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असिस्टेंट प्रोफेसर के 1118 पदों की वेकेंसी जारी, वोकेशनल में एक भी सीट नहीं

जिन कोर्सेज में बच्चों की संख्या अधिक, उनके शिक्षकों का पद सृजन नहीं

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Satya Prakash Prasad
Ranchi : 10 सालों बाद जेपीएससी के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ की गयी है. गौरतलब है कि 2008 में 800 असिस्टेंट प्रोफसर की बहाली हुई थी, जिसमें कई सारी गड़बड़ियां आने के बाद जांच कमिटी के माध्यम से जांच करायी जा रही है. इसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है. बहरहाल, एक दशक बाद बहाली प्रक्रिया शुरू तो हुई है, लेकिन यह बहाली 1980 में सृजित पदों के अनुसार ही होगी. पिछले 10 सालों में झारखंड की शिक्षा में काफी कुछ बदल गया. शिक्षा विभाग को दो विभागों में बांट दिया गया- स्कूली शिक्षा और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग. झारखंड में इस दौरान कई सारे कोर्स आये, जैसे एमबीए, बीबीए, एमसीए, बीसीए, बायोटेक, एमजेएमसी और बीजेएमसी आदि वोकेशनल कोर्स राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्थापित हो चुके हैं. इन कोर्सेज में सबसे अधिक संख्या में छात्र नामांकन लेते हैं. कई विश्वविद्यालय के वोकेशनल कोर्सेज की तो राष्ट्रीय स्तर की पहचान है, लेकिन यहां वर्तमान में भी शिक्षक अनुबंध पर ही रखे जाते हैं. झारखंड में इन कोर्सेज के लिए शिक्षकों का पद ही सृजित नहीं है.

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वोकेशनल कोर्स के शिक्षक के लिए एक भी वेकेंसी नहीं

अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों और केंद्रीय विश्वविद्यालय में इन कोर्सेज में पद सृजन के अनुसार शिक्षक बहाल होते हैं. जेपीएससी ने कुल 1118 पदों पर असिस्टेंट प्रोफसर पद की वेकेंसी जारी की है. इसमें 552 नियमित और 566 बैकलॉग नियुक्ति है. कुल 1118 पदों की बहाली में वोकेशनल कोर्स के लिए एक भी शिक्षक की नियुक्ति के लिए वेकेंसी नहीं निकाली गयी है, इसके कारण वोकेशनल कोर्स के शिक्षकों में निराशा है.

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1980 में सृजित पदों पर ही होगी नियुक्ति

जेपीएससी द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर की वेकेंसी 1980 के सृजित पदों के अनुरूप ही जारी की गयी है. 2008 और 2018 में इसी तर्ज पर आयोग ने वेकेंसी जारी की है. वोकेशनल कोर्स की बात करें, तो रांची विश्वविद्यालय में 1987 से पत्रकारिता विभाग स्थापित हो गया था, वर्तमान में अन्य विभागों की तुलना में यहां छात्रों की संख्या अच्छी संख्या में है, लेकिन यह विभाग आज भी गेस्ट शिक्षकों बूते ही चल रहा है. वहीं आरयू में एमसीए विभाग 1997 में स्थापति हुआ. इस विभाग में छात्रों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन यहां भी शिक्षक गेस्ट शिक्षक के रूप पर बहाल हैं. वहीं, 2008 में रांची विश्वविद्यालय में एमबीए विभाग खुला, वर्तमान में हर सेमेस्टर में 100 छात्र हैं, इसी तर्ज पर बायोटेक, नैनोटेक आदि वोकेशनल कोर्सेज शुरू हुए, लेकिन यहां भी अुनबंध या गेस्ट शिक्षक के रूप में ही शिक्षक बहाल हैं.

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विश्वविद्यालयों ने विभाग को पद सृजन के लिए कई बार लिखा पत्र

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राज्य के सभी विश्वविद्यालयों ने वोकेशनल कोर्सेज में शिक्षकों की बहाली को लेकर कई बार उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विभाग को पद सृजन हेतु पत्र लिखा, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक कोई पहल इस दिशा में नहीं की गयी है. रांची विश्वविद्यालय के वोकेशनल कोर्स के को-ऑर्डिनेटर डॉ एके चौधरी ने कहा कि वर्तमान में वोकेशनल कोर्स छात्रों की पहली पसंद है. सबसे ज्यादा नामांकन इन्हीं कोर्स में होता है. कई बार विश्वविद्यालय की ओर से यहां के शिक्षकों के पद सृजन के लिए विभाग को पत्र लिखा गया, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गयी है.

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वोकेशनल शिक्षक संघ आंदोलन के मूड में

राज्य के वोकेशनल शिक्षकों ने एक संघ बनाया है. इसका नाम है झारखंड वोकेशनल शिक्षक संघ. इसी के बैनर तले शिक्षक आंदोलन करने में मूड में दिख रहे हैं. शिक्षक संघ जल्द ही सरकार से वोकेशन शिक्षकों के लिए पद सृजन की मांग को लेकर एचआरडी विभाग या शिक्षा मंत्री से मिलेगा. मांग नहीं पूरी होने पर संघ की ओर से आंदोलन किया जायेगा.

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सरकार मामले को समझकर ही कोई निर्णय लेगी : सचिव

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि मामला जटिल है. विभाग में उन्होंने हाल में ही योग्यदान दिया है. अधिकारियों से विचार-विमर्श करने के बाद ही सरकार इस दिशा में कोई पहल कर सकती है.

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