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विधानसभा चुनाव : सदन से सड़क तक उतरा जेएमएम, कांग्रेस फंसी है अंतर्कलह में

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  • वन अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ आंदोलन की बात कर जेएमएम ने किया विधानसभा चुनाव का आगाज
  • कांग्रेस के कई नेता अब भी डॉ अजय को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग को लेकर हैं अड़े

Ranchi : झाऱखंड विधानसभा चुनाव में राज्य की तमाम विपक्षी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की पक्षधर हैं. जेएमएम कार्यकारी अध्य़क्ष हेमंत सोरेन के आवास पर महागठबंधन के नेताओं ने एक बैठक कर संकेत दिया है कि जल्द ही सभी दलों के बीच सीटों का बंटवारा हो जायेगा. लेकिन जेएमएम इस बात को भी भलीभांति जानता है कि प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते पार्टी को राज्य के आदिवासी-मूलवासी और दलित जनता के समक्ष अपनी पहुंच मजबूत करनी है. इसे देख अब पार्टी पूरी तरह से सदन से सड़क तक उतर आयी है. इसकी शुरुआत जेएमएम ने वन कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर धऱना-प्रदर्शन से कर दी है.

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी अब भी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अंतर्कलह में ही फंसी है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक गुट अब भी डॉ अजय कुमार के खिलाफ है. वे चाहते है कि पार्टी विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में नहीं लड़े. पार्टी की इस हालात को देख राजधानी स्थित पार्टी मुख्यालय में बैठनेवाले कुछ नेता अब चुनाव लड़ने से भी मना करने लगे हैं. पार्टी के अंतर्कलह को देख इनका मानना है कि अगर वे चुनाव लड़ने की पहल भी करते हैं, तो उनके ही लोग उऩ्हें हराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

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प्रस्तावित संशोधन पर जेएमएम उतरा सड़क पर

वन अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरी तरह से सड़क पर उतर गया. उसने सरकार को आंदोलन करने की चेतावनी दे दी है. राजभवन में धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि अगर कानून में किसी तरह के संशोधन का प्रयास हुआ, तो उनकी पार्टी जनता के हित में चुप नहीं बैठेगी. इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर सरकार की विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने की भी बात कही है. इससे प्रदर्शन में आये तमाम कार्यकर्ताओं में जोश भी बढ़ा है.

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जमशेदपुर तक सिमट कर रहे गये हैं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

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जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष से अलग कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार पिछले कुछ दिनों से सिंहभूम क्षेत्र में ही सिमट कर रहते दिख रहे हैं. संभवतः वे पूर्वी या पश्चिम जमशेदपुर से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं. लेकिन पार्टी मुख्यालय में आयोजित किसी कार्यक्रम में या महागठबंधन की किसी बैठक से वे नदारद ही रहे हैं. गत 8 जून को मुख्यालय में उनके खिलाफ सुबोधकांत सहाय गुट के लोगों ने नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया था. इससे पार्टी के अंदर कलह का मैसेज महागठबंधन के अन्य नेताओं में गया था. विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ा था कि मुख्यालय में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये, जिसके कारण कांग्रेस दफ्तर में तोड़फोड़ भी हुई. उसके बाद से डॉ अजय कुमार संभवतः एक बार ही मुख्यालय आये हैं. चुनाव पर सारी बैठकें उन्होंने होटलों में ही की हैं.

प्रदेश अध्यक्ष को पद से हटाने पर अड़े हैं कांग्रेसी

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के कई नेता अब भी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार को अपने पद से हटाने की मांग पर ही अड़े हैं. सोनभद्र में आदिवासियों के नरसंहार मामले को लेकर प्रदर्शन कार्यक्रम में में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचु कहा कि लोकसभा चुनाव में खूंटी सीट पर टिकट नहीं दिये जाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस अध्यक्ष ही जिम्मेवार हैं. उनमें हार की समीक्षा करने की ताकत नहीं है. वहीं प्रदर्शन के दौरान सुबोधकांत सहाय गुट के एक नेता ने बताया कि उनके विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष के पास हिम्मत ही नहीं बची है कि वे पार्टी मुख्यालय में प्रवेश कर सकें.

हालात देख कुछ नेता छोड़ रहे टिकट की चाह

पार्टी की अंदरूनी हालत को देख अब कई नेता विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ने का मन बना रहे हैं. इनका कहना है कि जैसी हालत पार्टी की बनते जा रही है, उसे देख विधानसभा चुनाव लड़ना तो दूर, टिकट की दावेदारी करना भी सही नहीं है. लोकसभा चुनाव के दौरान कई सीटों पर उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का हवाला देते हुए नेताओं का कहना है कि गलती से किसी तरह जोड़-गणित कर टिकट लेने में वे सफल भी हो जायें, तो अपने ही नेता उन्हें चुनाव हराने में एड़ी चोटी एक कर देंगे.

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