट में की गयी गड़बड़ी के कारण ही सुबोधकांत को करारी हार का सामना करना पड़ा है. दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी मुख्यालय में शनिवार को  समीक्षा बैठक बुलायी गयी थी, उसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और चुनाव कैंपेनिंग के चेयरमैन सुबोधकांत को नहीं बुलाया जाना भी पार्टी में गुटबाजी की चरम पराकाष्ठा को इंगित करता है.

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आरपीएन सिंह ने बताया, नहीं बुलाया गया सुबोधकांत को

शनिवार को पार्टी मुख्यालय में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जोनल को-आर्डिनेटर, जिला अध्यक्षों, एसटी, एससी, ओबीसी, युवा, महिला, अल्पसंख्यक, एनएसयूआई एवं सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष और चेयरमैन की एक आवश्यक बैठक बुलायी गयी थी. बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को उपस्थित होना था. हालांकि सुबोधकांत समर्थकों के विरोध के प्रदेश अध्यक्ष बैठक में उपस्थित नहीं हुए, लेकिन भारी विरोध के बीच आरपीएन सिंह ने बैठक की अध्यक्षता की.

इस दौरान उनसे न्यूज विंग संवाददाता ने चुनाव कैंपेनिंग के चेयरमैन होने के नाते सुबोधकांत सहाय के बैठक में नहीं होने का सवाल आरपीएन सिंह से पूछा. तो उनका जवाब था कि उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया है. इस संबंध में सुबोधकांत के समर्थकों से पूछा गया कि क्या डॉ अजय कुमार के विरोध के कारण ही उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया है. तो उनका कहना था कि वे  बिहार के पूर्व राज्यपाल एवं शिक्षाविद डीवाई पाटिल के साथ किसी काम में व्यस्त हैं. आरपीएन सिंह और समर्थकों के विपरीत बयानों से साफ है कि डॉ अजय कुमार समर्थक गुट लगातार सुबोधकांत के खिलाफ है.

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चुनाव में सुबोधकांत के साथ थे, अब लगा रहे मुर्दाबाद के नारे

पार्टी मुख्यालय में दोनों समर्थकों के बीच विरोध प्रदर्शन के साथ धक्का-मुक्की की जो स्थिति बनी, उस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा वर्तमान रांची महानगर अध्यक्ष संजय पांडेय की ही रही. सूत्रों का कहना है कि महत्वपूर्ण पद पर होने के नाते लोकसभा चुनाव के दौरान संजय पांडेय को बूथ मैनजमेंट की बड़ी जिम्मेवारी सौंपी गयी थी. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने हर समय सुबोधकांत के साथ मंचों को साझा किया. लेकिन मतदान वाले दिन सभी बूथों में पार्टी समर्थकों की उपस्थिति नहीं रहने से सुबोधकांत समर्थकों में भारी निराशा रही.

माना जा रहा है कि संजय पांडेय पर  900 के करीब बूथ मैनजमेंट की जिम्मेवारी  थी. लेकिन उन्होंने इस काम को गंभीरता से नहीं लिया. चुनावी नतीजों के बाद सुबोधकांत की हार का एक बड़ा कारण उनकी गतिविधि को ही माना गया. शनिवार को हुई धक्का-मुक्की के समय संजय पांडेय ने तो सुबोधकांत मुर्दाबाद के नारे भी लगाये. इससे सुबोधकांत गुट का नेतृत्व कर रहे सुरेंद्र सिंह और राकेश सिन्हा के साथ उनके बीच एक जंग की स्थिति भी बन गयी.

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